किडनैपिंग किंग के नाम से कुख्यात यूपी का यह माफिया, जिसका मुरीद था अडंरवर्ल्ड डान दाउद इब्राहिम

प्यारा दुलारा और मासूम सा दिखने वाला ये लड़का अडंरवर्ल्ड में किडनैपिंग किंग के नाम मशहूर हो गया

By: Ashish Shukla

Published: 25 Apr 2018, 09:49 AM IST

वाराणसी. पूर्वांचल के गाजीपुर जिले के आम घाट कॉलोनी में आर्मी का कर्नल विकास श्रीवास्तव जब घर आता तो उसका छोटा भाई उसकी वर्दी और उसके जज्बे का दीवाना रहता। पिता विश्वनाथ श्रीवास्तव प्रिंसिपल थे जो बेटे की होनहारी और सेना को लेकर उसके मन के भीतर पल रहे प्यार को बखूबी समझ जाते। लेकिन किस्मत ने ऐसा पासा पल्टा कि कालोनी का सबसे प्यारा दुलारा और मासूम सा दिखने वाला ये लड़का अडंरवर्ल्ड में किडनैपिंग किंग के नाम मशहूर हो गया। जिसने देश में ऐसे वारदातों को अंजाम दिया की अडंरवर्ल्ड डान दाउद इब्राहिम भी उसका मुरीद बन गया। दाउद उससे अपने काम को अंजाम दिलाने लगा। बाद में दोनों का साथ छूटा। लेकिन तब तक ये बन चुका था किडनैपिंग किंग बबलू श्रीवास्तव।

जी हां हम बात कर रहे हैं माफिया डॉन बबलू श्रीवास्तव की जो इस समय जेल में सजा काट रहा है। इसका असली नाम ओम प्रकाश श्रीवास्तव है। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले का रहने वाला है। बचपन से ही बबलू या तो सेना में अफसर बनना चाहता था या फिर उसे आईएएस अधिकारी बनने की ललक थी। लेकिन उसकी जिंदगी को कॉलेज की एक छोटी सी घटना ने पूरी तरह बदल दिया।

लखनऊ विश्वविद्यालय में वह कानून की पढ़ाई कर रहा था। उसी दौरान 1982 में छात्रसंघ चुनाव चल रहे थे। बबलू का साथी नीरज जैन चुनाव में महामंत्री पद का उम्मीदवार था। चुनाव को लेकर दो गुटों में हार-जीत की लड़ाई और विवाद चरम पर था। इसी चुनाव में एक छात्र की चाकू मारकर हत्या कर दी जाती है। जो अरुण शंकर शुक्ला उर्फ अन्ना गुट का बताया जाता था। इस मामले में अन्ना ने बबलू श्रीवास्तव को आरोपी बनाकर जेल भेजवा दिया। यह बबलू के खिलाफ पहला मुकदमा था। यहीं से उसके मन में नफरत की आग जलने लगी जो उसे अपराध जगत का एक कुख्यात नाम बना दिया।

जेल जाने के बाद बबलू के सपने बदल गये। सेना में अधिकारी बनना अब उसका मकसद नहीं रहा। वह तो अब अरूण कुमार शुक्ला उर्फ अन्ना से बदला लेना चाहता था उसे सबक सिखाना चाहता था। कुछ दिन के बाद बबलू जमानत पर बाहर तो आया लेकिन अन्ना को बबलू फूटी आंख भी नहीं सुहाता था। उसने फिर से बबलू को एक स्कूटर चोरी के आरोप में जेल भेजवा दिया। बेटे पर बार-बार इस तरह के गतविधियों में शामिल होने की बात सामने आने से परिवार के अरमान टूट रहे थे। घर वाले नाराज होकर बबलू की जमानत तक न कराई और उसे दो हफ्ते जेल में बिताना पड़ा। इसके बाद एक के बाद एक मामले बबलू के सर पर मढ़े जाने लगे। इन सब बातों से परेशान होकर बबलू ने घर छोड़ने का फैसला कर लिया। हास्टल में रहना शुरू किया तो अन्ना से बदले की आग और तेज हो गई। इसी बीच वह अन्ना के विरोधी रहे माफिया रामगोपाल मिश्र के सम्पर्क में आ गया और उसके लिए काम करने लगा। यही वो वक्त था जब बबलू ने अपराधी की दुनिया में कदम रख दिया था। अब वह पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहता था।

अब वो अपराध की दुनियां के ही शीर्ष पर काबिज हो जाना चाहता था। यूपी, बिहार महाराष्ट्र और बंगाल तक में वह बड़े-बड़े अपराध को अंजाम देने लगा। अपहरण की दुनियां में उसका डंका बजने लगा। इस धंधे में वो कई बड़े लोगों को मिटाकर अपना सिक्का चलाने लगा। पुलिस ने बबलू के खिलाफ कई अपहरण और फिरौती का मुकदमा दर्ज किया। जुर्म की दुनिया में लोग उसे किडनैपिंग किंग कहा जाने लगा। बबलू के नाम की शोर इस तरह हुई की अंडरवर्ल्र्ड डान दाउद इब्राहिम ने उसे अपने साथ जुड़ने के लिए कह दिया।

वह 1992 में दुबई जा पहुंचा। जहां नेपाल के माफिया डॉन और राजनेता मिर्जा दिलशाद बेग ने उसकी मुलाकात अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहीम से कराई। बबलू की पहचान अब विदेशों में भी होने लगी थी। इसी बीच 1993 में अचानक मुंबई में एक साथ कई धमाके हुए। इन धमाकों के पीछे डॉन दाऊद इब्राहिम का नाम आने लगा। इसी दौरान छोटा राजन और बबलू श्रीवास्तव समेत कई लोगों ने डी कंपनी को अलविदा कह दिया। यहीं से छोटा राजन और बबलू श्रीवास्तव के बीच भी जंग की शुरूआत हो गई थी।

एडिशनल कमिश्नर की हत्या में उम्रकैद

लेकिन पुणे में एडिशनल पुलिस कमिश्नर एलडी अरोड़ा की हत्या के मामले में बबलू का नाम सुर्खियों में आ गया था। आरोप था कि बबलू और उसके साथी मंगे और सैनी ने सरेआम एडिशनल कमिश्नर अरोड़ा को गोलियों से भून दिया था। इस मामले की सुनवाई करते हुए बबलू और उसके साथियों को अदालत ने दोषी माना। और तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी

बबलू के खिलाफ पर चल रहे थे 60 मामले

1995 में माफिया डॉन बबलू श्रीवास्तव मॉरिशस में पकड़ा गया । उस समय बबलू पर 60 मामले चल रहे थे। हालांकि अभी उसके खिलाफ चार मामले लंबित हैं। इसी बीच बबलू की हत्या की साजिश रचने में डी कंपनी का नाम आय़ा। लेकिन वह बच गया। फिलहाल इस समय बबलू को बरेली जेल में रखा गया है।

Ashish Shukla
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