ICICI Bank ने ब्याज दरों में की कटौती, अब ग्राहकों को मिलेगा सस्ता लोन

  • ICICI bank ने अपने एमसीएलआर में 0.10 फीसदी की कमी कर दी है
  • अब आपको लोन लेने के लिए 8.65 फीसदी की दर से ब्याज देना होगा

By: Shivani Sharma

Published: 01 Jul 2019, 02:59 PM IST

नई दिल्ली। भारत में प्राइवेट सेक्टर के दूसरे सबसे बड़े बैंक आईसीआईसीआई बैंक ( ICICI Bank ) ने अपने ग्राहकों को राहत दी है। बैंक ने 0.10 फीसदी ब्याज कम करने की घोषणा की है। बैंक ने जमा दरों में कटौती करने के कुछ हफ्ते बाद यह कदम उठाया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ( reserve bank of india ) ने फरवरी से लेकर अब तक रेपो रेट ( repo rate ) में 0.75 फीसदी की कटौती की है। इस कटौती के बाद कई बैंकों ने अपने ग्राहकों को राहत देने के लिए एमसीएलआर ( MCLR ) की दरें घटा दी हैं।


8.65 फीसदी हुई ब्याज दर

आईसीआईसीआई बैंक ने सभी अवधियों के लोन पर एमसीएलआर ( MCLR ) को 0.10 फीसदी घटा दिया है। नई दरें सोमवार से लागू हो गई हैं। कटौती के बाद अब एक साल अवधि वाले लोन के लिए MCLR घटकर 8.65 फीसदी हो गई है। इस तरह की कैटेगरी में ज्यादातर घर गिरवी रखकर लिए जाने वाले कर्ज और ऑटो लोन आते हैं।


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ग्राहकों को मिलता है सीधा फायदा

बैंक का MCLR घटने के बाद बैंक का होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन सस्ता हो जाता है, जिससे लोन लेने वाले ग्राहकों को फायदा मिलता है। बैंकों के द्वारा MCLR कम होने पर ग्राहकों को पहले की तुलना में कम EMI देनी होगी। आपको बता दें कि इससे पहले देश के और भी बैंकों ने अपनी ब्याज दरों में कमी की है, जिसका सीधा फायदा ग्राहकों को मिल रहा है।


MCLR क्या होता है

MCLR को मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट कहा जाता है। एमसीएलआर के तहत बैंक फंड की लागत के हिसाब से ब्याज की दरों को तय किया जाता है। आपको बता दें कि ये बेंचमार्क दर होती हैं। बैंक अगर अपने MCLR को बढ़ा देता है तो उससे सभी तरह के लोन महंगे हो जाते हैं।


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इन लोगों को मिलता है फायदा

आईसीआईसीआई के अलावा एक्सिस और एचडीएफसी बैंक जैसे देश के निजी क्षेत्र के शीर्ष घरेलू बैंकों ने भी अपनी ऋण ब्याज दरों में 0.10 फीसदी से 0.25 फीसदी तक की कटौती की है। बैंकों द्वारा MCLR बढ़ाए या घटाए जाने का असर नए लोन लेने वालों के अलावा उन ग्राहकों पर पड़ता है, जिन्होंने अप्रैल 2016 के बाद लोन लिया हो। दरअसल अप्रैल 2016 से पहले रिजर्व बैंक द्वारा लोन देने के लिए तय मिनिमम रेट बेस रेट कहलाती थी, यानी बैंक इससे कम दर पर कस्टमर्स को लोन नहीं दे सकते थे। 1 अप्रैल 2016 से बैंकिंग सिस्टम में MCLR लागू हो गई और यह लोन के लिए मिनिमम दर बन गई, यानी उसके बाद MCLR के आधार पर ही लोन दिया जाने लगा।

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