इंदिरा गांधी मातृत्व पोषण योजनाः दूसरी बार मां बनने वाली महिलाओं को सरकार देगी 6 हजार रूपए, किश्तों में मिलेगी रकम

  • Indira Gandhi Matritva Poshan Yojana : महिलाओं को गर्भनिरोधक योजनाओं को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है
  • बच्चों एवं गर्भवती महिला के संपूर्ण विकास के लिए चलाई जा रही है ये स्कीम

 

By: Soma Roy

Published: 17 Dec 2020, 05:23 PM IST

नई दिल्ली। गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों के संपूर्ण विकास एवं गर्भावस्था के दौरान किसी तरह की दिक्कत न हो इसके लिए सरकार की ओरसे इंदिरा गांधी मातृत्व पोषण योजना चलाई जा रही है। इसमें प्रेगनेंट महिलाओं को सरकार की ओर से 6 हजार की आर्थिक मदद दी जाती है। ये उन्हें किश्तों में दी जाती है। ये योजना राजस्थान सरकार की ओर से लागू की गई है। इसका लाभ दूसरी बार महिलाओं के प्रेगनेंट होने पर मिलता है। इस दौरान उन्हें गर्भनिरोधक योजनाओं को अपनाने के लिए भी प्रेरित किया जाता है। अगर ाअप भी इस योजना का लाभ लेना चाहती हैं तो कुछ प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।

योजना का मकसद
इंदिरा गांधी मातृत्व पोषण योजना का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं तथा तीन वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ एवं पोषण की स्थिति में सुधार लाना है। साथ ही उन्हें परिवार नियोजन के प्रति जागरूक बनाना है। यह योजना मातृ एवं शिशु पोषण संकेतकों पर बनी रैंकिंग के आधार पर प्रदेश के चार अत्यधिक पिछड़े जिलों उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर एवं प्रतापगढ़ में शुरू की गई है। बाद में राज्य सरकार इसे चरणबद्ध रूप से पूरे प्रदेश में लागू करेगी।

5 किश्तों में मिलेगी रकम
इंदिरा गांधी मातृत्व पोषण योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को दी जाने वाली आर्थिक मदद 5 किश्तों में दी जाती है। पहली किश्त 1000 रूपए गर्भावस्था जांच और पंजीकरण होने पर, दूसरी किश्त 1000 रूपए कम से कम दो प्रसव पूर्व जांचें पूरी होने पर, तीसरी किश्त 1000 रूपए संस्थागत प्रसव होने पर, चौथी किश्त 2000 रूपए बच्चे के जन्म के 105 दिन के अंदर सभी टीके नियमित रूप से लगवाने पर तथा बच्चे का जन्म पंजीकरण होने पर एवं आखिरी किश्त 1000 रूपए दंपती की दूसरी संतान पैदा होने के तीन माह के भीतर परिवार नियोजन के साधन अपनाने पर दी जाती है।

43 करोड़ का रखा गया बजट
इस योजना से हर साल करीब 77 हजार से अधिक महिलाएं लाभांवित होंगी। महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान बेहतर पोषण मिल सके एवं उनका ठीक से इलाज हो इसके लिए ये योजना चलाई जा रही है। इसके लिए सरकार प्रति वर्ष 43 करोड़ का बजट रख रही है। इसका वितरण वित्त पोषण खान एवं भूविज्ञान विभाग के अधीन स्टेट मिनरल फाउण्डेशन ट्रस्ट की ओर से किया जाएगा। योजना का लाभ लेने के लिए महिलाओं को अपना पंजीकरण कराना होगा।

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