फिरोजाबाद की नर्सरी में नहीं रहे पौधे, यहां से की जा रही आपूर्ति

फिरोजाबाद की नर्सरी में नहीं रहे पौधे, यहां से की जा रही आपूर्ति

Amit Sharma | Publish: Jul, 17 2018 10:08:46 PM (IST) Firozabad, Uttar Pradesh, India

जिले भर में विभिन्न विभागों द्वारा रोपे जा रहे हैं विभिन्न प्रकार के पौधे।

फिरोजाबाद। बारिश शुरू होते ही पौधरोपण का कार्य प्रारंभ हो गया है। जगह-जगह विभिन्न विभागों और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न प्रजाति के पौधेे लगाए जा रहे हैं। वर्तमान स्थिति ये है कि फिरोजाबाद की नर्सरी में पौधों की कमी हो गई है। फलदार वृक्ष् मांगे नहीं मिल रहे हैं। नीम और पीपल के पेड़ ही नर्सरी में शेष बचे हैं। एक दिन पहले ही डीएम के नेेतृत्व में 1500 से अधिक पौधे रौपे गए थे। इसके अलावा विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा प्रतिदिन करीब 500 से दो हजार पौधे रौपे जा रहे हैं। ऐसे में पौधे लगाने के लिए लोगों द्वारा जलेसर नर्सरी से पौधे मंगाए जा रहे हैं।

बरसात के महीने में लगेंगे पौधे

बरसात के मौसम में पौधा आसानी से लग जाता है। ऐसे में वन विभाग द्वारा भी विभिन्न प्रजाति के पौधे इस मौसम में लगाए जाते हैं। नर्सरी पर वृक्षदार फलों के अलावा फलदार वृक्षों की भी मांग रहती है। हाल ही में करीब तीन से पांच हजार पौधे जिले के विभिन्न स्थानों पर रौपे गए। उनमें फलदार वृक्षों का अधिक प्रयोग किया गया। ऐसे में नर्सरी के अंदर फलदार वृक्षों की कमी हो गई। वन विभाग व अन्य विभागों द्वारा छायादार वृक्षों को ही लगाया जा रहा है। यहां की नर्सरी में नीम, पीपल, अशोक के अलावा विभिन्न प्रकार के छायादार वृक्ष ही शेष बचे हैं। फलदार वृक्षों के लिए लोगों को दूसरी नर्सरियों का सहारा लेना पड रहा है।

जलेसर से आ रहे पौधे

पौधरोपण के लिए अब ब्लाकों में भी पौधे लगाने का टारगेट दिया गया है। संबंधित ब्लाकों के सचिवों को अपनी-अपनी ग्राम पंचायतों में पौधे लगाने के लिए जसराना नर्सरी से पौधे मंगाने पड़ रहे हैं। जसराना नर्सरी में छायादार वृक्षों के अलावा फलदार वृक्ष भी आसानी से मिल पा रहे हैं। ऐसे में कहीं तो पौधरोपण का कार्य शुरू हो गया है। कहीं अभी और बारिश होने के इंतजार में लोग बैठे हुए हैं। गांवों के चक रोड और सड़कों के सहारे पौधे लगाने का लक्ष्य प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दिया गया है। वन विभाग ने भी इस वर्ष करीब 35 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। ऐसे में सभी प्रकार के पौधे मंगाए जा रहे हैं। सरकारी नर्सरियों में भी बाहर से पौधे मंगाए जा रहे हैं।

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