गाजीपुर के लाल का कमाल, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम 

 गाजीपुर के लाल का कमाल, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम 
Portrait artist Hari om Singh

यूरोप के कलाकार का तोड़ा था रिकॉर्ड 

​गाजीपुर. कहते हैं कि पुत के पांव पालने में ही दिखते है, इस कहावत को जनपद के एक पोट्रेट कलाकार ने सिद्ध किया है। उसने अपने कला के दम पर अपना नाम लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज करा कर जनपद का ही नहीं बल्कि उस मां का भी सम्मान बढ़ाया जिस मां ने खाना बनाते समय एक पेंसिल और नोटबुक देकर अपने पास से दूर करने के लिए ऑर्ट बनाने की सलाह दी थी। पहले वह सलाह कुछ देर में चींटी की चित्र के रूप में आई और फिर यह कारवां यहीं नहीं रूका बल्कि लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड तक पहुंच गया और अब वर्ल्ड ऑफ गिनीज बुक के लिए अपने हौसले की कदम को आगे बढ़ा दिया है।य़

पोट्रेट कलाकार हरिओम सिंह  जिले के देवकली ब्लॉक के देवकली गांव का रहने वाला है। हरिओम नवोदय विद्यालय गाजीपुर के 12वीं का छात्र है इसकी उंगली पेंसिल और कागज पर इस कदर चलती है कि सामने वाला भी यह समझ नहीं पाता कि हरिओम कर क्या रहा है और कुछ देरबाद सामने बैठे हुए लोगों की आकृति कागज पर उकरी नजर आती है।






यूरोप के कलाकार का तोड़ा था रिकॉर्ड 
हरिओम अपनी इसी कला के दम पर 18 जुन 2016 को एक विश्व रिकार्ड बनाने की ठानी और 24 घंटा के अंदर युरोप के कलाकार का विश्व रिकार्ड जो 10.16 मिनट का था। उसे तोड़ते हुए 24 घंटे के अंदर 261 पोट्रेट बनाकर विश्व रिकार्ड कायम किया था। उसके बाद अपने रिकार्ड की प्रमाणिकता के लिए लिम्का बुक को भेजा गया लेकिन भेजने के 11 माह तक जब वहां से कोई जवाब नहीं आया तो पूरा परिवार एकदम निराश हो गया था। लेकिन अचानक एक दिन डाकिया जब डाक लेकर पहुंचा और वह डाक कोई ऐसी वैसी डाक नहीं बल्कि लिफाफा खुलने के बाद देखा गया तो लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड से था और उसमें जो था उसको देखने के बाद हरिओम के परिवार में खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। क्योंकि यह रिकार्ड बता रहा था कि हरिओम के हौसले के उड़ान को पंख मिल गया था।






बेटे की कामयाबी पर मां- बाप को गर्व 
हरिओम के माता पिता शिक्षक है और आज अपने इस बेटे की कामयाबी पर गौरव महसूस कर रहे है। हरिओम की मां गीता ने बताया कि जब हरिओम छोटा था और खाना बनाते समय तंग कर रहा था। तब उसे अपने पास से हटाने के लिए पेंसिल और नोटबुक देकर कहा कि जाओ ड्राइंग करों और उसने कुछ ही देर बाद एक चींटी का पोट्रेट हुबहू- हुबहू बना दिया। जिसको देखने के बाद मै भी दंग रह गई और उसके बाद से लगा की मेरा बेटा आर्ट के क्षेत्र में नाम कर सकता है। तब से हमलोगों ने आर्ट बनाने के लिए उसका प्रोत्साहित करते रहते थे। 


वहीं हरिओम के टीचर ने भी हुनर और लगन को पहचाना और उसे पूरी तरह से संवारने का काम किया। मां की तत्परता और टीचर का सानिध्य ने इस कदर रंग लाया कि आज हरिओम लिम्का बुक में नाम दर्ज करा एक जिले के लिए इतिहास कायम किया।
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