स्कन्द षष्ठी आज: विजय प्राप्ति के लिए करें भगवान कार्तिकेय की पूजा

आज ज्येष्ठ माह के शुक्लपक्ष की षष्ठी तिथि...

By: दीपेश तिवारी

Updated: 28 May 2020, 12:18 PM IST

आज ज्येष्ठ माह के शुक्लपक्ष की षष्ठी तिथि को 28 मई, गुरुवार का दिन है। इस दिन भगवान शिव-पार्वती के पुत्र कार्तिकेय की पूजा की जाती है। इसे स्कंद षष्ठी कहा जाता है। यह पर्व हर महीने शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है। इस दिन देवों के सेनापति और भगवान शिव जी एवं माता पार्वती के अग्रज पुत्र कार्तिकेय की पूजा-उपासना की जाती है।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार भगवान कार्तिकेय की यह पूजा खासतौर से दक्षिण भारत में की जाती है। भगवान कार्तिकेय ने तारकासुर नाम के राक्षस को मारा था। इसलिए उनकी पूजा दक्षिण भारत में खासतौर से की जाती है।

भगवान कार्तिकेय को स्कंद देव, महासेन, पार्वतीनन्दन, षडानन, मुरुगन, सुब्रह्मन्य आदि नामों से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से दीर्घायु और प्रतापी संतान की प्राप्ति होती है। साथ ही व्रती के जीवन से दुःख-दरिद्रता दूर हो जाता है। साथ ही ये पूजा विजय प्राप्ति के लिए भी की जाती है।

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ऐसे समझें स्कंद षष्ठी
दरअसल मां दुर्गा के 5वें स्वरूप स्कंदमाता को भगवान कार्तिकेय की माता के रूप में जाना जाता है। वैसे तो नवरात्रि के 5वें दिन स्कंदमाता का पूजन करने का विधान है। इसके अलावा इस षष्ठी को चम्पा षष्ठी भी कहते हैं, क्योंकि भगवान कार्तिकेय को सुब्रह्मण्यम के नाम भी पुकारते हैं और उनका प्रिय पुष्प चम्पा है।

स्कन्द षष्ठी का महत्व...
नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है, जो देवों के सेनापति कार्तिकेय की माता हैं। अतः स्कन्द देव की पूजा करने से स्कंदमाता भी प्रसन्न होती है और व्रती के सभी मनोरथ सिद्ध करती हैं। इस दिन दक्षिण भारत में विशेष पूजा-उपासना की जाती है, जिसमें भगवान कार्तिकेय का आह्वान किया जाता है। स्कन्द षष्ठी कार्तिक महीने की षष्ठी को विशेष रूप से मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन कार्तिकेय का जन्म हुआ है।

पूजा और व्रत के नियम
स्कंद षष्ठी पर भगवान शिव और पार्वती की पूजा की जाती है। मंदिरों में विशेष पूजा की जाती है। इसमें स्कंद देव (कार्तिकेय) की स्थापना और पूजा होती है। अखंड दीपक भी जलाए जाते हैं। भगवान को स्नान करवाया जाता है। भगवान को भोग लगाते हैं। इस दिन विशेष कार्य की सिद्धि के लिए कि गई पूजा-अर्चना फलदायी होती है। इस दिन मांस, शराब, प्याज, लहसुन का त्याग करना चाहिए। ब्रह्मचर्य का पालन करना जरूरी होता है। पूरे दिन संयम से भी रहना होता है।

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स्कन्द षष्ठी शुभ मुहूर्त...
पं.शर्मा के अनुसारइस दिन शुभ मुहूर्त मध्य रात्रि 12 बजकर 32 मिनट से शुरू होकर दिन के 11 बजकर 27 मिनट तक है। इस दौरान व्रती कार्तिकेय देव की पूजा उपासना कर सकते हैं।

स्कन्द षष्ठी पूजा विधि
इस दिन ब्रह्म बेला में उठकर घर की साफ-सफाई करें। इसके बाद स्नान-ध्यान कर सर्वप्रथम व्रत संकल्प लें। अब पूजा गृह में मां गौरी और शिव जी के साथ भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा पूजा चौकी पर स्थापित करें। इसके बाद देवों के देव महादेव, माता पार्वती और कार्तिकेय की पूजा जल, मौसमी फल, फूल, मेवा, कलावा, दीपक, अक्षत, हल्दी, चंदन, दूध, गाय का घी, इत्र आदि से करें। अंत में आरती आराधना करें। आप चाहे तो इस दिन उपासना भी कर सकते हैं। शाम में कीर्तन-भजन और आरती करें। इसके पश्चात फलाहार करें।

दीपेश तिवारी
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