विधायक अपना चरित्र बदले- पूर्व मंत्री ओम प्रकाश सिंह

Sarveshwari Mishra

Publish: Oct, 13 2017 10:53:43 (IST) | Updated: Oct, 13 2017 10:53:44 (IST)

Ghazipur, Uttar Pradesh, India
विधायक अपना चरित्र बदले- पूर्व मंत्री ओम प्रकाश सिंह

कासिमाबाद थाने में हुई बदसलूकी पर डॉ. राम मनोहर लोहिया के जयंती पर ओम प्रकाश सिंह ने दिया बयान

गाजीपुर. विधायक पहले अपने आचरण में सुधार लाए और विधायक नियमावली पढ़ें व जानें। ये बाते पूर्व सपा मंत्री ओम प्रकाश सिंह ने भासपा के विधायक के साथ कासिमाबाद थाने में हुई बदसलूकी पर डॉ. राम मनोहर लोहिया के जयंती पर कहा।

 


उन्होंने कहा कि भासपा के विधायक त्रिवेणी राम के साथ थाने के अंदर दरोगा द्वारा की गई बेअदबी पर बोलते हुए कहा कि विधायक अपने चरित्र पर खरे नहीं हैं। अगर उनका चरित्र होगा तो दारोगा क्यों नहीं सुनेगा। विधायक अगर 3 नंबर का काम करने को सोचेगा तो दारोगा भी 8 नंबर का काम करने की सोचेगा। यहां तो कम्पटीशन है कि हम कितना गुना काम कर लें। उन्होंने कहा कि अगर हमारे कार्यकर्ता के साथ कुछ भी होगा तो अधिकारियों को सुनना होगा। वो न्याय देने के लिए बैठे है। न्यायी थोड़े है। अगर वो न्याय नहीं देगें तो जहां से अन्याय शुरू होगा वहीं से समाजवाद धरातल पर शुरू होगा।

 

 

 

बतादें कि प्रखर समाजवादी नेता डॉ. राममनोहर लोहिया की जयंती पूरे प्रदेश में समाजवादी पार्टी के लोगों ने मनाया। इसी कड़ी में जनपद के समाजवादियों ने पूर्व मंत्री ओम प्रकाश सिंह के अगुआई में लोहिया की जयन्ती मनाई गई। इस अवसर पर उन्होंने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं से लोहिया के पद चिन्हों पर चलने के साथ ही आज के मौजूदा समय में भासपा के विधायक के साथ कासिमाबाद थाने में हुई बदसलूकी पर कहा कि विधायक पहले अपने आचरण में सुधार लाए।

 

 

इस जयन्ती के अवसर पर जंगीपुर विधायक डॉ. वीरेन्द्र यादव समेत तमाम वरिष्ठ नेता शामिल रहे। डॉ.राम मनोहर लोहिया एक प्रखर समाजवादी नेता थे और इन्हीं को अपना आदर्श मान समाजवादी पार्टी इनके दिखाए हुए रास्तों पर चलती है। इनकी पार्टी कार्यालय पर जयंती मनाया गया। जिसमें प्रदेश के पूर्व मंत्री ओम प्रकाश सिंह शामिल रहे। इस दौरान उन्होंने बताया कि लोहिया जी एक प्रखर समाजवादी योद्धा थे और उनके विचारों ने ही समाजवादियों को पैदा किया हम लोग उनके विचारों को आगे बढ़ाने का काम कर रहे है।

 


डॉ. राम मनोहर लोहिया जंगे आजादी की लड़ाई के पर्यायवाची है। जब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहलाल नेहरू दिल्ली के तख्तोताज को बांट रहे थे। तब लोहिया जय प्रकाश नरायण, नरेन्द्र देव मिल जाता लेकिन इन लोगों ने राजसत्ता को लात मारकर गरीबों के साथ जाना बेहतर समझा।

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