पीएम मोदी ने सरदार सरोवर बांध का किया उद्घाटन, लेकिन 8 हजार करोड़ खर्च के बावजूद दम तोड़ रही यूपी की यह परियोजना

Hariom Dwivedi

Publish: Sep, 17 2017 01:02:07 (IST)

Gonda, Uttar Pradesh, India
 पीएम मोदी ने सरदार सरोवर बांध का किया उद्घाटन, लेकिन 8 हजार करोड़ खर्च के बावजूद दम तोड़ रही यूपी की यह परियोजना

78 करोड़ की परियोजना पर खर्च हो गए 8 हजार करोड़, 40 साल बाद भी खेतों तक नहीं पहुंचा पानी, हाईकोर्ट में याचिका दायर

गोण्डा. प्रधानमंत्रनरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिन पर गुजरात में सरदार सरोवर बांध परियोजना का उद्घाटन किया। सरदार सरोवर बांध परियोजना से हजारों हेक्टेयर जमीन की पर खेती लहलहाएगी, हजारों गांवों तक पीने का पानी पहुंचेगा और बिजली बनेगी। उत्तर प्रदेश में भी आज से करीब 40 साल पहले शुरू हुई सरयू नहर परियोजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। इस परियोजना का भी उद्देश्य भी कुछ ऐसा ही था। सरयू नहर परियोजना में अब तक 8 हजार करोड़ खर्च हो चुके हैं, लेकिन फिर भी किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। परियोजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आ रहा है।

वर्ष 1977-78 में दो मण्डलों के 9 जनपदों (गोण्डा, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, बस्ती, संत कबीरनगर, गोरखपुर) की 14.4 लाख हेक्टेअर भूमि पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरयू नहर परियोजना की शुरुआत की गई थी, ताकि हर खेतों तक पानी पहुंच जाए। जानकार बताते हैं कि इस परियोजना को यदि समय से पूरा किया गया होता तो आज किसानों को सिंचाई के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ता। इन नौ जिलों के किसानों के लिए यह परियोजना किसी वरदान से कम नहीं होती। लेकिन सरयू नहर परियोजना के जिम्मेदार अधिकारी कागजों में आंकड़ों की बाजीगरी कर 10 लाख हेक्टर भूमि की सिंचाई होने का दावा कर रहे हैं।

फर्जी सर्वे कराता है सिंचाई विभाग
क्षेत्र के लोग ऐसी बयानबाजी से गुस्से में हैं। उनका कहना है कि अधिकारियों को आंकड़ेबाजी करते शर्म नहीं आती है ? गोण्डा व बहराइच जनपद की बीस ऐसी माइनरें हैं, जिनसे किसानों के खेतों तक पानी नही पहुंच रहा। हकीकत माइनरों में उगी झाड़ियां खुद बयां कर रही है। इनकी सफाई बीसियों सालों से नहीं हुई है। क्षेत्रीय लोगों ने बताया कि मुख्य नहर के आस-पास के किसान सूखे की स्थिति में मुख्य शाखा को काट देते हैं। इससे सिंचाई तो कुछ किसान कर लेते हैं, लेकिन अधिकांश किसानों की फसलें डूब जाती है। नहर विभाग इसी का सर्वे कराकर खेतों के सिंचाई होने का दावा कर रहा है।

सिल्ट सफाई के नाम पर डकार गये 5 सौ करोड़
नहरों की सिल्ट सफाई के नाम पर बड़े पैमाने पर गोल-माल किया गया है। मामला मीडिया में आने के बाद भी तत्कालीन शासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। वर्ष 2016 में 26 जून से जेसीबी मशीनों द्वारा सिल्ट के सफाई का काम शुरू किया गया, जो एक पखवाड़ा भी नहीं चल सका, तब तक नहर में पानी आ गया। आरोप है कि सरयू नहर खण्ड फैजाबाद के मुख्य अभियन्ता ने अपने चहेते फर्म को सिल्ट सफाई का काम देकर खूब गोल-माल किया। सबसे खास बात यह है कि मुख्य अभियन्ता पर आरोप भले ही कुछ भी लगे हों, लेकिन पिछली सरकार में मलाईदार पद पर आसीन रहते हुए वर्तमान सरकार के भी चहेते हो गये।

गजब! 20 माइनरें सूखी फिर भी हो रही सिंचाई
गोण्डा व बहराइच जनपद की लगभग 20 माइनरों में पानी नहीं जा रहा है, लेकिन विभाग के आंकड़ेबाजी इन माइनरों से भी सिंचाई होने की बात कर रहे हैं। इसके पीछे कारण यह है कि किसी माइनर में 20 मीटर तो किसी में 30 मीटर तक पानी पहुंच रहा है। इनमें क्रमशः रानियापुर, गेधारिया, परसिया, प्रतापपुर, विछड़ी, अन्तवापुर, गौसिया, रुपईडीह, चैसार, कल्यानपुर, सहजनवा, रानीपुर, जानकी नगर, कमड़वा, कुरासी माइनरें शामिल हैं।

पानी के लिए 59 दिन प्रदर्शन फिर भी नहीं मिला पानी
रग्घू बाबा सेवा संस्थान के अगुवाई में कलेक्ट्रेट परिसर में विभिन्न समाजिक संस्थाओं द्वारा लगातार 59 दिनों तक किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए माइनरों की साफ-सफाई कर पानी पहुंचाने की मांग की गई, लेकिन जब जिम्मेदारों के ही पानी नहीं रह गया तो फिर किसानों के खेतों तक पानी कैसे पहुंचेगा। यह एक यक्ष प्रश्न बन चुका है।

हाईकोर्ट में याचिका दायर
संस्थान के अध्यक्ष राजकुमार दूबे ने बताया कि नहर विभाग के अधिकारी पूरी तरह से निरंकुश हो चुके हैं। पिछली सरकार में भी जमकर घोटाला किया। नई सरकार में भी अंगद की तरह पांव जमाये हैं। मर्जी हो जिससे शिकायत करो, इनकी सेहत पर कोई असर पड़ने वाला नहीं है। उन्होंने बताया कि शासन प्रशासन से उम्मीद क्षीण हो जाने के बाद संस्थान ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। देर सबसे न्याय जरूर मिलेगा। हम किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए हर सम्भव प्रयास करते रहेंगे।

Special Report : कैलाश वर्मा

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