निजी दुकानों पर यूरिया के लिए लंबी कतारें, वितरण केंद्र पर लटका ताला

इस वर्ष किसानों का समस्याएं पीछा नहीं छोड़ रही हैं। जैसे तैसे अतिवृष्टि की मार झेलते हुए किसानों ने धान की फसल तो पैदा कर ली। लेकिन अब बेचने में उन्हें पसीना आ रहा है। व्यापारियों द्वारा औने पौने दामों पर किसानों की धान खरीदी जा रही है, जिससे किसानों की लागत निकलना मुश्किल हो रहा है।

सालीचौका। इस वर्ष किसानों का समस्याएं पीछा नहीं छोड़ रही हैं। जैसे तैसे अतिवृष्टि की मार झेलते हुए किसानों ने धान की फसल तो पैदा कर ली। लेकिन अब बेचने में उन्हें पसीना आ रहा है। व्यापारियों द्वारा औने पौने दामों पर किसानों की धान खरीदी जा रही है, जिससे किसानों की लागत निकलना मुश्किल हो रहा है। इन समस्याओं से जैसे तैसे किसान बाहर निकल रहा है। आगामी बोवनी हेतु किसान को इस सीजन में यूरिया की अधिक आवश्यकता होती है। जिसमें अभी किसानों को व्यापारियों द्वारा लूटा जा रहा है। वर्तमान समय में यूरिया के बिक्री रेट 268 रुपए प्रति बोरी है। लेकिन व्यापारियों द्वारा किसान को 300 से 350 रुपए तक में यूरिया बेचा जा रहा है। वहीं जो किसान व्यापारियों से कहता है कि यूरिया के रेट तो 268 रुपए हैं तो उसे यह कहकर भगा दिया जाता है, यूरिया नहीं है जाओ जहां मिल रहा है, वहां से ले लो और जहां पर कहना है वहां कह दो,। मामले में संबंधित अधिकारियों द्वारा कार्रवाई न किया जाना भी विचारणीय है।
उल्लेखनीय है मध्यप्रदेश और केन्द्र सरकार द्वारा किसानों के लिए अनेक जनहितैषी योजनाएं लाई जा रही हैं। लेकिन मप्र का किसान हमेशा परेशान रहता है। उसे कभी प्राकृतिक आपदाओं से, कभी अपनी बेची फ़सल के भुगतान के लिए भटकना पड़ता है। अभी जब किसान अपनी फसल की बोवनी की तैयारी कर रहा है, तो उसके सामने खाद्य यूरिया का संकट बना है। ऐसा मामला गाडरवारा एवं सांईखेड़ा क्षेत्रों में प्रकाश में आया है, जहां यूरिया कमी के कारण क्षेत्र के किसानों को सुबह से ही एक निजी दुकानों पर यूरिया लेने के लिए लाईन लगाकर खड़ा होना पड़ा। किसान को आधार कार्ड पर दो बोरी यूरिया 270 के दाम से प्राप्त हो रहा है। यूरिया संकट के संबंध में समिति प्रबंधक से चर्चा हुई तो उन्होंने बताया कि समिति के कर्मचारियों की बेमियादी हड़ताल के कारण समिति से वितरण नहीं किया जा रहा। जबकि यूरिया की 3000 मीट्रिक टन की रैक लग चुकी है। यूरिया प्राप्त होने पर शासन प्रशासन द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने बताया कि समिति द्वारा 267 रुपए प्रति बोरी के हिसाब से किसान को उसके रकबे के अनुसार दिया जाएगा। वर्तमान में यूरिया संकट के कारण किसान की गेहूं, चने की बोवनी पिछड रही है। समय पर यूरिया न मिलने के कारण प्रदेश सरकार और सरकारी कर्मचारियों के प्रति अक्रोश है। किसान संघ के उपाध्यक्ष नितिन तिवारी ने बताया कि शासन प्रशासन द्वारा शीघ्र ही यूरिया की उपलब्धता शीघ्र नहीं कराई गई तो हमें आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
वहीं खाद्य वितरण केन्द्र के कर्मचारियों की बेमियादी हड़ताल के कारण केन्द्र पर ताला लटका है। जिससे उपभोक्ता भी खासे परेशान हैं। जनापेक्षा है शासन प्रशासन सांईखेड़ा क्षेत्र में आये यूरिया संकट और खाद्यान्न वितरण की समस्यायों को शीघ्र हल करे, जिससे किसान और उपभोक्ताओं को परेशानी न हो सके।

arun shrivastava
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