कांच के उत्पादों को देखकर गदगद हुईं राज्यपाल, गोशाला में की गायों की सेवा

कांच के उत्पादों को देखकर गदगद हुईं राज्यपाल, गोशाला में की गायों की सेवा
Governer

Amit Sharma | Updated: 12 Oct 2019, 06:39:48 PM (IST) Firozabad, Firozabad, Uttar Pradesh, India

— फिरोजाबाद में दो दिवसीय भ्रमण पर आई थीं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल।
— ऊंधनी गांव में चौपाल लगाकर सुनीं जन समस्याएं, बच्चों को बांटे फल।

फिरोजाबाद। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल फिरोजाबाद में दो दिवसीय भ्रमण पर आईं थीं। इन दो दिनों के अंदर उन्होंने यहां बनने वाले कांच उत्पादों को न केवल देखा बल्कि उसकी बारीकियों को भी परखा। उन्होंने गांव में जाकर महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया। उनके रहन सहन और खान—पान को भी परखा।

प्रदेश की राज्यपाल पहली बार दो दिवसीय दौरे पर फिरोजाबाद आईं। पहले दिन उन्होंने कांच के उत्पादों को देखा। कारखाने में जाकर उत्पाद बनाने के बारे में जाना। कारखाने मालिकों से बनाए जाने वाले कांच के उममत्पादों की खपत और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं के बारे में भी जानकारी की। उसके बाद दूसरे दिन शनिवार को फिरोजाबाद की कान्हा गौशाला पहुंची। जहां उन्होंने गो सेवा की। तदोपरांत वह गांव ऊंधनी में पहुंची।

जहां उन्होंने जिला प्रशासन द्वारा कराए गए विकास कार्यो की जानकारी ली। पहली बार किसी का फूलों की बजाय फलों से स्वागत किया गया। महामहिम के स्वागत में फलों की टोकरी मंगाई गई। स्वागत में आए फलों को राज्यपाल ने बच्चों और महिलाओं में बांट दिया। उन्होंने जल संरक्षण पर जोर दिया। प्रदूषण मुक्त रहने के लिए खेतों में चारा न जलाए जाने की अपील की। महामहिम के स्वागत को हुजूम उमड़ पड़ा। वह प्राथमिक विद्यालय ऊंधनी पहुंची। उनके स्वागत के लिए फूलों की बजाय फलों की टोकरी मंगाई गई थीं।

बच्चों ने उन्हें पेंटिंग भेंट की। जिसे देखकर वह गदगद हो गईं। उन्होंने स्वागत के लिए मंगाए फलों को बच्चों में बांटा। उन्होंने विद्यालय का भी निरीक्षण किया। राज्यपाल आंगनवाड़ी केन्द्र पर पहुंची जहां महिलाएं भजन कीर्तन कर रहीं थीं। उनके भजन सुनकर राज्यपाल मंत्रमुग्ध हो गईं। उन्होंने महिलाओं को भी फल वितरित किए। उसके बाद चौपाल लगाकर समस्याएं सुनीं। राज्यपाल ने कहा कि अन्न और जल बर्बाद न करें। खेतों में चारा न जलाएं, उसे गायों के लिए रखें। चारागाह के अंदर ही चारा उगाने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि गुजरात में जल संचयन की शुरूआत 15 साल पहले ही हो गई थी। आप लोग अब शुरू कर रहे हैं, अच्छी बात है। गांव के भ्रमण के दौरान उन्हें एक शौचालय बंद हालत में मिला। जहां उन्होंने महिला को बुलाकर उसे खुलवाया और उसकी सफाई करने की बात कही। उन्होंने कहा कि शौचालय गंदा रहेगा तो खुले में जाना और गंदे शौचालय में जाना एक ही बात है। इसलिए सभी लोग शौचालय का प्रयोग करें। खुले में कतई न जाएं।

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