जैन दर्शन में शराब को इसलिए बताया गया है खराब, जानिए शराब पीने से क्या लगता है पाप

जैन दर्शन में शराब को इसलिए बताया गया है खराब, जानिए शराब पीने से क्या लगता है पाप

Amit Sharma | Publish: Sep, 16 2018 10:55:59 AM (IST) | Updated: Sep, 16 2018 10:56:00 AM (IST) Firozabad, Uttar Pradesh, India

— लोक नागरिक कल्याण समिति के सचिव सामाजिक कार्यकर्ता सत्येंद्र जैन सोली ने बताया शराब में होते हैं एक लाख 96 हजार सूक्ष्मजीत, शराब पीने से होती है जीव हिंसा।

फिरोजाबाद। क्या आप जानते हैं कि शराब को बुरा क्यों कहा गया है। शराब पीने के बाद व्यक्ति के अंदर दानवीय प्रवृत्ति कहां से आती है। आज हम आपको बता रहे हैं कि शराब पीने के बाद किस प्रकार व्यक्ति में बदलाव आ रहा है। लोक नागरिक कल्याण समिति के मदिरा मुक्ति अभियान के तहत एसआरके इंटर कॉलेज में गोष्ठी का आयोजन किया गया।

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व्यसन से दूर होती है सफलता
कार्यक्रम में कई छात्रों ने अपने विचार रखे और मदिरा मुक्ति की शपथ ली। इस अवसर पर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. डीपीएस राठौर ने कहा कि जो छात्र अनुशासित रहकर अपना अध्ययन करते हैं और व्यसन से दूर रहते हैं। वह निश्चित तौर पर जीवन में आगे बढ़ते हैं सफल होते हैं।

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शराब सेवन को बताया खराब
इस मौके पर लोक नागरिक कल्याण समिति के सचिव सामाजिक कार्यकर्ता सत्येंद्र जैन सोली ने कहा कि हर धर्म संप्रदाय मैं शराब के सेवन को गलत बताया है। जैन दर्शन के अनुसार शराब में लगभग एक लाख 96000 सूक्ष्म जीव होते हैं जो लोग शराब का सेवन करते हैं। उनके द्वारा इतनी भारी मात्रा मैं जीवों की हिंसा होती है। इस कारण से शराब पीने के बाद व्यक्ति की हिंसक और अमानवीय प्रवृत्ति हो जाती है। इस अवसर पर डॉ. यूआर पांडे ने कहा कि शराब शब्द में ही उस के अवगुण छुपे हुए हैं। इस मौके पर रामदास कुशवाह, अनुभव महेश्वरी ने शराब से होने वाले नुकसान के विषय में बताया इस मौके पर सैकड़ों की तादाद में छात्र उपस्थित रहे।

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