जूते पॉलिश कर पलक जैसे बच्चों के लिए जमा कर रहे पैसे

  जूते पॉलिश कर पलक जैसे बच्चों के लिए जमा कर रहे पैसे

गाजियाबाद की रहने वाली 11 साल की पलक कालिया दिव्यांग हैं। वह इंटरनेशल लेवल की एथली​ट भी है।

गाजियाबाद। आप ज्यादा से ज्यादा किसी दिव्यांग को देखकर उस पर तरस खा सकते हो, या ज्यादा होगा तो कुछ पैसे दे देंगे लेकिन एक शख्स एेसा है, जो इनकी मदद करने के लिए हर तरह से तैयार रहता है, यहां तक कि दूसरों के जूतों के पाॅलिश करने के लिए भी। इनका काम इस बात की गवाही खुद-ब-खुद देता है।

जी हां, दिव्यांगों की मदद करने वाले इस शख्स का नाम है सुभाष गुरू, जो लोगों के जूते साफ कर जरूरतमंद बच्चों के लिए एक-एक पार्इ जुटाते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि वह इस पैसे को अपने पास नहीं रहते हैं बल्कि एक संस्था को दे देते हैं।

पार्क के बाहर साफ करते हैं जूते

गाजियाबाद निवासी सुभाष गुरू राम मनोहर लोहिया पार्क के बाहर लोगों के जूते साफ करते हैं। वह कहते हैं, सभी दिव्यांग बच्चों को मैं अपना मानता हूं और उनके लिए इस तरह से पैसे जुटाता हूं। अहम ये है कि इस पैसे को सुभाष गुरू भाई अपने पास नहीं रखते हैं। वह इस पैसे को सामाजिक संस्थाओं को देते हैं।

palak kalia

अंतरराष्ट्रीय स्तर की एथलीट है पलक


गाजियाबाद की रहने वाली 11 साल की पलक कालिया दिव्यांग हैं। वह इंटरनेशल लेवल की एथली​ट भी हैं। पलक को इसके लिए राष्ट्रपति मेडल तक मिल चुका है। रविवार को सुभाष गुरू ने पलक के साथ बैठकर लोहिया पार्क के गेट पर अपनी चौकी जमाई और लग गए लोगों के जूते साफ करने।

दो घंटे तक साफ किए जूते


करीब दो घंटे तक उन्होंने लोगों के जूते साफ किए और इस दौरान उन्होंने 1216 रुपए जमा किए। ये पैसे उन्होंने पहल संस्था को दान में दे दिए। संस्था के विकास कुमार भी जूते पॉलिश करने के लिए पहुंचे। विकास ने भी गुरू के साथ सहयोग दिया और पैसे जुटाए।

जो जूते पाॅलिश कराते हैं, उन्हीं से लेते हैं पैसे


सुभाष भाई गुरू का कहना है, मैं पलक कालिया और उसके जैसे अन्य बच्चों को लिए पैसे इकट्ठे कर रहा हूं। इसके लिए मैंने लोगों के जूते पॉलिश करने का फैसला लिया। जो लोग हमसे जूते पॉलिश कराते हैं, हम उन्हीं से पैसे लेते हैं अगर कोई बिना ​जूते पॉलिश कराए पैसे देता है तो हम पैसे नहीं लेते हैं। हमने ये सारा पैसा पहल, एक नई सोच नाम की संस्था को दान में दे दिया है। ये संस्था बिहार में काम करती है।

फेसबुक से पता चला पलक के बारे में


पलक के पिता विजय कालिया का कहना है, सुभाष भाई को फेसबुक के द्वारा पलक के बारे में पता चला था। उसके बाद वह पलक से मिले और उसकी प्रतिभा से प्रभावित हुए। रविवार को उन्होंने पलक और उसके जैसे बच्चों के लिए जूते तक पॉलिश किए।

आगे भी जारी किए जाएंगे कार्यक्रम


पहल, एक नई सोच संस्था के विकास कुमार का कहना है कि सुभाष भाई की पहल बहुत बेहतर है। हमने जूते पॉलिश करके 1200 रुपए से ज्यादा जमा किए हैं और इन पैसों को बच्चों की पढ़ाई में इस्तेमाल किया जाएगा। आगे भी ऐसे कार्यक्रम जारी रहेंगे।

यहां देखें वीडियो


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