#Independence Day पेड़ के पत्ते खाकर भी चीन से लड़ाई लड़े थे वीर अब्दुल हमीद

#Independence Day पेड़ के पत्ते खाकर भी चीन से लड़ाई लड़े थे वीर अब्दुल हमीद
veer abdul hamid

अब्दुल हमीद की वीर गाथा सुनाते हुए  उनकी वृद्ध विधवा रसुलन बीवी हुईं  भावुक

गाजीपुर. देश पे मरने वाले वीर सपूतों का जब भी नाम लिया जाता है तो गाजीपुर के मरणोपरांत परमवीर चक्र विजेता शहीद अब्दुल हमीद का नाम बरबस ही बोंठों पर आ जाता है, 1962 में चीन के साथ हुए युद्ध में उन्होंने दुश्मनों का खूब लोहा लिया था और फिर 1965 में पाकिस्तान के साथ हुई जंग में अमेरिका निर्मित अजेय पाँच पैटेन टैंक को हथगोले से उड़ाने में शहीद होने वाले अब्दुल हमीद की वीर गाथा उनकी वृद्ध विधवा रसुलन बीवी सुनाते सुनाते भावुक हो जाती हैं।

ये है शहीद वीर अब्दुल हमीद का पैतृक गाँव धामुपुर, और ये है उनके नामपर बना पार्क जो साल में एक बार उनके नाम पर रौशन होता है, इस गाँव में बचपन और किशोरावस्था में आम और बैर के फलों को पत्थर के एक वार से मारकर गिरा दिया करते थे स्व.हमीद, बकौल रसूलन बीवी सेना में भर्ती के बाद पहला युद्ध उन्होंने चीन से लड़ा और जंगल में भटक कर कई दिनों तक भूखे रहकर किसी तरह घर आये थे जहां पत्ता तक खाना पड़ा था।

 फिर 1965 में पाकिस्तान वार से पहले 10 दिन के लिए छुट्टी पर आए थे रेडियो से सूचना मिली तो हड़बड़ी में जंग के मैदान में जाने को बेताब हो गये, घर वाले मना करते रह गए, जाते वक्त कई अपशगुन हुए उनकी बेडिंग खुल गयी, साइकिल पंचर हो गयी लेकिन भोर में वो निकल ही गये और जिस जांबाजी से उन्होंने लड़ाई लड़ी वो फिर सबको पता है, गाँव वालों का कहना है कि ढ़ेला मारने में निशानची हमीद साहब का वो हुनर हथगोले से पैटनटैंक तोड़ने के काम आया और शहीद होने तक 7 पाकिस्तानी पैटनटैंक तोड़ने वाले शहीद को मरणोपरांत भारत का सेना में सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र उनकी बेवा रसुलन बीवी को पूरे सम्मान के साथ दिया गया। 
rasulan 
नाम- अब्दुल हमीद, जीडी नंबर-2639985, रैंक- हवलदार, यूनिट- फोर्थ ग्रिनेडियर्स, में अपनी सेवा दे रहे थे। जानकारी के मुताबिक अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को बड़े पैमाने पर पैटन टैंक और गोला-बारूद की आपूर्ति के बाद सीमा पर सैन्य संतुलन काफी बिगड़ गया था। हथियार निर्यातक बड़े देशों के उकसाने पर पाकिस्तानी सेनाओं की गतिविधियां परस्पर विरोधी हो रही थी, इसी बीच रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के अधिकारियों की मांग पर रूस द्वारा निर्मित आर.सी.एल गन की खरीद की। इसके तुरन्त बाद सीमा पर बढ़ती हुई दुश्मन की गतिविधियों के मद्देनजर इसके प्रशिक्षण की दरकार भी शुरू हो गई। 

जिसके बाद भारतीय सेना के अधिकारियों ने विभिन्न इन्फेन्ट्री डिवीजन की टुकड़ियों से अचूक मारक क्षमता के सैनिकों को प्रशिक्षण के लिए ढूंढ निकाला और मौऊ, पूना( महाराष्ट्र) स्थित प्रशिक्षण अकादमी में आर.सी.एल. का प्रशिक्षण लेने का गौरव प्राप्त हुआ। अब्दुल हमीद द्वारा लगन और कर्तव्य निष्ठा से लिए गए प्रशिक्षण ने उन्हें फोर्थ ग्रिनेडियर का सर्वश्रेष्ठ योद्धा बना दिया।
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