Budget 2021: जानिए क्या-क्या बिकेगा और किसका निकलेगा आईपीओ

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट में की बड़ी घोषणा।
  • दो पीएसयू बैंकों और एक जनरल इंश्योरेंस कंपनी का निजीकरण।
  • बीपीसीएल, एयर इंडिया आदि में हिस्सेदारी बेचने की भी उम्मीद।

नई दिल्ली। संसद में सोमवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट 2021 पेश किया। इस दशक के पहले बजट में केंद्र सरकार का लक्ष्य विनिवेश के जरिये पौने दो लाख रुपये जुटाने का है और यह बीते वित्तीय वर्ष की तुलना में करीब 35 हजार करोड़ कम है। इसके साथ ही वित्त मंत्री ने इस रकम को जुटाने के लिए अपनी योजना का भी खुलासा किया, जिससे पता चलता है कि सरकार अब बैंकों का निजीकरण करेगी। आइए जानते हैं कि नए बजट के तहत किसका निजीकरण होगा और किसमें आईपीओ लाया जाएगा।

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केंद्र सरकार ने सोमवार को घोषणा की है कि दो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और एक जनरल बीमा कंपनी का निजीकरण किया जाएगा। इसके साथ ही LIC को वित्तीय वर्ष 2021-22 में बैंकिंग और बीमा क्षेत्रों में समेकन के हिस्से के रूप में सूचीबद्ध किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने पीएसयू बैंकों के 20,000 करोड़ रुपये के पुनर्पूंजीकरण की भी घोषणा की है।

पीएसयू बैंकों के निजीकरण का क्या मतलब है?

वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि सरकार आगामी वित्तीय वर्ष में दो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण की प्रक्रिया शुरू करेगी। हालांकि, उन्होंने बैंकों के नाम का खुलासा नहीं किया। सरकार वर्तमान में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अधिकांश हिस्सेदारी रखती है। सरकार से उम्मीद है कि वह दो पीएसयू बैंकों में हिस्सेदारी को 51 प्रतिशत से नीचे लाएगी या पूरी हिस्सेदारी को निजी स्वामित्व को बेच देगी।

निजीकरण के लिए कौन सा बैंक होगा?

बैंकिंग सूत्रों की मानें तो सरकार द्वारा छोटे और मध्यम स्तर के बैंकों का निजीकरण किए जाने की संभावना है। भारतीय स्टेट बैंक और पीएनबी जैसे बड़े बैंकों के ढांचे को बदलने की संभावना नहीं है। दो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण और एलआईसी की हिस्सेदारी की बिक्री से सरकार को विनिवेश लक्ष्य पूरा करने और राजकोषीय बाधाओं को कम करने में मदद मिलनी चाहिए।

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क्या आईडीबीआई बैंक है शामिल?

आईडीबीआई बैंक का नाम सरकार की सूची में होने की संभावना नहीं है। IDBI बैंक में फिलहाल भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की अधिकांश हिस्सेदारी है। LIC को समय के साथ IDBI में हिस्सेदारी कम करनी चाहिए। निकट भविष्य में LIC के आईडीबीआई बैंक पर नियंत्रण छोड़ने की संभावना नहीं है।

किस जनरल इंश्योरेंस कंपनी का निजीकरण किया जाएगा?

सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी के नाम का खुलासा नहीं किया है जिसका निजीकरण किया जाएगा। वैसे चार पीएसयू जनरल इंश्योरेंस कंपनियां हैं, जिनके नाम न्यू इंडिया एश्योरेंस, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस (UII), नेशनल इंश्योरेंस कंपनी (NIC) और ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी (OIC) है। सरकार ने इससे पहले UII, NIC और OIC को मर्ज करने की अपनी योजना को छोड़ दिया था और उनका पुनर्पूंजीकरण करने का निर्णय लिया था। इसके अलावा, सरकार के पास पुनर्बीमाकर्ता जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (GIC Re) भी है।

सरकार के लिए LIC IPO का क्या मतलब है?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि जीवन बीमा निगम (LIC) 2021-22 में प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) के लिए जाएगी। यह एलआईसी के प्रबंधन के तहत 32 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ एक मेगा आईपीओ होने की संभावना है। सरकार को एलआईसी आईपीओ से एक बड़ी रकम मिलने की उम्मीद है, जिससे जीवन बीमा कंपनी बाजार पूंजीकरण में सबसे बड़ी कंपनियों में से एक बना जाएगी। LIC ने पहले ही IPO के लिए काम शुरू कर दिया है।

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इनका भी नाम है शामिल

रिपोर्ट के मुताबिक सरकार अगले वित्त वर्ष में भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL), एयर इंडिया, कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकॉर), शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) के विनिवेश पर भी मोहर लगा सकती है। वहीं, शेयर बाजार में तेजी को देखते हुए केंद्र सरकार कुछ सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (CPSE) में अपनी हिस्सेदारी को ऑफर फॉर सेल (OFS) द्वारा बेचने का कदम उठा सकती है।

किससे कितनी रकम मिलने की उम्मीद

बीपीसीएल में हिस्सेदारी बेचने से केंद्र सरकार के खाते में करीब 60 हजार करोड़ रुपये आ सकते हैं। बताया जा रहा है कि सरकार देश की दूसरी सबसे बड़ी तेल कंपनी में से अपनी 52.98 फीसदी हिस्सेदारी को बेच सकती है। सरकार ने घोषणा की है कि बीपीसीएल के रणनीतिक खरीदार को कंपनी का मैनेजमेंट कंट्रोल भी दिया जाएगा।

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अमित कुमार बाजपेयी
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