गाजियाबाद। अमरीका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले के बाद उसने अपनी बचाव एजेंसियों को बेहतर बना लिय़ा था। वहां की टीमों ने छह साल में खुद को पहले के मुकाबले और भी विकसित कर लिया है। आईआरएस प्रोगाम के तहत अमरीकी बचाव एजेंसी के तीन एक्सपर्टस अब इंडिया की आपदा टीमों को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। तीन ट्रेनरों का दल गाजियाबाद के गोविंदपुरम स्थित आठवीं बटालियन में पहुंचा हआ है। 17 दिसम्बर तक ये अपने अनुभवों को एनडीआरएफ के साथ में साझा करेगा।

भारत में अब दैवीय व प्राकृतिक आपदा त्रासदी में होने वाले नुकसान को अब कम किया जा सकेगा। आईआरएस प्रोगाम के तह यूएसए के तीन ट्रेनिंग एक्सपर्ट्स गाजियाबाद आठवीं बटालियन पहुंचे हुए है। वो यहां पर देशभर में एनडीआरएफ से आए अलग- अलग बटालियनों को अपने अनुभवों को साझा कर रहे है। भारत के सभी एनडीआरएफ बटालियनों के 27 पदाधिकारियों को इसके संबंध में ट्रेनिंग दी जा रही है। ये ट्रेनर यहां अनुभव लेने के बाद अपने सेंटरों के जवानों को इसके बारे में जानकारी साझा करेगे।

अमरीका से गोविदंपुरम स्थित आठवीं बटालियन एनडीआऱएफ में क्ले टेम्पलिन, स्टीव हेल और स्कोटी बोवी पहुंचे हुए हैं। स्कोटी बोवी 2002 से आईआरएस ट्रेनर रहे हैं। उन्होंने 9/11 को वर्ल्ड सेंटर पर हुए हमले के दौरान बचाव टीम में काम किया था। इन्हीं अनुभवों को वो अब इंडिय़ा की एऩडीआरफ के साथ में साझा कर रहे हैं।

आठवीं बटालियन के कमाडेंट पीके श्रीवास्तव ने बताया कि ट्रेनिंग प्रोगाम का मुख्य उद्देश्य यह है कि कोई भी आपदा होने पर उस स्थान पर कमांड सिस्टम स्थापित करना पहला काम होता था। ताकि जनहानि को कम किया जा सके। आपदा के दौरान सभी देश और अलग जगह से बचाव एजेंसी आई हुई होती हैं। उनके साथ एक साथ काम करना और उन्हे कंट्रोलिंग करते हुए पूरी जानकारी दिया जाना इसमें सिखाया जाता है। अच्छा सिस्टम और बेहतर अनुभव की बदौलत जनहानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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