बाबूलाल मरांडी के लिए झाविमो के अस्तित्व को बचाए रखने की चुनौती

आगामी विस चुनाव में यूपीए में टिकट बंटवारे के लिए नहीं बना पाएंगे कोई खास दबाव...

 

By: Prateek

Published: 24 May 2019, 09:07 PM IST

(रांची,गिरिडीह): लोकसभा चुनाव में झारखंड समेत देशभर के हिन्दीभाषी राज्यों में विपक्षी दल को करारी पराजय का सामना करना पड़ा है, लेकिन झारखंड विकास मोर्चा के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी और संगठन के दूसरे सबसे कद्दावर नेता एवं पार्टी के केंद्रीय प्रधान महासचिव प्रदीप यादव की हार से झाविमो के अस्तित्व पर ही संकट मंडराने लगा है। इस हार के बाद झारखंड विकास मोर्चा आगामी नवंबर-दिसंबर महीने में होने वाले विधानसभा चुनाव में यूपीए में शामिल घटक दलों के बीच टिकट बंटवारे के लिए कोई खास दबाव नहीं बना पाएगा।


झारखंड विकास मोर्चा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी को वर्ष 2014 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मिली पराजय के बाद तीसरी बार हार का सामना करना पड़ा है। हालांकि बाबूलाल मरांडी कोडरमा में भाजपा टिकट और फिर एक बार निर्दलीय चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बना चुके है, लेकिन इस बार उन्हें कोडरमा में साढ़े चार लाख से अधिक मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। बाबूलाल मरांडी कोडरमा लोकसभा क्षेत्र के हर विधानसभा क्षेत्रों में हार गये।


झाविमो ने गोड्डा लोकसभा सीट के लिए भी अड़कर कांग्रेस को सीट छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया था, हालांकि वहां से कांग्रेस के फुरकान अंसारी लगातार दो बार से भाजपा के निशिकांत दूबे को कड़ी टक्कर दे रहे थे, लेकिन झाविमो के प्रदीप यादव के खड़ा हो जाने के कारण फुरकान अंसारी को आठ-दस हजार वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ रहा था, इस बार भी फुरकान अंसारी ने टिकट हासिल करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया, लेकिन झाविमो ने गोड्डा सीट नहीं देने पर यूपीए से अलग होने की धमकी दी, जिसके कारण कांग्रेस नेतृत्व ने गोड्डा लोकसभा सीट झाविमो के लिए छोड़ दिया। परंतु चुनाव में कांग्रेस के वोट पूरी तरह से झाविमो उम्मीदवार के पक्ष में टर्न नहीं हो सका, जिसके कारण झाविमो प्रत्याशी प्रदीप यादव 1.80लाख से अधिक मतों के अंतर से हार गये।

 

बाबूलाल मरांडी और प्रदीप यादव की इस हार के बाद अब संगठन को खड़ा रखने की चुनौती पार्टी नेतृत्व के समक्ष होगी। इससे पहले भी झाविमो के आठ में से छह विधायक पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके है, वहीं प्रदीप यादव के रवैये के कारण झाविमो के कई नेताओं-कार्यकर्त्ताओं ने भी पार्टी से किनारा कर लिया है।

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Prateek Desk
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