शारीरिक सौंदर्य और धन प्राप्ति से बढ़कर है प्रकृति का सौंदर्य, जिसे देखने के लिए धरती पर आते हैं भगवान

शारीरिक सौंदर्य और धन प्राप्ति से बढ़कर है प्रकृति का सौंदर्य, जिसे देखने के लिए धरती पर आते हैं भगवान
jeewan ki seekh

Amit Sharma | Updated: 16 Aug 2019, 09:26:57 AM (IST) Firozabad, Firozabad, Uttar Pradesh, India

— राजा ने ईश्वर से अप्सरा और धन लेने से कर दिया इंकार।
— उन्होंने मन की खुशी के लिए एक फूल को बढ़ा होते देखने की इच्छा प्रकट की।

फिरोजाबाद। बहुत ही पुराने समय की बात है । मिस्र देश का एक राजा था जिस पर देवता प्रसन्न हो गये और उसके पास आये और उसे उपहार स्वरुप एक चमत्कारी तलवार दी और उसे बोले कि जाओ और दुनिया फतह करो । इस पर राजा ने भगवान से सवाल किया कि ” भगवन आप भी कमाल करते है भला मुझे किस चीज़ की कमी है जो मैं पूरी दुनिया को फतह करूँ ।”

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देवता ने दी पारसमणि
इस पर देवता ने फिर से कुछ सोचकर “पारसमणि देते हुए राजा से कहा ये लो पारसमणि और जितना चाहे उतना धन की प्राप्ति करो ।” इस पर राजा ने फिर से सवाल किया ” भगवान मैं इतना धन प्राप्त करकर क्या करूँगा बताओ ।” राजा ने वो लेने से भी मना कर दिया ।

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अप्सरा लेने से भी किया इंकार
इस पर देवता ने उसे एक अप्सरा देते हुए कहा ” ये लो मैं तुम्हे तुम्हारे साथ रहने को ये खूबसूरत अप्सरा देता हूँ ।” इस पर राजा ने कहा भगवान मुझे ये भी नहीं चाहिए आपके पास इन सब से कुछ बेहतर हो तो बताओ ।

सोच में पड़ गए देवता
देवता अब सोचा में पड़ गया और कहने लगा सभी मनुष्य तो यही सब पाने के लिए संघर्ष करते है और मैं तुम्हे सहर्ष इतना सब दे रहा हूँ फिर भी तुम मना कर रहे हो तो तुम ही बताओ मैं तुम्हारे लिए किस चीज़ की व्यवस्था करूँ जो तुम्हे पसंद हो ।

तलवार की धार भी समाप्त हो जाएगी
राजा ने देवता से कहा ” भगवान जरा सोचिये मैं अगर तलवार को धारण करता हूँ तो भी उसकी धार भी एक न एक दिन चली जाएगी और नहीं तो मैं कोइंसा युगों युगों तक यंहा रहने वाला हूँ और अगर अप्सरा के लिए हाँ करता हूँ तो उसका सौंदर्य भी तो कोई अतुलनीय नहीं है । जबकि अगर पारसमणि को धारण करता हूँ तो धन भी कोई मुक्ति का मार्ग नहीं है तो मैं क्योंकर इन सब की इच्छा रखूं ?

प्रकृति के सौंदर्य से बढ़कर कुछ भी नहीं
इस पर राजा ने जारी रखते हुए कहा प्राकृतिक सौन्दर्य से तो देवता भी धरती पर विचरण के लिए आते है इसलिए आप मुझे यह फूलों का पौधा ही दे दीजिये मैं इसे बड़ा होते और इसमें फूलो को खिलते हुए देखूंगा इस से रमणीय मेरे लिए कुछ अधिक नहीं हो सकता।

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