चोरी की बल्लियों से हो रहा शासकीय भवन का निर्माण, वनविभाग ने खानापूर्ति कार्रवाई करते हुए लगाया 1 लाख 27 हजार का जुर्माना

* शासकीय नियमों का शासकीय कार्य के लिए ही हो रहा खुलेआम उल्लंघन, वनविभाग ने की खाना पूर्ति कार्यवाही।

* इस बड़ी घटना ने नवनियुक्त डीएफओ की लचर कार्यप्रणाली की खोली पोल ।

By: Deepak Sahu

Published: 11 May 2019, 08:38 PM IST

गरियाबंद। एक तरफ़ जहा हरिहर छत्तीसगढ़ एवं वृक्षारोपण अभियान चलाकर वनों के विकास के नाम पर सरकार करोड़ो रूपये खर्च कर रही है तो वही शासकीय भवनों के निर्माण हेतु ठेकेदार वनों का विनाश कर रहे है। वन विभाग एक बार फिर भाई भतीजावाद के कारनामे के लिये चर्चा में है, हाल ही में गरियाबंद जिला मुख्यालय से एक ऐसा मामला सामने आया है जहा 50 बिस्तरीय शासकीय पोस्ट मेट्रिक आदिवासी भवन के निर्माण के लिए ठेकेदार के द्वारा जंगल से काट कर अवैध रूप से लाई गई लगभग 700 बल्लियों का उपयोग किया जा रहा था।

under construction

ये हैं पूरा मामला

एक ओर जंगल से साइकल में लकड़ी लाने वाले गरीब लोगों पर कार्रवाई के नाम पर साइकल जप्ती तक किया जा रहा है मगर रसूखदारों पर कार्रवाई करने में वन विभाग के हाथ काँपते नज़र आ रहे हैं। दरअसल दर्रापारा में मेसर्स जी एन एंड कंपनी रायपुर के द्वारा शासकीय भवन का निर्माण किया जा रहा है जहा भवन के निर्माण कार्य के लिए ठेकेदार के द्वारा जंगल से काट कर अवैध रूप से लाई गई लगभग 700 बल्लियों का इतेमाल किया जा रहा था। जिसमे कई प्रजातियों की इमरती लकड़ियां भी शामिल है।इसकी जानकारी लगने पर वन विभाग के अधिकारियों ने निर्माण स्थल पहुंच कर जाँच की गई जिसमे लगभग 700 नग बल्लियों के बारे में पूछ्ताछ की गयी जिसका जवाब वँहा मौजूद कर्मचारी नहीं दे पाए न ही कोई बिल दे सके और न ही कोई संतोषप्रद जवाब अधिकारियो को मिला जिसके बाद वन विभाग कार्यवाही की तैयारी कर रहा था।

सूत्रों की माने तो तब तक ठेकेदार को उक्त घटना की जानकारी हो चुकी थी इसलिये राजधानी से बड़े बड़े नेताओं के फ़ोन आने चालू हो गए । जिसके बाद वन विभाग के कुछ आला अधिकारियों ने भी मामले में दखल अंदाजी की जिसके बाद वन विभाग की टीम ने खाना पूर्ति कार्रवाही करते हुए 1 लाख 27 हजार का पीओआर किया जिसका क्रमांक 12838/09 है।

विभागीय अधिकारियो का कहना है कि इस राशि मे बल्लियों की शासकीय दर के हिसाब से कीमत वसूली की गई है और साथ अवैध रूप से लाने का जुर्माना भी लगाया गया हैं । हालाँकि एक बिल्ली की सरकारी दर 100 से 200 रुपये तक होती है और सागौन की कीमत अन्य बल्लियों की अपेक्षा ज्यादा होती है। बावजूद इसमें नाम मात्र का जुर्माना कर ठेकेदार को राहत देते हुए निर्माण कार्य मे अवरोध उतपन्न न हो इसलिये बल्लियों को निर्माण स्थल पर ही छोड़ दिया। जिसमें से कुछ बल्लियां सेनेटरिंग में लगी थी और बाकी की बाहर पड़ी हुई थी।

आपको बता दे जिस जगह उक्त निर्माण का कार्य हो रहा है उस स्थान से लगभग 200 मीटर में सुदूर वन क्षेत्र है। असंका जताई जा रही है इसी क्षेत्र से संभवत ठेकेदार द्वारा अवैध रूप से बल्लिया कटवा कर निर्माण कार्य में उपयोग किया जा रहा हैं। परंतु फारेस्ट अधिकारी इसे झारियाबाहरा से लाना बता रहे है। बरहाल जिस क्षेत्र की भी बल्लियां हो उस क्षेत्र के वनपाल की भारी लापरवाही उजागर हो रही है जिस पर वन विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नही की गई है ।

एक तरफ़ तो हरिहर छत्तीसगढ़ एवं वृक्षारोपण अभियान चलाकर वनों के विकास के नाम करोड़ो रूपये खर्च कर रही है तो वही शासकीय भवनों के निर्माण हेतु ठेकेदार कर रहे है वनों का विनाश। उल्लेखनीय है कि इतनी बड़ी संख्या में वृक्षों को फोर व्हीलर पर परिवहन करने वाले वाहन पर भी वन अधिनियम की कार्यवाही नही की गई। यही की पूर्वं में वन विभाग द्वारा रेती एवं गिट्टी का परिवहन करने वाले ट्रेक्टरों को जब्ती कर हजारों रुपये का जुर्माना किया जाता है परंतु इतने विशाल मात्रा में वृक्षों की कटाई होने पर न ही कटाई स्थल का निरीक्षण किया गया और नही ठुठो पर हेमबर जारी हुआ है इस पूरी घटना से नवनियुक्त डीएफओ के लचर वनमंडल व्यवस्था की पोल उजागर हो रही है।

गरियाबंद रेंजर आर एन पांडेय का कहना है - दर्रापारा में अवैध बल्लियों से निर्माण की शिकायत प्राप्त हुई थी जिस पर कार्रवाई करते हुए 1 लाख 27 हजार रुपये जुर्माने की राशि वसूल की गई हैं जुर्माना शासकीय दर के हिसाब से लगाया गया है बल्लियां झरियाबाहारा से लाई गई है वँहा के छात्रा वास में इसी बल्ली से निर्माण कार्य हुआ था ऐसा ठेकेदार के माध्यम से बताया जा रहा है ।

Deepak Sahu
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned