नगर पालिका उड़ा रहा एन.जी.टी और उच्चतम न्यालय के आदेशों की धज्जियां

प्रदुषण से बचाव के लिए सरकार जहां हर सम्भव प्रयास करती रहती है। वहीं जिले के जिम्मेदारों के कानों में जूं नहीं रेंगती। उ

By: Abhishek Gupta

Published: 08 Nov 2018, 06:09 PM IST

Lucknow, Uttar Pradesh, India

गोण्डा. प्रदूषण से बचाव के लिए सरकार जहां हर सम्भव प्रयास करती रहती है। वहीं जिले के जिम्मेदारों के कानों में जूं नहीं रेंगती। उनके शह पर अधीनस्थ आदेशों का जमकर धज्जियां उड़ा रहे हैं। नगर क्षेत्र के रॉयल पैराडाइज सर्कुलर रोड पर नगर पालिका का डंपिंग यार्ड स्थापित है। जहां पूरे शहर के कूड़े को डंप किया जाता है। जहां दर्जनों कबाड़ चुनने वाले हमेशा दिखाई पड़ जाएंगे, कूड़ा डंप करने से अभी तक इस रास्ते से गुजरने पर विशेषकर वारिस में सडांध रहता था, लेकिन इन कूड़ों में आग लगा देने से स्थित बदतर हो जाती है। करीब 2 किमी क्षेत्रफल में धुए के कारण क्षेत्र में धुंधला दिखाई पड़ता है और सांस लेने में दिक्कत के साथ-साथ दम घुटने लगता है। जबकि एन जी टी और उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार कूड़े को जलाना गैर कानूनी है। यहां आग से कूड़े कई दिनों तक सुलगते रहते हैं। इससे निकलने वाला जहरीला धुआं लोगों के लिये जान का घातक बना हुआ है।

लोगों में कैसा है आक्रोश-

जिले के झंझरी ब्लॉक के पीछे से फ़ैजाबाद बाईपास पर नगरपालिका का डंपिंग यार्ड जहाँ कूड़ो में आग लगने से एक सप्ताह से निकलने वाले धुंए से स्थिति काफी बिगड़ रही है। आस पास रहने वाले लोगों में आक्रोश है। एनजीटी के सख्त आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है। एनजीटी के आदेशानुसार कोई भी व्यक्ति खुले में कूड़ा कचरा, सुखी पत्तियां, पराली, प्लास्टिक आदि को जला नहीं सकता है। अगर इस तरह के कार्य में कोई पकड़ा जाता है तो उस पर पांच हजार तक का जुर्माना हो सकता है, लेकिन यहाँ तो खुद नगर पालिका के डंपिंग यार्ड व कुछ वीआईपी स्थानों पर कूड़े जलाए जाते हैं, जो कई दिनों तक सुलगता रहता है। इससे उठने वाला धुंआ यहां लगभग पांच हजार की आबादी वाले जिया कालोनी फैजाबाद रोड के लोगों को काफी नुकसान पहुँच रहा है।

कूड़ा यार्ड के सामने व्यवसाएं करने वाले चाँद बाबू ने बताया कि यह इतना खतरनाक है कि पांच बजे के बाद हमारा दुकान पर बैठना मुश्किल हो जाता है। यहाँ तक की कभी कभी तो हम लोगों को उल्टियां भी होने लगती हैं। हमारे यहाँ पहले किराये पर दो लोग रहते थे वह भी धुएं और दम घुटने की वजह से मकान खाली कर के चले गए। उन्होंने बताया कि रोजी रोटी के लिए के उन्हें यहाँ बैठना पड़ता है। इसकी कई बार हमने लिखित शिकायत की है परंतु कोई सुनने वाला नही है, स्थानीय मजीद खान ने बताया कि सांस लेने में परेशानी तो है ही साथ ही इससे फसलों को भी नुकसान पहुँच रहा है डंपिंग यार्ड के पास में ही गन्ने की फसल लगी है जो इससे प्रभावित हो रही है।

क्या कहना है डाक्टर का-

जिला अस्पताल में जब डा. वी. के गुप्ता से बात की गयी तो उन्होंने बताया कि प्लास्टिक आदि जलने से वायुमंडल में कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है। जिससे लोगों में साँस की बीमारियां बढ़ जाती हैं। खासकर कर के बच्चों और बूढों में सांस की बीमारियों का खतरा ज्यादा रहता है। इसलिये प्लास्टिक आदि को सिर्फ डंप कर देना चाहिए जलाना नही चाहिए। जबकि जिलाधिकारी प्रभांशु श्रीवास्तव ने बताया कि मामला गंभीर है ई. ओ नगरपालिका को इस मामले में निर्देशित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि डंपिंग यार्ड में कूड़ो की वजह से मीथेन गैस उत्पन्न होती है। जो हलकी सी चिंगारी से भी आग पकड़ लेती है। लेकिन यह सर्वोच्च न्यायालय का आदेश है की कूड़ो को जलाया न जाए। हमने इस पर कार्रवाई के निर्देश दे दिए है।

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