दिवाली-2017: त्यौहार के दौरान इस तरह करें असली और नकली मिठाइयों की पहचान

दिवाली-2017: त्यौहार के दौरान इस तरह करें असली और नकली मिठाइयों की पहचान

Ashutosh Pathak | Publish: Oct, 18 2017 06:52:50 PM (IST) Ghaziabad, Uttar Pradesh, India

त्यौहार के दौरान इस तरह पहचाने घर आई मिठाई असली है या नकली।

गाजियाबाद। इन दिनों पूरे देश में त्यौहारों का सीजन चल रहा है। गुरुवार को दिवाली, काली पूजा, इसके बाद गोवर्धन पूजा और फिर भाई दूज। इस दौरान सबसे ज्यादा मिठाइयों की ब्रिकी होती है। इसके साथ ही मिलावटी वाली मिठाइयों की बिक्री की भी खबर आने लगती है। ऐसे में अगर आप मिठाइयों की खरीदारी करने की सोच रहे हैं या फिर कहीं से आपके घर मिठाई आती है तो काफी सावाधानी बरतने की जरूरत है। मिठाइयों में कौन सी असली है और कौन नकली, इसका पता लगाना काफी मुश्किल हो जाता है। patrika.com ने गाजियाबाद के फूड सेफ्टी अधिकारी राजेश अग्रहरि से बातचीत कर असली और नकली मिठाई पहचानाने के बारे में जानने की कोशिश की। ऐसे करें मिलावटी वाले मिठाइयों की पहचान...

फूड सेफ्टी अधिकारी राजेश अग्रहरि ने बताया कि मिठाइयों में सबसे ज्यादा मिलावट कलर और नकली मावा का किया जाता है। उनके मुताबकि, मिठाई में मिलने वाला रंग कुछ मात्रा में हो तो लोगों की सेहत को नुकसान नहीं देता। लेकिन, ज्यादा मात्रा में रंग मिलाई जाए तो लोगों की सेहत पर उसका काफी बुरा असर पड़ता है। राजेश अग्रहरि के अनुसार, 100 पोली प्रोपाईलीन तक मिठाइयों में रंग मिलाया जा सकता है। लेकिन, उससे ज्यादा हानिकारक है। उनका कहना था कि इस तरह की मिठाइयों में आम कलर देखकर असली-नकली की पहचान कर सकते हैं। लेकिन, पूर्ण रूप से इसकी पहचान जांच करने के बाद ही पता चलेगा। उनका यह भी कहना था कि इस तरह की मिठाइयों में मिलावटी का शक होते ही आम समाधान योजना के अंतर्गत विभाग को सूचित करें।

ऐसे करें नकली मावा की पहचान

राजेश अग्रहरि ने बताया कि मिठाइयों में मिलाए जाने वाले मावे की जांच मेडिकल स्टोर पर बिकने वाली आयोडीन की कुछ बूंदें से की जा सकती है। मिठाई में कुछ आयोडीन की बूंद मिलाएं, अगर उसका रंग बदल जाता है तो उसमें मिलावट किया गया है। इसके अलावा मावे में थोड़ी सी चीनी डालकर गर्म करें, यदि वो पानी छोड़ने लगे तो समझिए मिलावटी है। मावा को लेकर हाथ पर रगड़ें, असली होने पर देशी घी की तरह खुशबू आएगी। नकली मावा से अजीब तरह की दुर्गन्ध आती है। इतना ही नहीं असली मावा खाने पर मुंह में चिपकता नहीं है, जबकि नकली मावा खाने पर मुंह में चिपकता है। इसके अलावा मिलावटी मावा पानी में डालने पर टूटकर अलग हो जाता है, जबकि असली मावा पतला होकर पानी में घुल जाता है।

ऐसे करें असली और नकली दूध की पहचान

त्यौहार के दौरान बाजार में नकली दूध की खरीद-बिक्री भी जोर-शोर से होने लगती है। सिंथेटिक दूध में साबुन जैसी गंध आती है, जबकि असली दूध में कुछ खास गंध नहीं आती। असली दूध का स्वाद हल्का मीठा होता है, जबकि नकली दूध का स्वाद डिटर्जेंट और सोडा मिला होने की वजह से कड़वा हो जाता है। असली दूध स्टोर करने पर अपना रंग नहीं बदलता, जबकि नकली दूध कुछ टाइम के बाद पीला पड़ने लगता है। इसके अलावा असली दूध में यूरिया हो तो ये हल्के पीले रंग का ही होता है, वहीं अगर सिंथेटिक दूध में यूरिया मिलाया जाए तो ये गाढ़े पीले रंग का दिखने लगता है। वहीं, असली दूध को उबालने पर रंग नहीं बदलता, जबकि नकली दूध उबालने पर पीले रंग का हो जाता है। अगर आप भी मिठाई खरीदने बाजार रहे हैं या फिर गिफ्ट के तौर पर कहीं से मिठाई मिलती है तो इन बातों का जरूर ध्यान रखें।

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