बीवी थी लापता तो 15 दिन के बच्चे को थैले में रखकर ढूंढता रहा पिता, जब इस हाल में मिली मां...

बीवी थी लापता तो 15 दिन के बच्चे को थैले में रखकर ढूंढता रहा पिता, जब इस हाल में मिली मां...

Bhawna Chaudhary | Publish: Aug, 06 2019 02:34:26 PM (IST) Gariaband, Raipur, Chhattisgarh, India

गांव वालों ने लापता महिला की खोजबीन में नहीं की मदद तो 15 दिन के बच्चे को थैले में रखकर थाना पहुंचा

गरियाबंद. छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में एक दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है। गांव के एक युवक की पत्नी लापता हो गई। उसकी खोजबीन के लिए एक भी गांव वाले ने उसकी मदद नहीं की। निराश - हताश युवक अपने 15 दिन के बच्चे को थैले में रखकर मोटरसाइकिल से रात को 12 बजे बीस किलोमीटर दूर गरियाबंद थाना पहुंचकर अपनी आपबीती सुनाई।पुलिस की खोजबीन के बाद बाद जब महिला इस हाल में (Woman dead body found) मिली तो...

मिली जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत भैंसातरा में एक कमार परिवार के व्यक्ति को 15 दिन के बच्चे को थैले में रखकर 20 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ा। सुखराम के साथ हुई इस घटना ने समाज के दो अलग-अलग पहलू को उजागर कर दिया। एक ओर जहां ग्रामीणों ने अपने ही गांव में रहने वाले युवक की मुसीबत के समय सहायता करने के बजाय उससे मुंह फेर लिया। वहीं दूसरी ओर जिला पुलिस की टीम ने उसकी परेशानी को देखते हुए रातभर जाग कर अपने कर्तव्य का पालन कर उस युवक की मदद की। दिल और दिमाग को झकझोर कर रख देने वाली यह दिल दहलाने घटना जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम भैंसातरा की है।

यहां रहने वाले सुखराम कमार की पत्नी शाम होने के बाद भी घर नहीं पहुंची। उसकी खोज खबर में निकले सुखराम को उसके कपड़ा जंगल के नाले के किनारे मिले। नाले में डूबने की आशंका के चलते उसने जब गांव वालों से मदद की गुहार की तो कोई भी आगे नहीं आया। रातभर इधर-उधर मदद मांगने बाद जब कुछ समझ नहीं आया तो रात को 12 बजे अपने 15 दिन के बच्चे को थैले में रखकर मोटरसाइकिल से 20 किलोमीटर का सफर तयकर गरियाबंद थाने पहुंचा। जहां उसने अपनी आपबीती एसआई प्रशांत मिश्रा को सुनाई। उन्होंने बताया कि इस समय उसका 15 दिन का बच्चा उसके गले के पीछे लटक रहे थैले में है, जिसे सुनकर वे भी द्रवित हो उठे।

एसआई प्रशांति मिश्रा उसी समय प्रधान आरक्षक रब्बान खान व आरक्षक लेखन पटेल, कुलिप ठाकुर और ललित नेताम को साथ लेकर भैंसातरा पहुंचे और रात के अंधेरे में ही जीव-जंतु और अपनी जान की परवाह किए बगैर पुलिस टीम ने नाले में शव की तलाशी शुरू कर दी। रात लगभग 3 बजे के बाद महिला का शव पुलिस टीम को मिला। जिसे लेकर रात में ही पुलिस की टीम सुखराम और उनके बच्चे सहित जिला अस्पताल पहुंची। जहां महिला के शव मरचुरी में रखवाया गया। साथ ही सुखराम के 15 दिन के बच्चे को एसआई प्रशांत मिश्रा ने अस्पताल में
भर्ती करवाया।

सुखराम की आर्थिक स्थित बहुत ही खराब है। जिसके बाद नगर के दो समाजसेवी रिखी यादव व सन्नी मेंमन ने जनपद पंचायत के सीईओ को फोन कर बच्चे व उसके पिता को राहत पहुंचाने का निवेदन किया। उसके बाद सीईओ ने तत्काल 2 हजार रुपए राहत राशि के रूप में उसे प्रदान किए। इस सारे मामले की जानकारी जब कलक्टर श्याम धावड़े को लगी तो उन्होंने अधिकारियों की टीम घटनास्थल पर भेजकर विस्तार से जानकारी लेने कहा। जिसके बाद अनुभागीय अधिकारी गरियाबंद तहसीलदार व महिला व बाल विकास विभाग अधिकारी, नायाब तहसीलदार की टीम ने मौके पर पहुंचकर के परिवार से बात की।

सुखराम ने अधिकारियों को बताया कि उसके 4 बच्चे है, जो उसी पर आश्रित है। उसकी पत्नी की मौत के बाद उसके 15 दिन के बच्चे की देखभाल करना अब उसके बस की बात नहीं है। इस बच्चे का ख्याल रखने के चलते वह अपने बाकी 3 बच्चों के लिए रोजी-रोटी की व्यवस्था नहीं कर पाएगा। फिलहाल नवजात शिशु को महिला व बाल विकास विभाग के संरक्षण में रखकर उसकी देखभाल की जाएगी। उसके बाद टीम की रिपोर्ट के अनुसार उसके परिवार को शासन द्वारा स्वीकृत शासकीय सहायता
दी जाएगी।

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