Moratorium की वजह से इन पांच Private Banks का NPA हो जाएगा दोगुना

  • India Ratings की रिपोर्ट के अनुसार Moratorium के कारण पांच बड़े बैंकों का NPA बढ़कर हो सकता है 5 फीसदी से ज्यादा
  • HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank, Kotak Mahindra Bank और Indusind Bank के नाम हैं शामिल

By: Saurabh Sharma

Updated: 12 Jul 2020, 03:05 PM IST

नई दिल्ली। जहां एक ओर मोराटोरियम ( Loan Moratorium ) लागू करने से बैंक ग्राहकों को राहत मिली हैं। वहीं दूसरी ओर बैंकों को भारी नुकसान हो सकता है। इंडिया रेटिंग्स की रिपोर्ट ( India Ratings ) के अनुसार मोराटोरियम की वजह से देश के पांच बड़े प्राइवेट बैंकों का एनपीए ( Private Banks NPA Increase ) बढ़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार एचडीएफसी बैंक ( HDFC Bank ), आईसीआईसीआई बैंक ( ICICI Bank ), एक्सिस बैंक ( Axis Bank ), कोटक महिंद्रा बैंक ( Kotak Mahindra bank ) और इंडसइंड बैंक ( Indusind Bank ) के एनपीए में इजाफा ( NPA Rise ) होकर पांच फीसदी तक हो सकता है। आपको बता दें इन पांचों बैंकों की बैंकिंग सिस्टम ( Banking System ) में 25 फीसदी तक भागेदारी है। जबकि प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर ( Private Banking Sector ) में 75 फीसदी हिस्सेदारी है।

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इंडिया रेटिंग्स का अनुमान
- रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि देश के पांच बड़े प्राइवेट बैंकों के एनपीए में 2.7 फीसदी से इजाफा होकर 5 फीसदी तक हो सकता है।
वित्त वर्ष 2019 में इन बैंकों का एनपीए 2.3 फीसदी था।
- वित्त वर्ष 2020 में इन 5 बैंकों की जमा वृद्धि 18.8 फीसदी रही है।
- वित्त वर्ष 2019 में यह 18.5 फीसदी रही थी।
- इस अवधि में कर्ज की रफ्तार 19.1 फीसदी से घटकर 15 फीसदी पर आ गई है।
- पिछले छह महीनों में आरबीआई ने बैंकिंग सिस्टम में 1.7 लाख करोड़ रुपये की लिक्विडिटी डाली है।

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अर्थव्यवस्था पर असर
रिपोर्ट के अनुसार कोरोना वायरस महामारी की वजह से बैंकिंग सेक्टर की जीडीपी पर बेहद गहरा असर देखने को मिल सकता है।इसके अलावा बैंकों ने अपनी एक्स्ट्रा लिक्विडिटी का बड़ा हिस्सा रिवर्स रेपो रेट में लगा दिया है। पिछले एक साल में रिवर्स रेपो रेट 215 बेसिस अंकों की कटौती कर 3.35 फीसदी पर आ गया है। वहीं कॉस्ट ऑफ फंड्स में 5 से 6 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है।इंडिया रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार एनपीए में इजाफा भले ही कम हो, लेकिन रिफाइनेंसिंग एक बड़ी चुनौती रहेगी। कर्ज की मांग में कमी के कारण बैंक अपनी अतिरिक्त तरलता को कम रिटर्न वाले विकल्पों में निवेश कर रहे हैं।

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