कोटा में फंसे झारखंड के छात्र-छात्राएं, CM सोरेन से लगाई घर लाने की गुहार

Jharkhand News: कोटा में पिछले एक महीने से लॉकडाउन में फंसे छात्र-छात्राएं वहां खासे परेशान है, वहीं उनके अभिभाभवक भी (Jharkhand Students Appeal CM Soren To Bring Home Back From Kota) ...

By: Prateek

Updated: 23 Apr 2020, 04:56 PM IST

रवि सिन्हा
गिरिडीह: वैश्विक कोरोना वायरस की महमारी के बाद लगे देशव्यापी लॉकडाउन के कारण झारखंड के विभिन्न जिलों के हजारों छात्र-छात्राएं राजस्थान के कोटा में फंसे है। इंजीनियरिंग और मेडिकल परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोटा गए गिरिडीह जिले के करीब 150 से अधिक छात्र- छात्राएं बुरी तरह से फंसे हुए है। कोटा में पिछले एक महीने से लॉकडाउन में फंसे छात्र-छात्राएं वहां खासे परेशान है, वहीं गिरिडीह में रहने वाले उनके अभिभाभवक भी बच्चों की स्वास्थ्य को लेकर खासे चिंतित है।

 

सोशल मीडिया के जरिए लगाई गुहार...

कोटा में फंसे छात्र-छात्राएं लगातार ट्विटर के माध्यम से राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के साथ - साथ गिरिडीह के उपायुक्त से भी अपने घर वापसी करवाने के लिए लगातार गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब-तक कोई पहल नहीं किए जाने के बाद वंहा फंसे छात्र-छात्राओं के साथ-साथ उनके अभिभावकों की भी परेशानी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

 

छात्रों के साथ—साथ परिजन भी परेशान...

बताया गया है कि कोटा में बढ़ते कोरोना के संक्रमण के बाद धीरे-धीरे करके लगभग पूरा शहर खाली होते जा रहा है, लेकिन वहां फंसे गिरिडीह के छात्र-छात्राएं बेचैन हो गए हैं। ऐसे में छात्र-छात्राएं परेशान होकर दिन में कई-कई बार अलग-अलग माध्यमों से राहत की गुहार लगा रहे है। फंसे छात्र - छात्राओं को लगातार खाने पीने की दिक्कत भी हो रही है। लॉकडाउन में बाजार में सामान नहीं मिलने का असर हॉस्टल की मेस पर भी पड़ रहा है।

 

छात्र ने बताई पीड़ा...

कोटा महावीर नगर फर्स्ट इलाके में फंसा अंकित कुमार देव ने बताया कि वह कोटा में रहकर मेडिकल की तैयारी कर रहा है। लॉकडाउन के बाद इंस्टीट्यूट बंद हो गया है। अन्य प्रदेशों के कई छात्र-छात्राएं अपने-अपने घर वापस चले गए है। लेकिन वे लोग अभी तक यंही फंसे हुए है। लॉकडाउन के बाद काफी परेशानी हो रही है। खाने—पीने के सामान ख़त्म हो गया है। बाजार पूरी तरह से बंद है। घरवाले चिंतित है और उनकी समस्या को कोई सुनने वाला नहीं है। झारखंड सरकार जल्द से जल्द कोई पहल करें और यहां से वापस अपने घर पहुंचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाए।

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Prateek Desk
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