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आत्मनिर्भर बनने की कला इनसे सीखे, महिलाओं के लिए रेनू बनी मिसाल मिसाल, बोली अब नहीं है बेरोजगार


गोंडा पंखों से नहीं हौसलों से उड़ान होती है। सपने उन्हीं के साकार होते हैं। जिनके सपनों में जान होती है। इस कहावत को चरितार्थ करते हुए एक महिला आत्मनिर्भर बन एक नई मिसाल पेश की है।

गोंडा

Published: December 27, 2021 05:05:55 pm

जिले के पंडरी कृपाल ब्लॉक कि गांव बकठोरवा की रहने वाली रेनू मिश्रा ने स्नातक तक की शिक्षा ग्रहण करने के बाद काफी दिनों तक रोजी-रोटी की तलाश में भटकती रही। जब उसे सरकारी प्राइवेट कोई भी नौकरी नहीं मिली तब भी उसने अपने मन में हार नहीं मानी। मन में कुछ नया करने का सपना सजोए रेनू राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के बारे में विधिवत जानकारी हासिल करने के बाद वह सीधे अपने ब्लॉक के ब्लॉक मिशन मैनेजर से मिली। ब्लॉक मिशन मैनेजर ने उससे समूह बनाने के लिए प्रेरित किया। कहा कि समूह बनाकर आप कोई भी रोजगार कर सकती हैं। इसके लिए सरकारी अनुदान के साथ-साथ बैंकों के माध्यम से ऋण की भी व्यवस्था सरकार द्वारा की गई है। वहां से वापस आने के बाद गांव में पहुंचकर उसने 12 उत्साही महिलाओं को समूह बनाने के लिए प्रेरित किया। समूह की साप्ताहिक व मासिक बैठक कर अंशदान बैंक में जमा करने के साथ-साथ कुछ नया करने का विचार बैठक में होता रहा। एक दिन रेनू ने ब्लॉक के अधिकारियों को अगरबत्ती बनाने के लिए इच्छा जाहिर व्यक्त करते हुए अपनी पूरी योजना बताई। जिस पर ग्रामीण आजीविका मिशन के अधिकारियों ने रुचि दिखाते हैं।
उसे अगरबत्ती बनाने की ट्रेनिंग दिलाई गई। खुद प्रशिक्षित होने के बाद उसने समूह की सभी महिलाओं को प्रशिक्षित किया। सरकार के अनुदान से मिलने वाली धनराशि वह अंशदान को इकट्ठा कर उसने अगरबत्ती बनाने की मशीन मंगाई। इसके बाद बैंक ने सर्वे किया तथा समूह का सीसीएल बना दिया। अब समूह के पास एक आवश्यक पूंजी भी हो गई। जिससे अगरबत्ती बनाने के लिए कच्चा माल व रैपर छपवाए। इस संबंध में रेनू मिश्रा ने बताया कि वह स्नातक तक की शिक्षा ग्रहण करने के बाद बेरोजगार थी। उसे रोजगार की तलाश थी। ब्लॉक से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के बारे मे पता चला वहाँ अगरबत्ती बनाने के लिए ट्रेनिंग मिली। फिर मैंने मां लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह बनाकर 12 महिलाओं की एक टीम बनाकर मशीन लगाया। उसके बाद अगरबत्ती बनाने का काम शुरू किया। समूह की सभी महिलाएं मिलकर अगरबत्ती बनाते हैं। पैकिंग करने के बाद बाजार में उसे सेल करते है । अब हम बेरोजगार नही है।
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