नोटबंदी: कैश के कारण अस्पताल ने नहीं किया इलाज, मौत

नोटबंदी: कैश के कारण अस्पताल ने नहीं किया इलाज, मौत
Man deadbody found

sandeep tomar | Publish: Dec, 12 2016 06:21:00 PM (IST) Ghaziabad, Uttar Pradesh, India

नई करेंसी न होने पर अस्पताल ने मरीज का इलाज करने से किया इंकार

गाजियाबाद। देश की तरक्की के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भले ही नोटबंदी का अच्छा कदम उठाया हो। लेकिन सुव्यवस्था न होने की वजह से ये कदम लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। हॉटसिटी गाजियाबाद में ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है। इसमें पीड़ित कैश के चक्कर लगातार तीन दिन तक बैंक की लाइन में लगा रहा। लाइन में लगे रहने पर उसकी हालत खराब हुई तो घर पहुंचकर परिवार के लोगों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया। वहां पर मैनेजमेंट ने नई करेंसी की दुहाई देकर इलाज से इंकार कर दिया। अस्पताल से हायर सेंटर ले जाने के दौरान अधेड़ ने दम तोड़ दिया है।

कौन है मौत का जिम्मेदार

परिवार के लोगों ने बैंक, अस्पताल मैनेजमेंट पर गंभीर आरोप लगाए है। उनके मुताबिक घर का चिराग तीन दिन से लाइन में लगने के बाद हर बार कैश खत्म हो जाता था। पीड़ित ने अपनी तबीयत खराब होने और लाइन में खड़े रहने में असक्षम होने की बात बैंक से कहीं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जब तबीयत खराब हुई तो वहां पर इलाज के लिए नरेन्द मोहन अस्पताल ले जाया गया। वहां पर नई करेंसी के चक्कर में इलाज नहीं हुआ। ऐसे में मौत की जिम्मेदारी किसकी है। क्या पीएम मोदी इसके लिए जिम्मेदार हैं।

बैंक में ही हो गया बेहोश


मुन्ना (50) अपने परिवार के साथ में चरण सिंह कॉलोनी विजयनगर में रहता था। भाई अब्दुल रहमान ने बताया कि घर में नोटबंदी की वजह से काफी दिनों से नए कैश की किल्लत चल रही थी। जरूरी काम के लिए मुन्ना नवयुग मार्केट स्थित इलाहबाद बैंक में कतार में लगा हुआ था। तीन दिन से उसे कैश नहीं मिल पा रहा था। यहां वो बेहोश होकर गिर गया था, किसी तरीके से घर पहुंचकर उसने खुद को अस्वस्थ्य बताया। परिजन उसे इलाज के लिए मोहनगर नगर स्थित अस्पताल ले गए। वहां पर नई नोट की एवज में इलाज की शर्ते रखी गई। वहां पर इलाज न मिलने पर दिल्ली के अस्पताल में ले जाने के दौरान मुन्ना की मौत हो गई।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी अज्रेय अग्रवाल से इसके बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि अस्पताल के संबंध में किसी ने अभी कोई शिकायत नहीं की है। गंभीर समस्या में रुपयों के चक्कर में इलाज नहीं हुआ तो गंभीर विषय है। इसकी जांच कराई जाएगी सत्यता मिलने पर अस्पताल के खिलाफ भी कारवाई होगी।
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