मासूम से दुष्कर्म के बाद हत्या मामले में मुंह बोले चाचा को महज 29 दिन में फांसी की सजा

Highlights

- पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने कहा- फांसी की सजा नहीं दी तो समाज में गलत संदेश जाएगा

- 18 अक्तूबर 2020 को मुंह बोला चाचा चंदन पांडेय ने दिया था वारदात को अंजाम

- 19 दिसंबर को पुलिस ने कोर्ट में पेश की थी चार्जशीट

By: lokesh verma

Published: 21 Jan 2021, 10:35 AM IST

गाजियाबाद. पाॅक्सो कोर्ट ने ढाई साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में दोषी को फांसी की सजा सुनाई है। बता दें कि कोर्ट ने महज 29 दिन में मामले की सुनवाई पूरी करते हुए यह एतिहासिक फैसला सुनाया है। इतना ही नहीं विशेष न्यायाधीश महेंद्र श्रीवास्तव ने दोषी पर डेढ़ लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है, जिसमें से आधी राशि मृतका के परिजनों को दी जाएगी। न्यायाधीश महेंद्र श्रीवास्तव फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि दोषी को फांसी की सजा नहीं सुनाई गई तो समाज में इससे गलत संदेश जाएगा। आखिर ढाई साल की बच्ची से कोई ऐसी दरिंदगी कैसे कर सकता है?

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दरअसल, थाना कविनगर क्षेत्र में 18 अक्तूबर 2020 को मुंह बोला चाचा चंदन पांडेय ने पड़ोस में रहने वाली ढाई साल की बच्ची को खिलाने के बहाने अपने साथ ले गया था। उसने सुनसान स्थान पर ले जाकर बच्ची के साथ पहले दुष्कर्म किया और फिर मामला खुल जाने के भय से बच्ची की हत्या कर दी। इसके बाद बच्ची के शव को झाड़ियों में फेंक दिया। जब परिजनों को काफी ढूंढने के बाद भी बच्ची नहीं मिली तो उन्होंने कविनगर थाने में शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने बच्ची के पिता की तहरीर पर चंदन पांडेय के विरूद्ध दुष्कर्म, हत्या, पॉक्सो एक्ट और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में केस दर्ज किया और उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

बता दें कि पुलिस ने इस मामले में 19 दिसंबर को अदालत में चार्जशीट पेश की, जिसके बाद दस गवाहों के बयान हुए। विशेष पॉक्सो एक्ट कोर्ट के विशेष न्यायाधीश महेंद्र श्रीवास्तव ने सोमवार को सुबूत और गवाहों के बयान के आधार पर चंदन पांडेय को मासूम से दुष्कर्म, हत्या करने और साक्ष्य मिटाने का दोषी करार दिया था। वहीं, बुधवार को पॉक्सो कोर्ट ने दोषी को फांसी की सजा सुनाई।

सजा सुनते ही छूटी कपकपी

बता दें कि बुधवार को जैसे ही पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने चंदन पांडेय को फांसी की सजा सुनाई तो उसकी कपकपी छूट गई। कांपते हुए उसने कोर्ट से शौचालय जाने की इजाजत मांगी। इसके बाद अदालत ने पुलिस अभिरक्षा में चार पुलिस के जवानों के साथ उसे शौचालय जाने की इजाजत दी। शौचालय जाने के दौरान उस पर कड़ी नजर रही। सजा मिलने के बाद चंदन पांडेय की आंखों में मौत का खौफ साफ देखा जा सकता था।

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