भागवत कथा के श्रवण के भगवान हृदय में आ जाते हैं- ऋचा गोस्वामी

श्री अमरेश्वर परमार्थ समिति, अमरकंटक के तत्वाधान में स्थानीय बल्लभ मार्केट में आयोजित होने वाली श्रीमद् भागवत कथा में तीसरे दिन विदुषी ऋचा गोस्वामी ने अपने प्रवचनों में बताया कि मनुष्य मरणधर्मा है, ऐसे में मनुष्य का क्या कर्तव्य है। यह विचार भागवत में किया गया है। जैसा अंतिम समय में स्मरण किया जाता है, वही गति मनुष्य को प्राप्त होती है। मनुष्य जीवन का यही परम लाभ है कि हम अपनी बुद्धि को ऐसा तैयार करें। ताकि अंतिम समय में सिर्फ भगवान का स्मरण हो, इस जगत का स्मरण न हो।

By: arun shrivastava

Updated: 03 Jan 2020, 05:30 PM IST

गाडरवारा। श्री अमरेश्वर परमार्थ समिति, अमरकंटक के तत्वाधान में स्थानीय बल्लभ मार्केट में आयोजित होने वाली श्रीमद् भागवत कथा में तीसरे दिन विदुषी ऋचा गोस्वामी ने अपने प्रवचनों में बताया कि मनुष्य मरणधर्मा है, ऐसे में मनुष्य का क्या कर्तव्य है। यह विचार भागवत में किया गया है। जैसा अंतिम समय में स्मरण किया जाता है, वही गति मनुष्य को प्राप्त होती है। मनुष्य जीवन का यही परम लाभ है कि हम अपनी बुद्धि को ऐसा तैयार करें। ताकि अंतिम समय में सिर्फ भगवान का स्मरण हो, इस जगत का स्मरण न हो। भागवत के उत्तम कोटि के वक्ता शुकदेव जी परीक्षित को निष्काम भाव से कथा श्रवण कराते हुए कहते हैं, ब्रम्ह स्वयं अनेक रूपों को धारण कर श्रृष्टि रूप में परिणीत होते हैं, हम सब ईश्वर का अंश हैं, बस इस बात को जान लेना ही तत्वज्ञान है। फिर ऋचाजी ने भगवत भक्त शिरोमणि ध्रुव के चरित्र का श्रवण कराया जो मात्र पंाच वर्ष की अवस्था में अति कठोर तप कर प्रभु को प्रसन्न करते हैं। जो भगवान के भक्त होते हैं, उन्हें संसार की कोई वस्तु अप्राप्त नहीं रहती।
आज नि:शुुल्क नेत्र शिविर का होगा आयोजन
आज चतुर्थ दिवस में श्रीकृष्ण जन्म महोत्सव कथा प्रसंग में मनाया जाएगा व दोपहर 1 बजे से विशााल नि:शुुल्क नेत्र शिविर का आयोजन भी रखा गया है। सभी श्रद्धालु अधिक संख्या में लाभ ले रहे हैं। आयोजकों ने नगर में ज्ञानगंगा से सबकों ओतप्रोत करने के लिए कठिन परिश्रम के साथ सहयोग किया जा रहा है।

arun shrivastava Reporting
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