हरिकेश के लिए आसान नहीं था गांव की पगडंडियों से अमेरिका तक का सफर

- टोक्यो ओलम्पिक 2021 में देश के लिए गोल्‍ड मेडल जीतने का है सपना
- दृढ़ इच्छाशक्ति से गोरखपुर के चौरीचौरा के हरिकेश मौर्य ने खुद लिखी सफलता की दास्तां

By: Hariom Dwivedi

Updated: 23 Feb 2021, 07:58 PM IST


पत्रिका न्यूज नेटवर्क
गोरखपुर. इच्छाशक्ति दृढ़ हो तो बड़े से बड़ा लक्ष्य भी आसानी से हासिल किया जा सकता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है गोरखपुर के लाल हरिकेश ने। आड़ी-तिरछी पगडंडियों पर दौड़ते-दौड़ते आज वह देश-दुनिया के बड़े-बड़े धावकों को पछाड़ दे रहा है। अब उसका सपना इसी वर्ष जापान के टोक्यो में होने वाले ओलम्पिक में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है। हरिकेश की चाहत है कि ओलम्पिक में जब वह ट्रैक पर उतरे तो उसके सीने पर तिरंगा हो। ओलम्पिक में देश के लिए गोल्‍ड मेडल जीतने के सपने को पूरा करने के लिए स्‍कालरशिप पर वह अमेरिका के टेक्‍सास में ओलम्पिक 2021 की तैयारियों में जुटा है। लॉकडाउन में उसे आर्थिक दिक्‍कतें आईं तो पिता से कहकर साढ़े छह लाख रुपए में अपने हिस्‍से की जमीन बिकवा दी।

गोरखपुर की ऐतिहासिक धरती चौरीचौरा के अहिरौली गांव के विश्‍वनाथ मौर्य के बेटे हरिकेश की कहानी बिल्कुल फिल्मी है। बचपन से उसे दौड़ने का शौक था। 15 वर्ष उम्र तक पहुंचते-पहुंचते वह गांव की पगडंडियों पर फर्राटा भरने लगा। इस दौरान वह जहां भी दौड़ प्रतियोगिता के बारे में सुनता, उसमें भाग लेता। लगातार जीत मनोबल बढ़ाती रहीं और 2010 में उसने मुम्बई मैराथन में लोगों का ध्याना खींचा। आर्थिक परेशानियां आड़े आईं तो होटलों में काम भी किया, लेकिन हौंसले को टूटने नहीं दिया। हरिकेश अब तक कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग ले चुके हैं।

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वर्ष 2011 में नागपुर में 40 किमी इंटरनेशनल मैराथन प्रतियोगिता हुई, जिसमें हरिकेश नंगे पैर दौड़ा। लंबे कद वाले देशी-विदेशी धावक उसकी कम हाइट पर हंसते थे, लेकिन जब वह दौड़ा तो सबको पीछे छोड़ दिया। और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 2017 में असोम में हुई 10 किमी प्रतियोगिता जीती। इसके बाद 2017 में ही अमेरिका के मैक्सिको में 10 किमी अंतर्राष्ट्रीय दौड़ में स्वर्ण पदक जीतकर अपना लोहा मनवाया। इसी वर्ष भूटान में इंटरनेशन दौड़ प्रतियोगिता हुई, जिसमें हरिकेश ने 10वीं रैंक हासिल की। छोटे कद के इस धावक की प्रतिभा को देखते हुए 2017 में ही अमेरिका ने उसे स्कॉलरशिप का विशेष ऑफर दिया। इस तरह वह अमेरिका पहुंच गया। केन्या और नाइजीरिया में आयोजित मैराथन प्रतियोगिता में भी हरिकेश भाग ले चुके हैं। देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने का सपना लिए हरिकेश मौर्य इस समय अमेरिका में रहकर ओलम्पिक के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है। हरिकेश ने भारत सरकार से भी मदद की गुहार लगाई है। उनका सपना है कि देश के लिए गोल्‍ड मेडल जीतकर ही भारत वापस आए।

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क्या बोले भारतीय एथलेटिक्स टीम के कोच
भारतीय एथलेटिक्स टीम के कोच सुरेंद्र सिंह भंडारी ने बताया कि ओलिम्पिक में एथलेटिक्स के लिए कुछ ही लोग चयनित हुए हैं। उनकी जानकारी में हरिकेश मौर्य नाम का फिलहाल कोई खिलाड़ी शामिल नहीं है।

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