सरकार ने सुकन्या समृद्धि योजना में किया भारी बदलाव, जाने यहां

सरकार ने सुकन्या समृद्धि योजना में किया भारी बदलाव, जाने यहां

Abhishek Tiwari | Publish: May, 17 2016 02:41:00 PM (IST) फाइनेंस

कई बदलावों के बावजूद इस स्कीम पर 8.6 पर्सेंट की दर से ब्याज मिल रहा है, यह पीपीएफ, एफडी एवं रेकरिंग डिपॉजिट जैसे प्रॉडक्ट्स पर मिलने वाले ब्याज से ज्यादा है

नई दिल्ली। सरकार ने सुकन्या समृद्धि योजना के नियमों में भारी बदलाव किया है। नियमों में बदलाव से वास्तविकता में जिनको इस योजना से फायदा मिलना चाहिए उनपर किसी प्रकार का असर नहीं पड़ेगा। बदले गए नियमों के मुताबिक, नॉन-रेजिडेंट इंडियन अब सुकन्या समृद्धि योजना(एसएसवाई) में खाता नहीं खोल सकते हैं। अगर आपका या आपकी बच्ची का रेजिडेंशियल स्टेटस बदलकर नॉन-रेजिडेंट हो जाता है या बिटिया इस स्कीम के दौरान किसी दूसरे देश की नागरिकता ले लेती है तो नागरिकता या रेजिडेंशियल स्टेटस में बदलाव की तारीख से कोई ब्याज नहीं दिया जाएगा और खाते को उस तारीख से बंद मान लिया जाएगा।

वित मंत्रालय ने मार्च में जारी किया था नोटिफिकेशन
बच्ची तभी एसएसवाई अकाउंट के लिए योग्य मानी जाएगी, जब खाता खोले जाने के समय वह रेजिडेंट इंडियन सिटिजन हो और खाते की मैच्योरिटी या उसके बंद होने तक उसका यही स्टेटस बना रहे। इस नए नियम के बारे में फाइनेंस मिनिस्ट्री ने मार्च में नोटिफिकेशन जारी किया था। नए नियमों के मुताबिक, रेजिडेंशियल स्टेटस में बदलाव की जानकारी पैरेंट या गार्डियन को एक महीने के भीतर अथॉरिटीज को देनी होगी। अगर बैंक या पोस्ट ऑफिस को सूचना नहीं दी गई हो और रेजिडेंट स्टेटस या सिटिजनशिप में बदलाव के बाद खाते में ब्याज जमा हो गया हो तो वह रकम सरकार को लौटानी होगी और शेष रकम एसएसवाई एकाउंट होल्डर को दी जाएगी।

पेनाल्टी के नियमों में भी हुआ है बदलाव
कड़े जुर्माने के लिए एक नया क्लॉज भी जोड़ा गया है। स्कीम में सालाना न्यूनतम 1000 रुपये के अंशदान की शर्त पूरी न करने पर ऐसे डिफॉल्ट को रेग्युलराइज करने के लिए खाताधारक से ऐसे हर साल के लिए 50 रुपये की पेनाल्टी ली जाती थी। इसके साथ वह मिनिमम कंट्रीब्यूशन भी लिया जाता था। अब अगर पेनाल्टी न चुकाई जाए तो डिफॉल्ट की तारीख से पहले की जमा रकम सहित पूरे डिपॉजिट पर पोस्ट ऑफिस सेविंग्स बैंक एकाउंट रेट की दर से ब्याज मिलेगा।

अब खाता बंद कराने में भी आएगी समस्या
यह दर अभी 4 पर्सेंट है। अगर अतिरिक्त ब्याज दे दिया गया हो तो उसे वापस ले लिया जाएगा। हालांकि पेनाल्टी चुकाने के लिए 15 साल की विंडो ने इस नए नियम की हवा निकाल दी है। मेडिकल आपातकालीन स्थिति के आधार पर वक्त से पहले खाता बंद कराने की इजाजत पहले इस स्कीम में किसी भी वक्त थी, लेकिन अब इसमें कुछ बंदिशें लगाई गई हैं। अब अगर खाता कम से कम पांच साल से न चल रहा हो तो उसे इस स्थिति में बंद नहीं कराया जा सकता है।

निवेश की अवधि को घटाकर 15 से 14 साल किया गया
अगर अकाउंट होल्डर पांच साल पूरे होने से पहले विदड्रॉ करना चाहता हो तो उसके इनवेस्टमेंट पर पोस्ट ऑफिस बैंक एकाउंट की दर से ब्याज मिलेगा। एसएसवाई स्कीम में निवेश की अवधि को भी घटाकर 15 से 14 साल कर दिया गया है। अब आप अपने अंशदान को ई-ट्रांसफर भी कर सकते हैं।

ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं
इन सभी बदलावों के बावजूद इस स्कीम पर 8.6 पर्सेंट की दर से ब्याज मिल रहा है। यह पीपीएफ, एफडी और रेकरिंग डिपॉजिट जैसे प्रॉडक्ट्स पर मिलने वाले ब्याज से ज्यादा है।
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