सुविधाओं की नहीं कदर : जिम्मेदार बेखबर

कहीं कबाड़ में पड़े कचरापात्र तो कहीं नाली में पड़ा बैरीकेड

गाडरवारा। शासन प्रशासन द्वारा लोगों को सुविधाएं देने अनेक प्रकार की व्यवस्थाएं कराई जाती हैं। लेकिन सार्वजनिक सुविधाओं की वस्तुओं का दुरुपयोग साथ ही कई बार जिम्मेदारों को इस ओर से अंजान रहना, लोगों को जनसुविधाओं से मेहरूम करता है। बानगी के लिए अनेक शासकीय विभागों के वाहन पड़े पड़े कबाड़ होते रहते हैं। ऐसे में उन विभागों को किराए के वाहन लेने पड़ते हैं। अक्सर अस्पतालों में एंबूलेंस बंद पड़े खड़े रहना, इसके बावजूद उनमें सुधार न होना भी लगभग आम हो चुका है। ऐसे ही अनेक प्रकार के आयोजनों में सुविधा एवं सुरक्षा हेतु पुलिस विभाग के लोहे के बैरीकेड नगर में उपलब्ध कराए गए हैं। इन्हे भी अक्सर काम निकलने के बाद निर्धारित जगह पर नहीं रखा जाता। उक्त सुविधा पड़े पड़े दुर्दशा का शिकार होती रहती है। बीते दिवस स्थानीय जवाहर कृषि उपज मंडी में सब्जी मंडी के पास पुलिस विभाग का एक बैरीकेड नाली में पड़ा देखा गया, वहीं दूसरा नाली किनारे पड़ा दिखा। लोगों ने बताया उक्त बैरीकेड कई दिनों से यहीं पड़े हुए हैं। इस प्रकार शासकीय संपत्ति की दुर्दशा नगर एवं क्षेत्र के अन्य स्थानों पर भी देखी जा सकती है।
कबाड़ हो रहे वाहन
जहां अनेक विभागीय वाहन पड़े पड़े कबाड़ होते रहते हैं। वहीं पुलिस थाने में जब्त वाहनों की भी यही कहानी है। धीरे धीरे इनमें से अनेक वाहनों के पार्ट भी गायब होते रहते हैं। स्थानीय मंडी में भी बरसों से मंडी की जीप पड़े पड़े बदहाली झेल रही है। मंडी गेट नंबर दो के पास शेड के नीचे खड़ी जीप को न तो सुधरवाया जा रहा है, न ही इसे नीलाम किया जा रहा है। हालांकि मंडी के पास एक अन्य वाहन भी है। लेकिन इस प्रकार जीप खराब पड़े रहना समझ के परे है।
कचरे रखने के डब्बे खुद कचराघर में पड़े
साईखेडा। जहां एकओर पूरे देश में स्वच्छता का अभियान चल रहा है। वही नगर परिषद साईंखेड़ा में जहां, तहां कचरे के ढेर लगे हुए हैं। स्थानीय प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा और तो और कचरे रखने के नीले और हरे डब्बे स्वयं कचरे में पड़े हुए हैं। कभी कांजी हाउस रहने वाली जगह आज कचरे का अड्डा बन चुका है। नगर साईंखेड़ा में सभी वार्डों में जहां.तहां बहुत अधिक मात्रा में कचरा पड़ा रहता है। वही नरहरियानंद तालाब के किनारे भी कचरा ही कचरा पड़ा रहता है। नगर के बीचों बीच मटन मार्केट होने के कारण शेष बचे मांस एवं कचरे को तालाब में ही फेंकते हैं। जिससे वहां निकलने वाले लोगों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है। लोगों का कहना है, स्वच्छता में कोताही बरतने के साथ कचरा पात्रों का यूं कचराघर में पड़ा रहना परिषद की स्वच्छता के प्रति उदासीनता को दर्शाता है।

arun shrivastava
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