लोगों को दर्द से तड़पता देख मन में जगी डॉक्टर बनने की चाह, जानिए सीएमओ डॉ. शिवकुमार दीक्षित के जीवन की अनकही बातें

— फिरोजाबाद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने पत्रिका को दिए इंटरव्यू में पूछे गए सवालों के बेबाकी से जवाब दिए।

फिरोजाबाद। गांव में लोगों को बीमारी से तड़पता देख किसी का दिल इतना व्यथित हो सकता है कि वह डॉक्टर बनकर जनसेवा के कार्य में लग जाए। कुछ ऐसा ही हुआ फिरोजाबाद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शिवकुमार दीक्षित के साथ। जिन्होंने गरीब और पीड़ित लोगों को जब दर्द से तड़पते देखा तो उनके मन में जनसेवा का भाव जागृत हो गया और माता—पिता के आशीर्वाद से वह डॉक्टर बनकर जनसेवा करने लगे। सीएमओ ने पत्रिका को दिए अपने विशेष साक्षात्कार में अपने जीवन से जुड़ी कई बातों को शेयर किया। आइए जानते हैं क्या बोले फिरोजाबाद के सीएमओ—

प्रश्न— जीवन में आगे बढ़ने का मुख्य उद्देश्य क्या रहा ?
जवाब— मैं गांव का रहने वाला हूं। मैं जब देखता था कि गांव के बीमार लोग इलाज के लिए काफी परेशान होते थे और मैं देखता था कि डॉक्टर के यहां काफी भीड़ होती थी। उन्हें देखकर मेरे मन में स्वाभाविक इच्छा जागृत हुई कि मैं ऐसे लोगों की मदद करुं और यहर सोचकर मैं इस लाइन में आया।

प्रश्न— इसमें आपको किन लोगों का सहयोग मिला?
जवाब— मेरी सफलता में मेरे माता—पिता और मेरे शिक्षकों का पूरा सहयोग रहा। शिक्षकों ने मेरी काफी मदद की और उन्हीं की वजह से मैं मेडिकल लाइन की परीक्षाओं को पास कर सका।

प्रश्न— आपकी शिक्षा—दीक्षा कहां से हुई?
जवाब— मैं गांव का रहने वाला हूं। मेरा गांव कूमा मथुरा से करीब 19 किलोमीटर दूर है। समीप ही कस्बा राया है। जहां से मैंने 12वीं तक की परीक्षा पास की। आगरा के सेंट जॉन्स कॉलेज से मैंने बीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की। बीएससी के दौरान ही मेरा चयन एमबीबीएस लखनऊ के केजीएमसी से हुआ।

प्रश्न— आप अपने परिवार के बारे में बताइए?
जवाब— हमारे पिता आरटीओ कार्यालय में थे। हम तीन भाई हैं। बड़े भाई रिटायर्ड इंजीनियर हैं। दूसरे नंबर का मैं हूं और तीसरा छोटा भाई पीसीएस है और वर्तमान में राजस्थान हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार हैं।

प्रश्न— आपकी हॉबी क्या हैं?
जवाब— मेरी शुरू से ही हॉबी रही है कि अपने आप को अपडेट रखूं। इसके लिए मैं शुरू से ही समाचार पत्र पढ़ने का शौकीन रहा हूं। स्पोर्ट्स भी मुझे काफी पसंद था। खेलकूद प्रतियोगिताओं में मैं हमेशा भाग लेता था। मनोरंजन के लिए मूवी देखना भी पसंद करता हूं।

प्रश्न— परिवार के साथ बिताया कोई पल जो कोई यादगार हो
जवाब— हम एक बार घूमने के लिए गए थे। हमने 22 सीटर बस की थी। हम सभी भाई बहनों का परिवार गया था। हम अपना एक कुक साथ लेकर गए थे। सात से 10 दिन का टूर बनाकर गए थे। वह टूर हमारा यादगार रहेगा।

अमित शर्मा
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