VARANASI TRAGEDY: वीरेन्द्र यादव, जिसके परिवार कमाने अब कोई कमाने वाला नहीं बचा, बचे हैं तो 4 बच्चे, बीवी और बूढ़े मां-बाप

गाजीपुर के वीरेन्द्र यादव की वाराणसी के फ्लाई ओवर बीम गिरने से हुए हादसे में दबकर हुई मौत।

ग़ाज़ीपुर. वाराणसी में फ्लाई ओवर की बीम गिरने से हए हादसे में गाजीपुर के नंदगं थानान्तर्गत मुड़वल गांव के लठवापुरा के विरेन्द्र यादव की भी मौत हो गई। वीरेन्द्र यादव उसी बोलेरो गाड़ी को चला रहे थे जो बीम के नीचे दब गई, जिसमें उनके साथ ही तीन और लोगों की दबकर मौत हो गयी। वीरेन्द्र यादव के परिवार पर दुखों का पहाड़ तो टूट ही पड़ा है अब उनके सामने जीवन-यापन का संकट भी है। वीरेन्द्र परिवार की रोजी-रोटी चलाने का एकमात्र जरिया थे।

 

 

गाजीपुर के नंदगंज थानाक्षेत्र के मुड़वल गांव के लठवा पुरा निवासी केदार सिंह यादव के पुत्र वीरेन्द्र यादव अपने मां-बाप के इकलौते थे। वह परिवार का भरण-पोषण करने के लिये ड्राइवर का काम करते थे। मंगलवार को वह सहेड़ी के ही शिवबचन राम के बेटे संजय राम को कीमो थेरेपी दिलाने उन्हीं की बोलेरो से ले गए थे। संजय के साथ उनके पिता व भाई भी गाड़ी में सवार थे।


वह वापस लौट रहे थे कि वाराणसी कैंसर संस्थान के नजदीक ही निर्माणाधीन फ्लाई ओवर की बीम गिरने से उसमें बोलेरो समेत दब गए। घटना में चारों की जान चली गयी। वीरेन्द्र अपने पीछे चार मासूम बच्चे, जिनमें एक आठ साल की लड़की व 12, पांच व तीन साल के तीन बेटे हैं। पत्नी धनवती और पिता केदार सिंह का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता की तो आंखें जैसे पथरा गई हैं। पत्नी रोते-रोते जैसे अपना सुध-बुध ही खो चुकी हैं। वीरेन्द्र मी मां नेवाती को संभालने वाला कोइ नहीं। वह रोते-रोते अचानक बेसुध हो जा रही हैं।


पिता ने कहा कि वह वह मित्र की गाड़ी लेकर उन्हें दवा दिलाने गए थे। वह दो दिन से गाड़ी पर थे। हम लोगों को इसके अलावा कुछ और नहीं मालूम था। उसके बाद अब ये खबर आयी है। आगे परिवार का खर्च कैसे चलेगा इस सवाल पर वह खामोश हो गए। चचेरे भाई ने घटना के लिये भ्रष्टाचार को दोषी करार देते हुए सरकार से बच्चे के पालन पोषण की जिम्मेदारी उठाने और उसके लिये नौकरी की मांग की।
By Alok Tripathi

रफतउद्दीन फरीद
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