सुहाग नगरी में कोरोना बना काल, सर्पदंश से 28 दिन में 13 मौत

कोरोना सुहागनगरी वासियों के लिए काल बन गया है। अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि विगत 28 दिन के अंदर 13 लोगों की सर्पदंश से मौत हो चुकी है। इसके पीछे अस्पताल में लोगों को समय से उपचार न मिलना बताया जा रहा है। यह आंकड़े तो क्षणिक भर मात्र हैं जबकि कुछ मामलों में अस्पताल पहुंचने से पहले ही सर्पदंश सेे पीड़ित लोगों की मौत हो जाती है।

By: arun rawat

Published: 19 Jul 2020, 12:55 PM IST

फिरोजाबाद। बारिश के मौसम में सांपों का बिल से बाहर निकलना लाजमी है लेकिन सबसे बड़ी परेशानी इस कोरोना संकट मेें मरीजों को समय से उपचार न मिलना है। यह कोरोना इस जिले के लोगों के लिए काल बन गया है। सरकारी अस्पतालों में सर्पदंश से हुई मौतों के आंकड़े बताते हैं कि 15 जून से 13 जुलाई तक इन सरकारी अस्पतालों में 20 मामले ऐसे आए जिनमें देरी से इलाज मिलने के कारण 13 लोगों की जान चली गई।

बायगीरों से रहें दूर
विगत एक माह से सांपों के बाहर आने का सिलसिला लगातार जारी है। 10 दिन पूर्व थाना पचोखरा क्षेत्र के गांव देवखेड़ा में सांप के डंसने से एक महिला की मौत हो गई थी। थाना नगला सिंघी क्षेत्र के गांव नगला शीतल में भी युवक की मौत हो गई थी। शिकोहाबाद और सिरसागंज क्षेत्र में भी सांंप के डंसन से लोगों की मौत हो चुकी हैं। सांप काटने के मामलों में लोगों को बायगीरों से बचना चाहिए। इनके स्थान पर चिकित्सकों से राय लेनी चाहिए।

अस्पतालों में नहीं मिल रहा उपचार
सांपों के डंसने से जान गंवाने के मामलों में अकसर अस्पताल में चिकित्सकों की लापरवाही देखने को मिल रही है। कोरोना के चलते अस्पतालों में डॉक्टर मरीजों को देखने से परहेज कर रहे हैं। मरीजों को समय से उपचार नहीं मिल पाता और उपचार के अभाव में उनकी मौत हो जाती है। कुछ मामलों में लोग बाायगीरोें के चक्कर में पड़कर मरीज को अस्पताल देरी से लेकर पहुंचते हैं तो कुछेक में अस्पताल पहुंचने से पहले ही व्यक्ति की मौत हो जाती है।

हर सांप नहीं होता जहरीला
फिरोजाबाद मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. आलोक शर्मा ने बताया कि देश में 60 प्रतिशत सांप नॉन पॉइजन होते हैं लेकिन सांप के काटने के बाद अधिकतर लोगों के घबरा जाने के कारण मौत हो जाती है। सांप में दो तरह का पॉइजन होता है। एक प्रकार का पोइजन हीमोटॉक्सिन करता है और रेड ब्लड सेल (आरबीसी) को तोड़ देता है। इससे मौत हो जाती है। दूसरे तरह का पोइजन न्यूरोटॉक्सिन होता है जो नर्वस सिस्टम पर अटैक करता है। सर्पदंश के मामलों में यदि व्यक्ति समय से अस्पताल पहुंच जाए तो एंटी स्नैक वैमन इंजेक्शन से पोइजन निष्प्रभावी हो जाता है। देरी से हॉस्पिटल पहुंचने पर खतरा बढ़ जाता है। प्रत्येक सरकारी हॉस्पिटल में स्नैक वैमन इंजेक्शन उपलब्ध हैं।

सांप के डंसने पर करें यह उपाय
डॉक्टर ने बताया कि सांप के डसने पर अकसर लोग बायगीरों के पास जाते हैं लेकिन ऐसा न करें मरीज को तत्काल समीप के अस्पताल में लेकर जाएं और एंटी स्नैक वैमन इंजेक्शन लगवाएं। पीड़ित व्यक्ति को गर्म चाय या कॉफी पिलाएं और उसका हौंसला बढ़ाते रहें। जिस स्थान पर सांप नेे डंसा है वहां पेाटेशियम परमैंगनेट या साबुन के पानी से लगातार धोते रहें। सांप के काटते ही व्यक्ति को सीधा लिटा दें। जहां पर सांप के डंसने के निशान हैं उसके ऊपर और नीचे के हिस्से को बांध दें जिससे खू का प्रवाह धीमा हो जाए।

यह बोली सीएमओ
सीएमओ डॉ. नीता कुलश्रेष्ठ ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में इलाज कराया जा रहा है, जहां चिकित्सक देखने से इंकार करें तो तत्काल इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से करें। शिकायत मिलने पर संबंधित डॉक्टर के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल में एंटी स्नैक वैमन इंजेक्शन उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि सांप के डंसने के तुरंत बाद ही मरीज को अस्पताल में लाया जाए तो उसके अंदर के पोइजन को निकाला जा सकता है देरी होने पर जान बचाना मुश्किल हो जाता है।

arun rawat
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned