घरेलू गैस सिलेंडरों का हो रहा धड़ल्ले से दुरुपयोग

दुकानों में उपयोग हो रहे घरेलू सिलेंडर, प्रशासन द्वारा जांच न करने से हो रहा दुरुपयोग

By: arun shrivastava

Published: 01 Mar 2020, 06:14 PM IST

गाडरवारा। नगर समेत पूरे अंचल में अधिकतर लोग लकड़ी चूल्हे के बजाय रसोई गैस का उपयोग करने लगे हैं। लाल रंग के घरेलू गैस सिलेंडर पर सरकार द्वारा उपभोक्ताओं को सब्सिडी भी दी जाती है। वहीं दूसरी ओर दुकानों, होटलों के लिए नीले रंग का कमर्शियल गैस सिलेंडर उपलब्ध है। लेकिन तुलनात्मक रूप से उक्त नीला सिलेंडर महंगा होने से अधिकतर होटलों, दुकानों में लाल रंग के सिलेंडर का ही दुरुपयोग किया जाता है। वहीं नीले सिलेंडर उपयोग नहीं किए जाने से गैस ऐजेंसियों से कम प्रदाय होते हैं। साथ ही इससे शासन को राजस्व की हानि भी झेलनी पड़ती है। होटलों, दुकानों पर इस्तेमाल किए जा रहे लाल सिलेंडर को दुकानदार छिपा कर एवं ढंक कर रखते हैं। लेकिन ऐसा भी देखा जाता है कि इनका खुलेआम बेधड़क इस्तेमाल किया जा रहा है।
दामों में दोगुना अंतर
लाल रंग के गैस सिलेंडर का प्रयोग करने के पीछे का कारण इनके दामों में भारी अंतर है। स्थ्ज्ञानीय गैस ऐजेंसी से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में जहां लाल रंग के 14.2 किग्रा के गैस सिलेंडर का मूल्य 886 रुपए है। वहीं 19 किलो का नीले रंग का व्यवसायिक सिलेंडर 1506 रुपए में मिलता है। इस तरह करीब सात, आठ सौ रुपए बचाने के लिए दुकानदार, वाहनों एवं शादी समारोह में लाल रंग के सिलेंडर प्रयोग किए जाते हैं।
नीले सिलेंडर के महज 200 उपभोक्ता, लाल के करीब 15 हजार
स्थानीय शुभ इंडेन गैस ऐजेंसी से प्राप्त जानकारी के अनुसार नीले रंग के व्यावसायिक सिलेंडर के उपभोक्ता जहां लगभग 200 से अधिक हैं, वहीं घरेलू गैस उपभोक्ताओं की संख्या 15 से 16 हजार के आसपास है। मासिक खपत की बात करें तो प्रतिमाह लाल रंग के लगभग 8500 गैस सिलेंडर डिलीवर किए जाते हैं। वहीं नीले रंग के सिलेंडरों का आंकड़ा प्रतिमाह 250 सिलेंडर के आसपास है।
पांच किलो का नीला सिलेंडर भी उपलब्ध
हालांकि गैस कंपनी ने रसोई गैस के दुरुपयोग को रोकने के लिए नीले रंग का पांच किलो का सिलेंडर भी बाजार में उतारा है, जिसकी रिफिल वर्तमान में मात्र 448 रुपए बताई गई है। नीले रंग के सिलेंडर उपभोक्ता इसके बाद भी नहीं लेते।
वाहनों में भी खप रही रसोई गैस
रसोई गैस सिलेंडरों का अन्य दुरुपयोग गैस चलित वाहनों में भी किया जाता है। ऐसे अनेक गैस चलित वाहन वाले लाल सिलेंडर से गैस वाहनों में ट्रांसफर कर नियम कानूनों का खुला उल्लंघन करते हैं। इससे जानलेवा हादसे होने की आशंका भी रहती है। लेकिन लोगों तथा खुद की जान को खतरे में डाल कर ऐसा किया जाता है।
प्रशासन उदासीन
लोगों का कहना है प्रशासन की उदासीनता का ही नतीजा है कि वाहनों एवं दुकानों में रसोई गैस का दुरुपयोग नहीं रुक पा रहा है। लंबे अरसे से प्रशासन के अमले द्वारा रसोई गैस के दुरुपयोग को लेकर न कोई कार्रवाई की गई, न ही जांच अभियान चलाया गया। प्रशासनिक उदासीनता से ऐसे लोग बेखौफ होकर रसोई गैस का दुरुपयोग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में गर्मी की सीजन शुरु हो जाएगा। तब गैस के दुरुपयोग से गंभीर दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाएगी। इसे देखते हुए लोगों ने प्रशासन, संबंधित विभाग के अधिकारियों से समय रहते अभियान चलाकर गैस का दुरुपयोग रोकने की अपेक्षा जताई है।
इनका कहना,,
होटलो द्वारा घरेलू सिलेंडर उपयोग करने पर सरकार को राजस्व की हानि भी होती है। हालांकि खाद विभाग द्वारा समय समय पर शादी गार्डन और होटल संचालकों को निर्देश दिए जाते हैं कि कामशर््िायल सिलेंडर ही उपयोग करें।
चंद्रकांत शर्मा, डायरेक्टर शुभ इंडेन गैस एजेंसी
पहले जब शुद्ध के लिए युद्ध अभियान चला था, तब सिलेंडरों के दुरुपयोग पर कार्रवाई हुए थी। हम फिर से छापामार कार्रवाई करेंगे।
राम दीक्षित, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी
फैक्ट फाइल (शुभ इंडेन गैस ऐजेंसी गाडरवारा)
-घरेलू गैस उपभोक्ताओं की संख्या -15 से 160000
-व्यवसायिक गैस उपभोक्ताओं की संख्या - 200 से 250
-घरेलू गैस सिलेंडर की प्रतिमाह खपत - 8500 लगभग
-व्यवसायिक गैस सिलेंंडर की प्रतिमाह खपत - 250 लगभग
-लाल रंग के सिलेंडर का वर्तमान मूल्य- 886 रुपए
- नीले रंग के सिलेंडर का वर्तमान मूल्य-1506 रुपए
बता दें यह केवल एक गैस ऐजेंसी के आंकड़े हैं, इनमें समीपी कस्बाई, ग्रामीण क्षेत्र एवं जिले भर की गैस ऐजेंसियों के आंकड़े शामिल करने पर दोनों सिलेंडरों की खपत में अंतर एवं होने वाला नुकसान कई गुना बढ़ सकता है।

arun shrivastava Reporting
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