लौंगी भुईयां ने लिखी संघर्ष की नई इबारत, पहाड़ खोदकर बना दी 5KM लंबी नहर, लगे 30 साल, पढ़ें प्रेरक कहानी...

एक और किसान ने असंभव दिखने वाले काम को संभव कर दिखाया (Loungi Bhuiyan Broke The Mountain To Make 5Km Long Canal In Gaya Bihar) (Bihar News) (Gaya News) (Inspiring Story) (Mountain Man Dashrath Manjhi)...

By: Prateek

Published: 10 Sep 2020, 06:45 PM IST

(गया): बिहार में जुझारू लोगों की कमी नहीं है। पत्नी को खोने के बाद जनकल्याण के लिए सालों की मेहनत के बाद पहाड़ को चकनाचूर कर रास्ता निकालने वाले 'माउंटन मैन—दशरथ मांझी' भी यहीं से थे। उन्हीं के गृह जिले गया से एक और किसान ने असंभव दिखने वाले काम को संभव कर दिखाया। रोजगार के लिए गांव से लोगों के पलायन को रोकने के लिए पहाड़ काटकर उन्होंने 5 किमी लंबी नहर खोद डाली। इससे केवल उन्हें ही नहीं बल्कि आसपास के अन्य गांवों तक भी पानी पहुंचा है। अब लोग फिर से खेती की तरफ बढ़ने लगे हैं, उनकी पानी की सबसे बड़ी समस्या जो हल हो गई है।

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यह कहानी है गया से 90 किलोमीटर दूर बांकेबाजार प्रखण्ड के लुटुआ पंचायत के कोठीलवा गांव निवासी 70 वर्षीय लौंगी भुईयां की। भुईयां को यह काम करने में 30 सालों का समय लग गया। आखिर क्यों भुईयां ने यह काम करने की ठानी इसके पिछे भी एक लंबी मगर प्रेरणा भरी कहानी है। भुईयां गांव में अपनी पत्नी, बेटे और पत्नी के साथ रहते हैं।

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पानी की कमी होने की वजह से वहा केवल मक्का और चना की खेती करने के मजबूर थे। इनमें इतना लाभ नहीं था। प्रदेश के ज्यादातर युवाओं की तरह उनका बेटा भी रोजगार की तलाश में दूसरे प्रदेश में चला गया। देखते देखते गांव के अधिकतर लोग काम के लिए पलायन कर गए। यह बात भुईयां को मन ही मन कचौट रही थी। उन्होंने लोगों को गांव में ही रोकने की युक्ति सोची। एक दिन बकरी चराते हुए उन्हें विचार आया कि लोगों को यदि यहीं पानी मिल जाए तो वह खेती में मन लगाएंगे और बाहर नहीं जाएंगे।

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उनके घर के पास में ही बंगेठा पहाड़ है जहां बारिश का पानी पर्वत पर ही रुक जाता था। भुईयां ने इस पानी को अपने खेतों तक लाने की सोची ओर काम में लग गए। उन्होंने एक नक्शा तैयार किया और पहाड़ से नहर खोदना शुरू कर दिया। बेटे और परिवार के अन्य लोगों ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि क्यों अपना समय बर्बाद कर रहे हो। लोग उन्हें पागल तक कहने लगे पर उन पर तो जुनून सवार था। वह जब भी समय मिलता तो खुदाई करने लगते। 30 साल की अथक मेहनत के बाद उन्होंने पहाड़ पर रुकने वाले पानी को नहर के जरिए खेतों तक पहुंचाने का रास्ता बना डाला। अब पानी खेतों में आ रहा है, साथ ही इस पानी को गांव के तालाब में इकट्ठा किया जा रहा है। उनके गांव के साथ ही पड़ोस के तीन गांवों को भी इसका फायदा मिल रहा है।

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