अंधेरे से लड़कर देश का नाम किया रोशन, अब है मुफलिसी का शिकार 

सरकार! इस दिव्यांग खिलाड़ी की भी सुनो, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम कर चुका है रोशन....

गोंडा. अंतरराष्ट्रीय महिला विश्व कप 2017 में जब इंडियन वूमेंस टीम ने फाइनल तक का सफर तय किया, खिलाड़ियों पर इनामों की बौछार हुई। लेकिन इस बीच ऐसी भी कई खबरें आईं कि किसी भी पार्टी की सरकार ने खिलाड़ियों की तरफ उचित ध्यान नहीं दिया। ऐसा ही एक मामला गोंडा जिले में आया है, जहां एक अंतरराष्ट्रीय जूडो चैम्पियनशिप में देश के लिए कांस्य पदक विजेता दिव्यांग खिलाड़ी मुफलिसी में जीवन जीने को मजबूर है।

गोंड़ा जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर हलधरमऊ के हड़ियाडांडा गांव के दिव्यांग खिलाड़ी राजन बाबू ने पिछले दिनों भारत के लिए कांस्य पदक जीता था, लेकिन आज उनके पास सुविधाओं ने नाम पर एक घर भी नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाला दिव्यांग खिलाड़ी बारिश में झोपड़ी में जीवन में गुजर-बसर कर रहा है।

देश के लिए ओलंपिक जीतना चाहते हैं राजन
दिव्यांग खिलाड़ी राजन बाबू ने पिछले दिनों वियतनाम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय चैंपिनयशिप में देश के लिए कांस्य पदक जीतकर गांव के साथ ही पूरे देश का नाम रोशन किया था। सरकार और खेल संघों की उपेक्षा के बावजूद दिव्यांग राजन देश के ओलंपिक में मेडल जीतना चाहता है।

सीएम योगी से मदद की आस
दिव्यांग होने के बावजूद राजन के माता-पिता ने कभी उसका हौसला कम नहीं होने दिया। अक्सर बीमार रहने वाले पिता हनुमान सिंह ने बेटे अपनी जमीन गिरवी रखकर बेटे को खिलाड़ी बनाया। बुजुर्ग माता-पिता को उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार उनके बेटे की मदद जरूर करेंगे। ग्रामीण भी सरकार से मांग करते हैं कि सरकार को हमारे जिले के गौरव दिव्यांग खिलाड़ी राजन बाबू की मदद जरूर करनी चाहिए।
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Hariom Dwivedi
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