आखिर क्यों मनोज सिन्हा को देनी पड़ी पत्रकारों को नसीहत, कहा- नकारात्मक नहीं सकारातंमक लिखें

Jyoti Mini

Publish: Sep, 16 2017 04:49:40 (IST)

Ghazipur, Uttar Pradesh, India
आखिर क्यों मनोज सिन्हा को देनी पड़ी पत्रकारों को नसीहत, कहा- नकारात्मक नहीं सकारातंमक लिखें

उत्तरप्रदेश फसल ऋण मोचन योजना के तहत आज यानि शनिवार को गाजीपुर के पीजी कॉलेज में किसानों को कर्जमाफी का प्रमाण पत्र वितरण किया गया

गाजीपुर उत्तर-प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना किसान ऋण मोचन का शुभारंभ जनपद में प्रभारी मंत्री बृजेश पाठक और रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने किया। इस अवसर पर 3031 किसानों को जहां प्रमाणपत्र वितरित किया गया। वहीं इस कार्यक्रम पर जिला प्रशासन को खर्च का 10 लाख का बजट मिला था।अन्य जनपदों की भाँति यहाँ भी किसानों को 233 रूपये तक के भी प्रमाणपत्र वितरित किया गया। वहीं रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने पत्रकारों को नसीहत देते हुये कहा कि, नकारात्मक नहीं सकारात्मक खबरें लिखें। साथ ही बिजली कटौती पर कहा कि कोई जादू की छड़ी नहीं है कि दो महीने में उत्पादन बढ़ाकर आपूर्ति बढ़ा दी जाये।

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किसान जिसे हम अन्नदाता कहते हैं और इसी अन्नदाता को भाजपा सरकार बनने से पूर्व इनके बकाये ऋण को माफ करने का वादा भाजपा द्वारा किया गया था। सरकार बनी और वादा शनिवार को जमीन पर किसान ऋण मोचन कार्यक्रम के रूप में सामने आया। जहां जनपद के 3031 किसानों को इनके ऋण माफी का प्रमाणपत्र जनपद के प्रभारी मंत्री और केन्द्रीय मंत्री मनोज सिन्हा के हाथों बांटा गया। अपने ऋणमाफी का प्रमाणपत्र पाकर किसान काफी खुश नजर आ रहे थे। वहीं एक महिला किसान जिसे 233 रुपये का प्रमाणपत्र मिला था। वो कुछ उदास दिखी। क्योंकि उसका कहना था कि, मेरा 10000 के करीब बकाया था लेकिन 233 रूपया मिला। वहीं इस कार्यक्रम पर खर्च के लिये जिला प्रसाशन को कुल 10 लाख रूपये शासन से मिले थे। इस कार्यक्रम के माध्यम से कितनी धनराशि का प्रमाणपत्र किसानों के वितरीत किया गया ये कृषि उपनिदेशक यू.पी. सिंह को पता ही नहीं था।

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इस कार्यक्रम में भारत सरकार के रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने पत्रकारों को नसीहत देते हुये कहा कि, पत्रकार सभी चीजों में नकारात्मक खबरें ही न देखें बल्कि सकारात्मक चीजें देखें। कई जनपदों में किसान ऋण मोचन योजना में किसानों को कम राशि का प्रमाणपत्र जारी होने पर सफाई भी दी और कहा कि, कई किसानों ने कर्ज लिया था और उसका भारी मात्रा में भुगतान कर दिया था। कुछ किसानों का 77 रूपया तो कुछ का 133 रूपया ऋण बकाया रह गया था। इसलिये उन्हें इस राशि का प्रमाणपत्र दिया गया। वहीं बिजली पर बोलते हुये कहा कि, कोई जादू की छड़ी नहीं है कि एक दो महीना में उत्पादन बढ़ाकर आपूर्ति बढ़ा दी जाये। सरकार आने वाले दिनों में ऐसी व्यवस्था जरूर करने जा रही है कि किसानों को 18 घंटे बिजली मिले।

 

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