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UP Assembly Election 2022 : अबकी बार बदल सकते हैं हार-जीत समीकरण, मुद्दा गरम है

UP Election 2022 : विधानसभा 2022 की बात करें तो इस सीट पर चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। क्योंकि इस सीट पर सर्वाधिक मत जाट किसान और मुस्लिम वर्ग के हैं। कृषि कानून को लेकर लगातार किसान प्रदर्शन कर रहे हैं और प्रदेश सरकार के खिलाफ भी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। अगर किसानों की मांगों को अनसुना किया गया तो भाजपा के लिए परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं।

गाज़ियाबाद

Published: October 23, 2021 04:17:52 pm

गाजियाबाद. UP Election 2022 : दिल्ली से सटा गाजियाबाद (Ghaziabad) अंग्रेजों के जमाने का पुराना शहर है। सबसे पहले गाजियाबाद में केवल एक विधानसभा होती थी। आबादी और क्षेत्र बढ़ा तो 5 विधानसभा बन गईं। गाजियाबाद में पहले दिल्ली गेट, डासना गेट ,जवाहर गेट और सिहानी गेट यानी 4 गेट के अंदर ही आबादी वाला इलाका था। जबकि बाहरी क्षेत्र इंडस्ट्रियल एरिया कहलाता था। लेकिन, तब से अब तक गाजियाबाद की आबादी 100 गुना से भी ज्यादा हो चुकी है और काफी क्षेत्र में फैल गया है। गाजियाबाद अब इंडस्ट्रियल के साथ-साथ एजुकेशनल और रियल स्टेट हब में भी गिना जाता है। जिले में लोनी विधानसभा संख्या- 53 (Loni Assembly) हमेशा चर्चाओं में रहती है। जहां तेजी से विकास हुआ है।
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लोनी विधानसभा की अगर राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो लोनी क्षेत्र पहले खेकड़ा विधानसभा में आता था। उस दौरान 1997 में राष्ट्रीय लोक दल के कद्दावर नेता मदन भैया विधायक थे। 2012 में चुनाव हुआ तो यहां का परिसीमन हो गया और लोनी विधानसभा क्षेत्र बन गया। 2012 में लोनी विधानसभा क्षेत्र से बीएसपी के जाकिर अली पहले विधायक चुने गए। उसके बाद बीजेपी की लहर आई तो भारतीय जनता पार्टी के नेता नंदकिशोर गुर्जर चुने गए। अभी इस सीट पर भाजपा का कब्जा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां बदलाव देखने को मिल सकता है, जिसका मुख्य कारण नए कृषि कानून माना जा रहा है।
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2022 में आसान नहीं है विधायक की राह

आगामी विधानसभा 2022 की बात करें तो इस सीट पर चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। क्योंकि इस सीट पर सर्वाधिक मत जाट किसान और मुस्लिम वर्ग के हैं। कृषि कानून को लेकर लगातार किसान प्रदर्शन कर रहे हैं और प्रदेश सरकार के खिलाफ भी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। अगर किसानों की मांगों को अनसुना किया गया तो भाजपा के लिए परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं।
प्रमुख समस्या

लोनी विधानसभा की समस्या की बात करें तो इस सीट पर सबसे बड़ी परेशानी यहां होने वाले जलभराव की है। इसके साथ ही क्षेत्र में कोई डिग्री कॉलेज या लड़कियों के इंटर कॉलेज भी नहीं है। सपा के शासन में कई बार यहां की जनता ने विधायक से मेडिकल कॉलेज की मांग की थी, लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं हो सकी। लोगों को बीजेपी की योगी सरकार से बेहद उम्मीद थी, लेकिन बीजेपी सरकार के ढीले-ढाले रवैया के चलते अभी भी समस्या जस की तस है।
मतदाताओं पर एक नजर

लोनी के सामाजिक परिदृश्य की बात करें तो क्षेत्र में सभी जातियों के लोग रहते हैं। खासतौर पर यह इलाका मुस्लिम बाहुल्य है। मुस्लिम बाहुल्य होने के कारण लोनी विधानसभा में बीएसपी के नेता जाकिर अली ने 2012 में करीब 25000 से भी ज्यादा वोटों से जीते थे। उन्होंने राष्ट्रीय लोक दल के नेता मदन भैया को हराया था। वहीं, 2017 के आंकड़ों के मुताबिक, करीब 4,55,500 मतदाता थे।जिनमें सबसे ज्यादा मुस्लिम उसके बाद पूर्वांचल के रहने वाले लोग और ब्राह्मण, गुर्जर, त्यागी, दलित, वाल्मीकि और गढ़वाल के अलावा अन्य ओबीसी मतदाता भी शामिल थे। बीजेपी की लहर होने के कारण 2017 में नंदकिशोर गुर्जर ने यहां जोरदार जीत हासिल की थी।
किस दल से कौन प्रत्याशी

2022 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो फिलहाल बीजेपी के मौजूदा विधायक नंदकिशोर गुर्जर टिकट का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। जबकि बीएसपी, सपा या रालोद से किसी प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं हो सकी है। आबादी को ध्यान में रखते हुए सपा-बसपा यहां मुस्लिम चेहरे को मैदान में उतार सकते हैं। वहीं, अगर सपा और रालोद का गठबंधन हुआ तो मदन भैय्या को प्रत्याशी बनाया जा सकता है। जबकि कांग्रेस मुस्लिम प्रत्याशी पर ही दांव खेल सकती है।

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