केंद्र सरकार के इस नियम से आहत हुए सैनिक, भड़का गुस्सा

केंद्र सरकार के इस नियम से आहत हुए सैनिक, भड़का गुस्सा
Kiran Rijiju

sandeep tomar | Publish: Dec, 07 2016 06:36:00 PM (IST) Ghaziabad, Uttar Pradesh, India

केंद्रीय मंत्री किरन रिजीजू ने संसद में सेना और सैनिकों से जुड़ा बयान दिया, जिसके बाद से सैनिक आहत हैं

गाजियाबाद। किसी ऑपरेशन के दौरान मारे गए सेना और पैरामिलेट्री के जवानों को शहीद नहीं कहा जा सकता है। केंद्रीय मंत्री किरन रिजीजू द्वारा संसद में एक सवाल के जवाब में दिए गए इस बयान के बाद से हंगामा मच गया है। पूर्व सैनिक इस बयान की ​जमकर निंदा कर रहे हैं। पूर्व सैनिकों के मुताबिक राजनेताओं को सोच समझकर इस तरीके की बयानबाजी करनी चाहिए। सेना का जवान देश के लिए अपनी जान न्यौछावर करता है। अगर वो शहीद होता है तो अपने देश के लिए नेता अगर ऐसी बयानबाजी करते हैं तो उनके परिवार के लोगों को चोट पहुंचती है।

इस बयान पर मचा बवाल

संसद में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित जवाब में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरन रिजीजू ने बताया कि अगर कोई जवान किसी ऑपरेशन के वक्त मारा जाता है तो उसके लिए शहीद जैसा शब्द सेना में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। इसी तरह अगर केंद्रीय सशस्त्र बलों और असम राइफल्स का कोई जवान अभियान या कार्रवाई में मारा जाता है तो ऐसे किसी शब्द का उल्लेख नहीं किया जाता है। ना तो पुलिस मैनुएल और ना ही सेना के किसी कानून में इस शब्द का प्रावधान हैं। इसलिए इस शब्द का इस्तेमाल सेना या पैरा मिलेट्री के मारे गए जवानों के लिए नहीं किया जा सकता हैं। रिजीजू के मुताबिक मारे गए जवानों के परिवार या करीबी संबंधी को नियमों के मुताबिक पूरी पैंशन और एक मुश्त अनुग्रह राशि जरूर दी जाती है।

तो क्या सड़क पर मरने वाले को मिलना चाहिए शहीद का दर्जा

परिवर्तन स्कूल के एमडी व आर्मी से रिटायर्ड बिग्रेडियर वीसी चौधरी ने बताया कि किरन रिजीजू ने ये बेहद शर्मनाक बयान दिया है। मैं पूछना चाहता हू कि अगर कोई देश के लिए अपनी जान देता तो उसे क्या दर्जा मिलना चाहिए। शहीद का दर्जा का सड़क पर मारे जाने वाले शख्स को मिलना चाहिए? इस सोच से सेना और पैरामिलेट्री दोनों के जवानों और परिवार का मनोबल कमजोर पड़ता है। ऐसे शख्श देश को पीछे धकेलने के लिए काम कर रहे हैं। अगर वास्तविकता में ऐसा कदम उठा तो हमें भी मजबूर होना पड़ेगा।

अपने ही लोगों से हार जाएगा देश


कर्नल तेजेन्द्र पाल त्यागी के मुताबिक हमारे देश की सीमा पर तैनात जवान इस बात के लिए कतई तैयार नहीं है। हम मान और सम्मान की लड़ाई लड़ते है। गृहमंत्रालय को अपने शब्दों पर विचार करना चाहिए। इस तरीके से अगर सैनिक के साथ हुआ तो वो बाहर की किसी लड़ाई से पहले अपने ही लोगों से हार जाएगा।
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