Human Angle : महिला सशक्तिकरण की मिसाल पूनम, पहले रिक्शा खींच अब ऑटो रिक्शा चला कर करती पूर्णमिदं जीवन यापन

गरीबी को मात देने वाली एक ऐसी महिला जिसने गरीबी से हार नहीं मानी। पहले रिक्शा खींच अब ऑटो रिक्शा चलाकर अपने पांच बच्चों की परवरिश करती है।

By: Neeraj Patel

Published: 03 Dec 2019, 04:32 PM IST

गोण्डा. गरीबी को मात देने वाली एक ऐसी महिला जिसने गरीबी से हार नहीं मानी। पहले रिक्शा खींच अब ऑटो रिक्शा चलाकर अपने पांच बच्चों की परवरिश करती है। पूनम नाम की इस महिला ने जब रिक्शा को अपनी कमाई का माध्यम बनाया तो इसकी मेहनत को देखकर लोग दंग रह जाते थे, क्योंकि जिले की इकलौती महिला थी जो रिक्शा चलाकर अपना तथा बच्चों का जीवन यापन करती थी। काफी समय तक रिक्शा खींचने के बाद अब ऑटो रिक्शा चलाकर अपने बच्चों का भरण पोषण करती है।

शराबी पति से परेशान पिछड़े वर्ग की महिला काफी दिनों तक रिक्शा चलाने के बाद अब खुद का ई-रिक्शा चलाकर पांच बच्चों के साथ गुजर बसर कर रही है। हताश और लाचार पूनम ने एक अभूतपूर्व कदम उठाया, उन्होंने रिक्शा को अपने दम पर चलाने का फैसला किया। पूनम की मेहनत व दर्द भरी जिंदगी नारी उत्थान के नाम पर बड़ी-बड़ी बातें करने वालों के मुंह पर करारा तमाचा है। पुरुष प्रधान समाज में नारी सशक्तिकरण की मिसाल बनी पूनम आत्म निर्भरता की भी जीती जागती मिसाल बन गई हैं।

पति ने किया विवश

जिले के रगड़गंज गांव के लिलोई कला निवासिनी पूनम वर्मा की शादी करीब 21वर्ष पूर्व तरबगंज तहसील क्षेत्र के गांव डिक्सिर निवासी धर्मपाल के साथ हुई थी। शादी के बाद काफी दिनों तक पति के साथ रही और सुखमय जीवन बीत रहा था। समय के साथ परिस्थितियां बदलीं और पति शराब पीने का आदी हो गया। काफी प्रयास के बाद भी जब पति की आदत नहीं बदली तो उससे परेशान होकर पूनम को किनारा करना पड़ा। रिश्ता टूटने के बाद पूनम जनपद मुख्यालय पर उपरहितन पुरवा में किराये के मकान में रहकर रिक्शा चलाकर अपने 5 बच्चों की परवरिश करती रही। पूनम को एक ट्रांसपोर्ट से रिक्शे पर लादकर दुकानों पर सामान की डिलीवरी करते देखा जाता था। पूनम का कहना है कि पति के अत्यधिक शराब पीने और काम धंधा न करने से बच्चे भूखों मरने लगे थे। पति हमेशा शराब के नशे में बेहोश रहता बच्चे भूख से बिलबिलाते रहते थे। यह स्थिति हमारे सहनशक्ति से बाहर थी। फिर मैंने स्वयं मेहनत करने का फैसला किया।

किसी भी सरकारी योजना का नहीं मिला लाभ

अब तक मुझे किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला है। पूनम के पांच बच्चों में दो बेटे व तीन बेटियां है। तमाम मुश्किलों से जूझने के बाद भी पूनम अपने बच्चों की शिक्षा पर भी ध्यान दे रही है। गरीबी के कारण बड़ी बेटी अंजू महज कक्षा आठ तक पढ़ पाई। जबकि प्रकाश, आकाश, संजू व बिट्टी मुख्यालय के ही परिषदीय स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। बदहाली के सवाल पर पूनम का पूरा परिवार भावुक हो गया और सवालों का जवाब देने के बजाय सब रोने लगे। पूनम की बड़ी बेटी अंजू ने बताया कि यदि मां रिक्शा न चला रही होती तो अब तक भूख से हम लोगों की मौत हो जाती। मां सुबह से शाम तक कठिन मेहनत कर हम लोगों का पेट भरती है। पिता का साथ छोड़ने के बाद हम लोगों की स्थिति बहुत गम्भीर हो गई। जब मां को और कोई रास्ता न दिखा तो वह शहर आकर किराये के मकान में रहकर रिक्शा चलाकर हम लोगों का भरण पोषण करने लगी।

आटो दिलाने का छेड़ा अभियान

इसके साथ ही पूनम ने कहा कि सभी ने उन्हें इस पेशे को छोड़ने और महिलाओं से जुड़े काम करने की सलाह दी, लेकिन मेरे दृढ़ निश्चय ने मुझे डिगने नहीं दिया। शहर के ही ईदगाह रोड पटेल नगर में मोबाइल शाप चला रहे समाजसेवी आफताब तन्हा को जब पूनम की बेबसी का पता चला तो पूनम को एक ई रिक्शा आटो दिलाने का अभियान छेड़ दिया। उनके परिचित रानी बाजार के महेश सोनी ने अपने पुराने ई रिक्शे को दे दिया। जिसकी बैट्री खराब थी। कई और लोगों ने सहयोग दिया और नई बैट्री लगवाकर पूनम को ई रिक्शा दे दिया। अब उनके पास खुद का आटो रिक्शा है और वह पूरे मनोयोग से आटो चलाकर अपने बच्चों का पेट पाल रही हैं।

Neeraj Patel
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