शनि जयंतीः ये फूल है शनि देव को सबसे अधिक प्रिय

विशेष शनि पूजा

By: Shyam

Updated: 22 May 2020, 12:31 PM IST

आज शुक्रवार 22 मई को शनि देव की जयंती मनाई जा रही है। हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को शनि जयंती का पर्व मनाया जाता है। आज का दिन शनि पूजा के सर्वोत्तम दिन माना जाता है, अगर आपके जीवन में बार-बार एक के बाद दूसरी समस्या आ रहो ही हो, या फिर सालों से कोई ऐसी समस्या है जो दूर होने का नाम ही नहीं ले रही तो अब घबराने की जरूरत नहीं। आज शनि अमावस्या शनि जयंती के दिन ये उपाय जरूर करें।

आज सूर्यास्त के समय करें शनि देव का तेल से इस विधि से अभिषेक

वैसे तो कुछ लोग हर दिन या फिर शनिवार-मंगलवार के दिन शनि देव की कृपा एवं शुभ फल पाने के लिए विशेष पूजा अर्चना करते हैं, लेकिन शनि जयंती का दिन शनि पूजा के लिए बहुत खास माना जाता है। अगर इस दिन शनि के चरणों में उनको अधिक प्रिय लगने वाले इन फूलों के चढाने से वे शीघ्र प्रसन्न होकर अपने भक्तों को समस्याओं से मुक्त कर कामनाएं भू पूरी कर देते हैं।

शनि जयंतीः ये फूल है शनि देव को सबसे अधिक प्रिय

शनि जयंती के दिन शनि शाम के समय शनि मंदिर या अपने घर में ही विधिवत पूजन करने के बाद शनि देव के चरणों में केवल नीले रंग के 5 फूल एवं काले तिल के 21 दाने चढ़ा दें। ऐसा करने से शनि देव शीघ्र प्रसन्न होकर हर मनोकामना पूरी कर देते हैं।

शनि जयंतीः ये फूल है शनि देव को सबसे अधिक प्रिय

ये चीजें चढ़ाएं शनि के चरणों में-

1- शमी के पत्ते- शनि देव को शमी के पत्ते सबसे अदिक प्रिय है, ये पत्ते से शनिदेव तुरंत खुश हो जाते हैं।

2- नीले फूल- शनि को अपराजिता के फूल चढ़ाएं। ये फूल नीले होते हैं। शनि नीले वस्त्र धारण किए रहते हैं और उन्हें नीला रंग प्रिय है। इसी वजह से शनि को ये फूल चढ़ायें जाते हैं।

3- काले तिल- काले तिल का कारक शनि है। शनि को काली चीजें प्रिय है। इसी वजह से शनि की पूजा में काले तिल भी चढ़ाए जाते हैं।

4- सरसों का तेल- शनि को तेल चढ़ाने की परंपरा बहुत पुराने समय से चली आ रही है और अधिकतर लोग शनिवार को तेल का दान भी करते हैं और शनि का अभिषेक भी करते हैं।

शनि जयंतीः ये फूल है शनि देव को सबसे अधिक प्रिय

इस शनि मंत्र का जप भी 21 बार जरूर करें-

कोणस्थ पिंगलो बभ्रु: कृष्णो रौद्रोन्तको यम:।

सौरि: शनैश्चरो मंद: पिप्पलादेन संस्तुत:।।

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