अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र के मामले में कैबिनेट मंत्री की बढ़ी मुश्किलें, आया नया मोड़, देखें वीडियो

कैबिनेट मंत्री के प्रमाण को लेकर चल रहे मामले में नया मोड

फिरोजाबाद। प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। एससी प्रमाण पत्र को लेकर चल रही सुनवाई में कैबिनेट मंत्री के अधिवक्ता ने कोर्ट में अपना जवाब दाखिल तो करा दिया, लेकिन बावजूद इसके अभी उनकी परेशानी कम नहीं हुई है। शिकायकर्ता ने अब जन सुनवाई पोर्टल पर प्रमाण पत्र को लेकर शिकायत दर्ज कराई है।

ये की है शिकायत
टूंडला क्षेत्र के गांव इमलिया उम्मरगढ निवासी प्रेमपाल सिंह चक ने चार मार्च 2018 को जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत संख्या 40014718003759 दर्ज कराई थी। जिसमें उन्होंने लिखा है कि धनगर शाशनादेश निरस्त कराने व रास्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग द्वारा दिए गए निर्णय 25 सितंबर 2017 के अनुपालन के सम्बंध में भारत के संबिधान के अनुच्छेद 341 के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति द्वारा जारी किए गए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियां आदेश 1950 व संशोधन अधिनियम 1976 द्वारा उत्तर प्रदेश के अंतर्गत अधिसूचित की गई अनुसूचित जातियों की सूची के क्रमांक 27 पर हिंदी में धंगड और अंग्रेजी में वर्गीकृत है, लेकिन राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए दिनांक 16 जनवरी 2013 को धंगड के स्थान पर धनगर दर्ज करने का निर्णय कर दिया गया था, जिसके आधार पर आप द्वारा दिनांक 24 अक्टूबर 2013 को पूरे प्रदेश में गडरिया, पाल,बघेल ओबीसी कोटे के अंतर्गत आने वाले लोगों द्वारा धनगर जाति प्रमाणपत्र बनवाकर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों पर काबिज हो गए हैं।

15 सितंबर को हुई थी मीटिंग
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में शिकायत की गई थी। तब आयोग द्वारा दिनांक 15 सितंबर 2017 को मीटिंग हुई, जिसमें आयोग के पूर्व निर्णय को गलत मानते हुए नया निर्णय लिया गया है और उक्त निर्णय का अनुपालन कराने हेतु दिनांक 25 सितंबर 2017 को आयोग द्वारा मुख्य सचिव को भेजा जा चुका है लेकिन अभी तक 24 अक्टूबर 2013 का शाशनादेश निरस्त नहीं किया गया है और अभी तक आयोग के निर्णय का अनुपालन नहीं किया गया। अधिकार केवल संसद को है। उन्होंने लिखा है कि उच्च न्यायालय इलाहाबाद के न्यायमूर्ति अरुण टंडन द्वारा 2 जुलाई 2009 को जितेन्द्र बनाम स्टेट आफ यूपी एंड अदर्स में स्पष्ट किया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341 व 342 के तहत जाति या उप जाति को बदलने का अधिकार सिर्फ संसद को है अन्य किसी राज्य सरकार या आयोग को नहीं है। लेकिन जान बूझकर आयोग और प्रदेश सरकार के अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करके उक्त जाति के लोगों को अनैतिक लाभ पहुंचाने का कार्य किया है। जिससे अनुसूचित जाति के अधिकारों का हनन हुआ है लेकिन दोषियों के खिलाफ कोई भी कार्यवाही नहीं की गई है आखिर क्यों? अतः आपसे अनुरोध है कि धनगर जाति प्रमाणपत्रों को निरस्त कराने और धंगड जाति प्रमाणपत्र बनाने के आदेश जारी करने तथा दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने की कृपा करें। जिससे अनुसूचित जाति के अधिकारों की रक्षा हो सके।

नहीं हो सका निस्तारण
शिकायत का निस्तारण करने की नियत तिथि तीन अप्रैल निर्धारित की गई थी लेकिन समय सीमा समाप्त होने के बाद भी शिकायत का निस्तारण नहीं किया जा सका है। शिकायतकर्ता का कहना है कि अभी भी उनकी शिकायत अपर मुख्य सचिव समाज कल्याण के पास पेंडिंग पडी हुई है। उन्होंने बताया कि प्रमाण पत्र को लेकर 24 अप्रैल 2017 को रिट दायर की गई थी। कैबिनेट मंत्री के प्रमाण पत्र के मामले में अब 14 मई को सुनवाई होगी।

धीरेंद्र यादव
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