स्कंद पंचमी-षष्ठी आज, जाानिये क्या है खास

26 जून 2020, शुक्रवार को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि...

By: दीपेश तिवारी

Published: 26 Jun 2020, 01:19 PM IST

स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय (Bhagwan Kartikeya) की पूजा की जाती है। स्कंद षष्ठी व्रत 26 जून 2020, शुक्रवार को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को पड़ रहा है। यह व्रत भगवान कार्तिकेय Lord Murgan के लिए रखा जाता है। भगवान कार्तिकेय भगवान शिव और माता पार्वती के बड़े पुत्र हैं। इस व्रत को मुख्य रूप से दक्षिण भारत में किया जाता है।

स्कंद षष्ठी ( Skand shasthi ) का व्रत पंचमी तिथि और षष्ठी तिथि के एक साथ ही दिन पड़ने पर यह व्रत किया जाता है। मान्याताओं के अनुसार यह स्कंद षष्ठी का व्रत शुक्ल पक्ष की षष्ठी के दिन रखा जाता है,यानि हर महीने की शुक्ल पक्ष षष्ठी के दिन स्कंद षष्ठी व्रत रखा जाता है।। यह व्रत मुख्य रूप से दक्षिण भारत के राज्यों में लोकप्रिय है। भगवान कार्तिकेय भगवान शिव और माता पार्वती के बड़े पुत्र हैं। आइए जानते हैं स्कंद षष्ठी व्रत का मुहूर्त, पूजा विधि एवं धार्मिक महत्व।

26 जून 2020 :

स्कंद षष्ठी प्रारम्भ - सुबह 7 बजकर 02 मिनट से अगले दिन

स्कंद षष्ठी समाप्त - सुबह 5 बजकर 03 मिनट तक

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भगवान कार्तिकेय षष्ठी तिथि और मंगल ग्रह के स्वामी हैं तथा दक्षिण दिशा में उनका निवास स्थान है। इसीलिए जिन जातकों की कुंडली में कर्क राशि अर्थात् नीच का मंगल होता है, उन्हें मंगल को मजबूत करने तथा मंगल के शुभ फल पाने के लिए इस दिन भगवान कार्तिकेय का व्रत करना चाहिए, क्योंकि स्कंद षष्ठी भगवान कार्तिकेय को अधिक प्रिय होने के जातकों को इस दिन व्रत अवश्य करना चाहिए।

पौराणिक मान्यता के अनुसार कार्तिकेय अपने माता-पिता और छोटे भाई श्री गणेश से नाराज होकर कैलाश पर्वत छोड़कर मल्लिकार्जुन (शिव जी के ज्योतिर्लिंग) आ गए थे और कार्तिकेय ने स्कंद षष्ठी को ही दैत्य तारकासुर का वध किया था तथा इसी तिथि को कार्तिकेय देवताओं की सेना के सेनापति बने थे।

भगवान कार्तिकेय को चंपा के फूल पसंद होने के कारण ही इस दिन को स्कंद षष्‍ठी के अलावा चंपा षष्ठी भी कहते हैं। भगवान कार्तिकेय का वाहन मोर है। ज्ञात हो कि स्कंद पुराण कार्तिकेय को ही समर्पित है।

स्कंद पुराण में ऋषि विश्वामित्र द्वारा रचित कार्तिकेय 108 नामों का भी उल्लेख हैं। इस दिन निम्न मंत्र से कार्तिकेय का पूजन करने का विधान है। खासकर दक्षिण भारत में इस दिन भगवान कार्तिकेय के मंदिर के दर्शन करना बहुत शुभ माना गया है। यह त्योहार दक्षिण भारत, कर्नाटक, महाराष्ट्र आदि में प्रमुखता से मनाया जाता है। कार्तिकेय को स्कंद देव, मुरुगन, सुब्रह्मन्य नामों से भी जाना जाता है।

स्कंद षष्ठी व्रत विधि...
: इस दिन सुबह जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई करें। इसके बाद स्नान-ध्यान कर सर्वप्रथम व्रत का संकल्प लें।
: पूजा घर में मां गौरी और शिव जी के साथ भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा को स्थापित करें। पूजा जल, मौसमी फल, फूल, मेवा, कलावा, दीपक, अक्षत, हल्दी, चंदन, दूध, गाय का घी, इत्र आदि से करें। अंत में आरती करें।
: वहीं शाम को कीर्तन-भजन पूजा के बाद आरती करें। इसके पश्चात फलाहार करें।

स्कंद षष्ठी व्रत के नियम
- जो भी श्रद्धालु स्कंद षष्ठी का उपवास करते हैं उन्हें भगवान मुरुगन का पाठ, कांता षष्ठी कवसम एवं सुब्रमणियम भुजंगम का पाठ अवश्य ही करना चाहिए।
- इस दौरान सुबह भगवान मुरुगन के मंदिर में जाकर उनके समक्ष भी पूजा करने का विधान है।
- उपवास के दौरान कुछ भी न खाएं। हां आप एक वक़्त भोजन या फलाहार कर सकते हैं।
- छः दिनों तक चलने वाले इस पर्व पर सभी छः दिनों तक उपवास करना शुभ होता है।
- कई लोग इस पर्व पर उपवास नारियल पानी पीकर भी छः दिनों तक करते हैं।
- इस दौरान मनुष्य को झूठ बोलने, लड़ने- झगड़ने से परहेज करना चाहिए।


खास मंत्र:
: भगवान कार्तिकेय की पूजा का मंत्र -

'देव सेनापते स्कंद कार्तिकेय भवोद्भव।
कुमार गुह गांगेय शक्तिहस्त नमोस्तु ते॥'

: शत्रु नाश के लिए पढ़ें ये मंत्र-

ॐ शारवाना-भावाया नम:
ज्ञानशक्तिधरा स्कंदा वल्लीईकल्याणा सुंदरा
देवसेना मन: कांता कार्तिकेया नामोस्तुते।

इसके अलावा स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय के इन मंत्रों का जाप भी किया जाना चाहिए।

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: कार्तिकेय गायत्री मंत्र- 'ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महा सैन्या धीमहि तन्नो स्कंदा प्रचोदयात'। यह मंत्र हर प्रकार के दुख एवं कष्टों के नाश के लिए प्रभावशाली है।

इस तरह से भगवान कार्तिकेय का पूजन-अर्चन करने से जीवन के सभी कष्‍टों से मुक्ति मिलती है।

आप भी स्कंद षष्ठी का व्रत रखना चाहते हैं और आपको स्कंद षष्ठी की तिथि का नहीं पता है तो हम आपको बताते हैं साल 2020 में अभी और आने वाली स्कंद षष्ठी की पूरी लिस्ट...

स्कंद षष्ठी तिथि : स्कंद षष्ठी तिथि प्रारंभ और समाप्त

26 जून 2020 : प्रारम्भ - सुबह 7 बजकर 2 मिनट से अगले दिन, समाप्त - सुबह 5 बजकर 3 मिनट तक

25 जुलाई 2020 : प्रारम्भ - दोपहर 12 बजकर 2 मिनट से अगले दिन,समाप्त - सुबह 9 बजकर 32 मिनट तक

23 अगस्त 2020 : प्रारम्भ - शाम 5 बजकर 4 मिनट से अगले दिन,समाप्त - दोपहर 2 बजकर 31 मिनट तक

22 सितंबर 2020 : प्रारम्भ - रात 11 बजकर 42 मिनट से अगले दिन,समाप्त - रात 9 बजकर 30 मिनट तक

21 अक्टूबर 2020 : प्रारम्भ - सुबह 9 बजकर 7 मिनट से अगले दिन,समाप्त - सुबह 7 बजकर 39 मिनट तक

20 नवंबर 2020 (सूर सम्हारम) : प्रारम्भ - रात 9 बजकर 59 मिनट से अगले दिन,समाप्त - 9 बजकर 29 मिनट तक

19 दिसंबर 2020 (सुब्रहमन्य षष्ठी) : प्रारम्भ - रात 9 बजकर 59 मिनट से अगले दिन, समाप्त - रात 9 बजकर 29 मिनट तक

दीपेश तिवारी
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