रत्नों की उपाधियों से नवाजे जाएंगे Government Banks, 15 अगस्त को हो सकती है घोषणा

  • सरकारी कंपनियों की तरह Government Banks को महारत्न, नवरत्न और मिनिरत्न से नवाजा जा सकता है
  • उपाधि मिलने के बाद Public Sector Bank भी कर सकते हैं कंपनियों की तरह आजादी के साथ अपना काम

By: Saurabh Sharma

Updated: 12 Aug 2020, 03:56 PM IST

नई दिल्ली। सरकारी कंपनियों की तरह अब पब्लिक सेक्टर बैंक ( Public Sector Bank ) भी रत्न से सुसज्जित होंगे। सरकारी बैंकों ( Government Bank ) को महारत्न ( Maharatna ), नवरत्न ( Navratna ) और मिनिरत्न ( Miniratna ) से नवाजा जाएगा। 15 अगस्त को इसकी घोषणा हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बैंकों के साथ दूसरे वित्तीस संस्थानों को भी सरकार पूरी आजादी देने के मूड में दिखाई दे रही है। उपाधियों से नवाजे जाने के बाद सरकारी कंपनियों की तरह से सरकारी बैंकों को भी काम करने की पूरी आजादी हो जाएगी। इंवेस्टमेंट से लेकर बड़े प्रपोजल तक में खुद फैसला ले पाएंगे। उन्हें सरकार और आरबीआई की ओर ताकने की जरुरत नहीं होगी। आपको बता दें कि कंपनियों को उनके टर्नओवर और प्रोफिट के आधार पर दर्जा दिया जाता है।

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बैंक कर्मचारियों को कितना होगा फायदा
जानकारी के अनुसार देश के बैंक कर्मचारियों को इसका फायदा दिया जाएगा। किसी कर्मचारी के आधार पर बैंक के शेयर देने का भी प्रस्ताव किया गया है। जानकारी के अनुसारी सरकारी कंपनियों को तीन तरह की उपधियों से नवाजा जाता है। जिसमें महारत्न, नवरत्न और मिनिरत्न शामिल है। मिनिरत्न में दो सब कैटेगिरी रखी हैं। इन सभी कैटेगिरी में अलग-अलग क्राइटेरिया के हिसाब से कंपनियों को रत्नों की उपाधि दी जाती है।

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क्या होती महारत्न कैटेगिरी
महारत्न कैटेगिरी में उन कंपनियों को रखा जाता है, जिनका तीन सालों तक 5000 करोड़ से अधिक का शुद्ध लाभ होता है और इस दौरान नेट वर्थ 15000 करोड़ रुपए होता है और समान अवधि में औसत टर्नओवर 25000 करोड़ रुपए होता है। इसके बाद कंपनियां शेयर बाजार में इक्विटी के जरिए निवेश कर सकती हैं। दूसरी कंपनियों को फाइनेंशियल पार्टनर बनाने के साथ विदेशी कंपनियों के साथ मर्जर या एक्विजिशन कर सकती हैं। इसके लिए 5 हजार करोड़ रुपए की सीमा है।

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नवरत्न कंपनियों की खासियत
नवरत्न का दर्जा हासिल करने के लिए 100 में से 60 का स्कोर होना काफी जरूरी है। इनको 6 पैरामीटर्स में मापा जाता है। जिनमें नेट प्रॉफिट, नेटवर्थ, मैनपॉवर कॉस्ट, प्रोडक्शन कॉस्ट, सेवाओं की लागत, पीबीडीआईटी और बिजनेस में लगाई गई कैपिटल शामिल होती है।

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मिनीरत्न कैटेगरी की कंपनियां
इसमें दो सब कैटेगिरी भी शामिल होती है। पहली सब कैटेगिरी के तहत पब्लिक सेक्टर कंपनी को लगातार तीन सालों तक प्रोफिट दिखाना होगा या फिर पिछले तीन सालों में से किसी एक साल 30 करोड़ रुपए या उससे अधिक का प्रोफिट दिखाना होता है। वहीं दूसरी सब कैटेगिरी पब्लिक सेक्टर कंपनी को पिछले तीन सालों से लगातार प्रोफिट दिखाने के साथ पॉजिटिव नेटवर्थ भी होना काफी जरूरी है।

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