Swadhar Greh Scheme: बेसहारा महिलाओं को रोजगार समेत रहने के लिए मिलेगी छत, जानें कैसे लें लाभ

  • Swadhar Greh Scheme: घरेलू हिंसा की शिकार एवं अन्य किसी रूप से प्रताड़ित महिलाओं को उनका सम्मान लौटाने के लिए चलाई जा रही ये स्कीम
  • आश्रयहीन औरतों को रहने के लिए छत समेत दूसरी जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं

By: Soma Roy

Published: 16 Nov 2020, 05:52 PM IST

नई दिल्ली। देश में महिलाओं की स्थिति सुधारने एवं घरेलू हिंसा (Domestic Violence) एवं अन्य उत्पीड़न की शिकार औरतों को सरकार अब सहारा देगी। उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार जहां उन्हें रोजगार मुहैया कराएगी। वहीं उनके बेसहारा होने पर रहने के लिए छत का भी इंतजाम करेगी। बेसहारा औरतों (Scheme for women) की मदद के मकसद से स्वाधार गृह योजना चलाई जा रही है। इसमें उनकी योग्यता के अनुसार अलग-अलग चीजों की ट्रेनिंग देकर उन्हें रोजी-रोटी कमाने लायक बनाया जाता है।

क्या है स्वाधार गृह योजना
ऐसी महिलाएं जिन्हें दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा एवं अन्य किसी कारण से घर से निकाल दिया गया हो। उनके पास कमाई का कोई जरिया नहीं है या शारीरिक रूप से अक्षम हैं, ऐसी आश्रयहीन महिलाओं को आश्रय देने के मकसद से इस योजना को शुरू किया गया था। इस स्कीम में महिलाओं के रहने समेत उनके खाने और कपड़ों समेत अन्य जरूरी चीजों को मुहैया कराया जाता है।

योजना का मकसद
आश्रयहीन महिलाओं को सहारा देने एवं उन्हें भावनात्मक रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए ये स्कीम काफी कारगर है। इस योजना में महिलाओं को उनके परिवार में लौटने के लिए कानूनी मदद भी उपलब्ध कराई जाती है। साथ ही महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण प्रदान करने और उनका आत्मसम्मान लौटाकर उन्हें समाज में रहने के लिए सक्षम बनाया जाता है।

योजना के लिए पात्रता
इस योजना के तहत ऐसी महिलाएं जो सामाजिक रूप से बहिष्कृत और आर्थिक रूप से कमजोर हैं, जिन्हें परिवार ने खुद से अलग कर दिया गया हो, आपदा से पीड़ित हो, किसी अपराध के लिए जेल से सजा पूरी कर लौटी हो, लेकिन उनके पास रहने या कुछ करने के लिए न हो, वेश्यावृति और मानव तस्करी की शिकार, एचआईवी से पीड़ित एवं घरेलू हिंसा आदि से पीड़ित हो, ऐसी महिलाओं को स्वाधार गृह योजना का लाभ मिल सकता है।

इससे होने वाले फायदे
स्वाधार गृह योजना के तहत घरेलू हिंसा से पीड़ित महिला को एक साल तक हॉस्टल में रहने की अनुमति दी जाती है। अगर उनकी समस्या ज्यादा है तो इसे तीन श्रेणियों में बांटा गया है। 55 वर्ष से अधिक आयु की महिलाएं 60 वर्ष तक स्वाधार गृह में रह सकती हैं, उसके बाद उन्हें वृद्धा आश्रम भेज दिया जाता है। यदि महिला की संतानों में पुत्रियां भी हैं, तो पुत्री 18 वर्ष की उम्र पूरी करने तक मां के साथ रह सकती है। यदि पुत्र है तो वह 12 वर्ष की उम्र पूरी करने तक मां के साथ रह सकता है। इसके अलावा उनके रहने के लिए अस्थायी निवास, खाने—पीने की व्यवस्था एवं मेडिकल सुविधा भी मुहैया कराई जाती है।

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