स्टडी में हुआ खुलासा, देश की इस जाति के पास है कुल संपत्त‍ि का 41 फीसदी हिस्सा

'वेल्थ ओनरशिप ऐंड इनइक्वलिटी इन इंडिया: अ सोशियो-रिलीजियस एनालिसिस' नाम की एक स्टडी से सामने आया कि देश की कुल संपदा का करीब 41 फीसदी हिस्सा उन हिंदू सवर्णों के पास है जिनकी जनसंख्या में हिस्सेदारी 25 फीसदी भी नहीं है।

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Updated: 18 Feb 2019, 01:36 PM IST

नई दिल्ली। भारत में जातियों के प्रति भेदभाव का मुद्दा लंबे समय से चलता आ रहा है। 'वेल्थ ओनरशिप ऐंड इनइक्वलिटी इन इंडिया: अ सोशियो-रिलीजियस एनालिसिस' नाम की एक स्टडी से सामने आया कि आर्थिक असमानता में जातीय कारक हावी है। इस अधय्यन के मुताबिक देश की कुल संपदा का करीब 41 फीसदी हिस्सा उन हिंदू सवर्णों के पास है जिनकी जनसंख्या में हिस्सेदारी 25 फीसदी भी नहीं है। ये अधय्यन करीब दो साल तक चला और साल 2015 से 2017 के बीच सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी, जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ दलित स्टडीज के द्वारा संचालित किया गया।


आर्थिक असमानता में जातीय कारक हावी

आपको बता दें कि देश में हिंदू उच्च जातियों की जनसंख्या में हिस्सेदारी करीब 22.28 फीसदी ही है, लेकिन कुल संपदा में उनका हिस्सा इसके करीब दोगुना यानी 41 फीसदी तक है। स्टडी के मुताबिक अनुसूचित जाति (SC) के लोगों के मुकाबले हिंदुओं की कथ‍ति उच्च जातियों (HHC) यानी सवर्णों के पास चार गुना ज्यादा संपत्ति है। बात अगर हिंदू अन्य पिछड़ा वर्ग (HOBC) की आबादी की करें तो ये करीब 35.66 फीसदी है और उनकी देश के कुल संपदा में हिस्सेदारी 31 फीसदी तक है। इसी तरह एससी-एसटी की कुल जनसंख्या में हिस्सेदारी करीब 27 फीसदी है, लेकिन देश की संपदा में उनकी हिस्सेदारी महज 11.3 फीसदी है।


इन राज्यों में है इतना पैसा

स्टडी के अनुसार देश की कुल संपदा का 17.5 फीसदी हिस्सा महाराष्ट्र में है, 11.6 फीसदी हिस्सा यूपी में, 7.4 फीसदी केरल में, 7.2 फीसदी तमिलनाडु में और 6 फीसदी हिस्सा हरियाणा में है। पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में संपदा का 70 फीसदी हिस्सा शीर्ष 20 फीसदी परिवारों के पास है। दूसरी तरफ, झारखंड, ओडिशा, बिहार जैसे राज्यों के 20 फीसदी सबसे ज्यादा गरीब परिवारों के पास महज 2 फीसदी संपदा है।

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