Budget 2021: e-NAM पोर्टल से किसान ऑनलाइन बेच सकेंगे फसल, ये फायदे भी होंगे शामिल

  • e-NAM Portal : पोर्टल 8 भाषाओं में उपलब्ध है, इससे किसान अपनी मातृभाषा का चुनाव कर सकेंगे
  • पोर्टल में उपज बेचने के लिए किसानों को खुद का कराना होगा रजिस्ट्रेशन

By: Soma Roy

Published: 01 Feb 2021, 06:11 PM IST

नई दिल्ली। कोरोना काल और किसान आंदोलन की गहमा-गहमी के बीच सरकार ने बजट में किसानों के लिए कई घोषणाएं की। इसके अलावा पहले से संचालित सरकारी स्कीमों के विस्तार एवं उनके प्रति लोगों को जागरूक करने पर भी जोर दिया गया। वित्त वर्ष 2021-22 का बजट पेश करते वक्त वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही ई-नाम स्कीम का भी जिक्र किया। इसके जरिए किसान अपनी फसल को सीधे ऑनलाइन बेच सकते हैं। इससे उन्हें बिचैलियों के झंझट से छुटकारा मिलेगा। यह एक पोर्टल है, जिसके जरिए किसान देश के किसी भी कोने से जुड़ सकते हैं।

क्या है ई-नाम
यह एक ई- कृषि पोर्टल है। ये खेती से जुड़े उत्पादों को बेचने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मार्केट उपलब्ध कराता है। इसके जरिए किसान देश के किसी भी हिस्से में रहकर अपनी उपज बेच सकता है। इसके लिए उन्हें इधर-उधर भटकने या बिचैलियों के चक्कर में पड़ने की जरूरत नहीं होगी। ई-नाम यानी नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट पोर्टल को सरकार ने अप्रैल 2016 में लॉन्च किया था।

ये मिलती हैं सुविधाएं
इस कृषि पोर्टल में देश के 18 राज्यों को एक साथ जोड़ा गया है। यहां मौजूद अलग-अलग मंडियों को ऑनलाइन किया गया है। जिससे किसान आसानी से व्यापक रूप से ट्रेडिंग कर सकेंगे। इस पोर्टल पर उपज बेचने से किसान ग्राहक से सीधे रकम ले सकेंगे। इससे उन्हें ज्यादा मुनाफा होगा। क्योंकि बिचैलियों के इसमें हस्तक्षेप के चलते उन्हें ज्यादा लाभ नहीं मिल पाता था। पोर्टल में 8 भाषाओं का विकल्प उपलब्ध है। आप सुविधानुसान अपनी भाषा का चुनाव कर सकते हैं।

पोर्टल में रजिस्ट्रेशन कराने की प्रक्रिया
इस ऑनलाइन पोर्टल से जुड़ने के किसान को अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके लिए लिंक पर क्लिक करें। यहां रजिस्ट्रेशन में जाकर अपनी ई-मेल भरें। इसके बाद एक अस्थायी आईडी आपके मेल पर आएगी। आप इसमें अपने अनुसार संशोधन करके इस्तेमाल कर सकते हैं। इस दौरान अपनी पर्सनल डिटेल्स से जुड़ी जानकारी भरें और जरूरी दस्तावेज की फोटोकाॅपी लगाएं। रजिस्ट्रेशन के बाद आप इसमें उपज बेच सकेंगे। अभी तक करीब 1.68 करोड़ कृषक इसमें रजिस्टर हो चुके हैं।

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