जिंदा व्यक्तियों को पंचायत सचिव ने बताया मृत, कलक्टर ने किया निलंबित

जिंदा व्यक्तियों को पंचायत सचिव ने बताया मृत, कलक्टर ने किया निलंबित

Anjalee Singh | Publish: May, 06 2019 06:40:30 PM (IST) | Updated: May, 06 2019 06:40:32 PM (IST) Gariaband, Raipur, Chhattisgarh, India

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के किडनी प्रभावित गांव सुपेबेड़ा (Supebeda) में एक नया मामला सामने आया है। यहां दो जिंदा लोगों को ग्राम सभा की बैठक के दौरान मृत होना बता दिया गया। इतना ही नहीं उन्हें पंचायत की बैठक में मृत घोषित कर आवास के लिए अपात्र भी कर दिया।

देवभोग. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के किडनी प्रभावित गांव सुपेबेड़ा (Supebeda) में एक नया मामला सामने आया है। यहां दो जिंदा लोगों को ग्राम सभा की बैठक के दौरान मृत होना बता दिया गया। इतना ही नहीं उन्हें पंचायत की बैठक में मृत घोषित कर आवास के लिए अपात्र भी कर दिया।

वहीं मामले की जानकारी जैसे ही गांव के गुनधर को लगी, तो उसने पंचायत में जाकर इसका विरोध किया। पंचायत सचिव ने कई तरह से तर्क देकर बात को टालने का प्रयास किया। अंतत: पीडि़त ने मामले की शिकायत कलक्टर के पास करते हुए न्याय का गुहार लगाई। इसके बाद जिला पंचायत सीईओ ने जांच करवाते हुए दोषी पाए जाने पर पंचायत सचिव को निलंबित कर दिया। इसी तरह गांव के एक अन्य व्यक्ति को भी मृत बताकर उसका नाम भी आवास में अपात्र करवा दिया गया है।

दस्तावेजों में जिंदा करवा दो साहब
मामले में हालांकि दोषी पंचायत सचिव पर तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे निलंबित कर दिया गया है, लेकिन गांव के दो व्यक्ति गुनधर और अंकुर अभी भी दस्तावेजों में अपने आप को जिंदा साबित करने की जददोजहद में लगे हुए है। पीडि़त गुनधर और अंकुर बताते हैं कि वे अभी भी जिंदा है, वहीं उनके जिंदा होने की जानकारी पंचायत सचिव छबिलाल नायक को भी थी, लेकिन उसने किस आधार पर दोनों को मृत होना बता दिया और आवास की सूची में अपात्र घोषित करवा दिया यह वहीं जान सकता है। मामले में दोनों पीडि़तों का कहना है कि वे आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री जनदर्शन जाकर गुहार लगाते हुए उन्हें पुन: दस्तावेजों में जीवित करवाने की मांग करेंगे, ताकि फिर से उन्हें दस्तावेज में जीवित करते हुए सरकारी योजनाओं का लाभ शासन से मिल पाएगा।

ग्रामसभा की बैठक में कर दिया गया है मृत घोषित
मामले में पीडि़तों से मिली जानकारी के अनुसार ग्राम सभा की बैठक में पंचायत सचिव छबिलाल नायक के साथ ही बैठक में मौजूद अन्य जिम्मेदार लोगों के द्वारा गुनधर और अंकुर की मौत होने की जानकारी सरकारी दस्तावेजों में दे दिया गया है। इतना ही नहीं दोनों की मौत होने की बात कहते हुए उन्हें आवास के लिए अपात्र भी बता दिया गया है। यहां बताना लाजमी होगा कि ग्रामसभा की बैठक में दोनों को मृत घोषित किए जाने के बाद इन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ भी अब शायद ही मिल पाएगा।

डबल नाम होने के कारण समझ नहीं पाया और मृतकों की सूची में इन नामों को शामिल कर दिया।
छबिलाल नायक, तत्कालीन पंचायत सचिव, सुपेबेड़ा

मामले में उच्च कार्यालय से मिले आवेदन के आधार पर पंचायत सचिव के ऊपर लगे आरोपों की जांच की गई। जांच के दौरान आरोप की पुष्टि भी हुई। वहीं संबंधित पंचायत सचिव को जिला पंचायत सीईओ ने निलंबित भी कर दिया है। वहीं आगे की कार्रवाई जारी है।
मोहनीश आनंद देवांगन, सीईओ, जनपद पंचायत देवभोग

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