तीन तलाक और हलाला के बाद अब बहुपत्नी प्रथा के खिलाफ मुसलमानों ने ही उठाई आवाज

तीन तलाक और हलाला के बाद अब बहुपत्नी प्रथा के खिलाफ मुसलमानों ने ही उठाई आवाज

Iftekhar Ahmed | Publish: Sep, 10 2018 02:53:01 PM (IST) | Updated: Sep, 10 2018 02:53:02 PM (IST) Ghaziabad, Uttar Pradesh, India

बहुपत्नी प्रथा को मुसलमानों के इस संगठन ने बताया नाजायज

मेरठ. मुस्लिम समाज में धर्म के नाम पर जारी प्रथा के खिलाफ अब खुद मुस्लिम संगठन ही आवाज उठाने लगे हैं। इसी कड़ी में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आऱएसएस) के मुस्लिम विंग राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने अब कहा है कि तीन तलाक, हलाला और बहुपत्नी प्रथा के नाम पर मुस्लिम महिलाओं का शोषण हो रहा है। ये बाते राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के पदाधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही। राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि तीन तलाक की तरह बहुपत्नी प्रथा के खिलाफ भी कानून बनाया जाना चाहिए। मंच के प्रांत संयोजक कदीम आलम ने कहा कि मौजूदा दौर में तीन तलाक और हलाला के संबंध में देवबंद के उलेमा को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इस मसले पर उलेमा की चुप्पी गलत संदेश दे रही है। उन्होंने कहा कि हलाला की आड़ में पूर्व नियोजित ढंग से निकाह कराया जाता है, जो कि इस्लाम की नजर में गलत है। इसी तरह तलाक के बाद महिला को घर से निकालना जुर्म है। बहुपत्नी प्रथा पर मौलाना हमीदुल्लाह खान ने कहा कि जब यह प्रथा शुरू हुई थी, वह उस समय जंग का समय था। सैकड़ों की संख्या में सिपाही जान से हाथ धो बैठते थे। उनके परिवार की महिलाओं को सहारा देने के उद्देश्य से इस्लाम में एक से ज्यादा पत्नी रखने को जायज करार दिया गया था, लेकिन मौजूदा समय में लोग रंगरेलियां मनाने के लिए इस प्रथा का नाजायज इस्तेमाल कर रहे हैं। इस पर भी अंकुश लगना चाहिए।

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राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के राष्ट्रीय सह संगठन संयोजक तुषारकांत हिंदुस्तानी ने कहा कि इसी तरह गौ हत्या पर भी उलेमा को आगे आकर इसका मांस खाना नाजायज करार देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस्लाम में गोमांश को बीमारी और उसके दूध और घी के सेवन को अच्छा करार दिया गया है। इस मौके पर हलाला को लेकर सुप्रीम कोर्ट में वाद दायर करने वाली महिला फरजाना के घर पर हमले की निंदा की गई। मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि तीन तलाक और हलाला पीड़ित महिलाओं की कोर्ट में संगठन निःशुल्क पैरवी कर रहा है।

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