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यहां तो विद्युत बल्ब जलते नहीं बल्कि उसके एलिमेंट लाल होते, युवाओं के शादी ब्याह में बाधा बनी बिजली की समस्या

गोंडा जिले का एक ऐसा गांव जहां पर विद्युतीकरण होने के बावजूद लोगों को बिजली नसीब नहीं हो रही है। विद्युतीकरण के समय बड़े पैमाने पर हुई अनियमितता का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। यहां पर विद्युत बल्ब जलते नहीं बल्कि आपूर्ति होने पर उनके एलिमेंट लाल हो जाते हैं। ग्रामीणों की माने तो इस गांव के युवाओं की अब शादी भी नहीं हो रही है। उसके पीछे गांव में बिजली की समस्या प्रमुख कारण बन गई है।

गोंडा

Published: April 20, 2022 07:48:06 pm

मंडल मुख्यालय से महज 3 किलोमीटर की दूरी पर झंझरी ब्लॉक के गांव लक्ष्मनपुर मझवा का है। इस गांव का देश की आजादी के बाद विद्युतीकरण हुआ तो मानको की इस कदर अनदेखी की गयी कि 3 गांव की आपूर्ति एक ट्रांसफार्मर के भरोसे कर दी गई। 3 गांव में एक गांवो की दूरी जहां पर ट्रांसफार्मर रखा है। वहां से लगभग एक किलोमीटर है। ऐसे में लो वोल्टेज नहीं बल्कि वर्षों से इन गांव में बल्ब के एलिमेंट सिर्फ लाल होते हैं। जिससे विद्युत आपूर्ति का कोई मतलब नहीं रह गया। ग्रामीणों की माने तो कई बार उन लोगों द्वारा इसकी शिकायत शासन प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों से की लेकिन मामला ढाक के तीन पात ही रहा। ग्रामीणों का कहना है कि इस अत्याधुनिक युग में हम लोगों के गांव में विद्युतीकरण होने के बाद भी बिजली ना मिल पाने के कारण अब इस गांव में युवाओं की शादी ब्याह के भी लाले पड़ गए हैं। गांव में युवाओं की शादी देखने आए लोग बिजली की समस्या जानकर बिना कोई बातचीत किए हुए ही बैरंग वापस लौट जाते हैं। यहां के होनहार छात्र आज भी टॉर्च व ढ़िबरी की रोशनी में पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं। गांव के बजरंग प्रसाद तिवारी बताते हैं। कि हमारे गांव में बिजली आने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि विद्युत आपूर्ति होने पर जब बल्ब भी नहीं हैं कुछ लोगों ने स्टेप्लाइज़र लगा लिया है उनके यहां भी पंखे रो रहे हैं। एलईडी बल्ब किसी तरह से जल रहे हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई बाधित होने के साथ-साथ हम लोग इस भीषण गर्मी में तपने के लिए विवश हैं। घनश्याम मिश्रा का कहना है कि गांव में विद्युतीकरण होने का या फिर आपूर्ति आने का कोई मतलब नहीं है। उनका कहना है कि अब तो इस गांव में रहना ही मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे ही स्थित बनी रही तो बच्चों के शादी विवाह नहीं होंगे। गांव में आने वाला हर व्यक्ति अब यही कहता है कि तुम्हारा गांव इतना पिछड़ा है। कि अभी सुचार रूप से जब बिजली नहीं मिल पा रही है। तो फिर क्या कहा जाए। टॉर्च के उजाले में पढ़ रहा एक नन्हे छात्र सिद्धान्त ने बताया कि हमारे यहाँ बिजली बहुत कम आती इतनी कम रोशनी में जब हम पढ़ते हैं तो सिर में दर्द होने लगता है। इस संबंध में विद्युत विभाग के मुख्य अभियंता ने बताया प्रकरण संज्ञान में आया है संबंधित अधिकारी को निर्देश देकर समस्या का समाधान कराया जाएगा एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे व शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे आपूर्ति के नियम हैं। हालांकि नियम कुछ भी है लेकिन वर्तमान समय में ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि के समय अघोषित कटौती से ग्रामीण काफी परेशान है।
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